13/07/2021
पनीर की सब्जी 😛
अच्छा एक बात बताइए हम शाकाहारी देसी लोग जब भी होटल में डिनर या लंच के लिए जाते हैं, तो हमारे आर्डर में एक ना एक पनीर की सब्जी जरूर होती है ना? मुझे पता है आपका जवाब हाँ ही होगा। लेकिन आज का विषय लंच का मेनू नही, बल्कि पनीर की सब्जी का नामकरण है। मेरे विचार से जिसे हम पनीर की सब्जी कहते हैं वह वास्तव में सब्जी होती ही नहीं है, फिर सब्जी क्यों कहलाती है सोचिए जरा।
आखिरकार यह सब्जी शब्द आया कहां से है? दरअसल ये फारसी भाषा का शब्द है, जो कि सब्ज़ से बना है, जिसका मतलब होता है हरा। इसलिए जो भी हरे रंग की सब्जियां हैं, सिर्फ उन्हें ही सब्जी कहा जा सकता है। फिर बाकी के आलू, प्याज, टमाटर, कद्दू को क्या कहेंगे? उसके लिए हिंदी में शब्द होता है तरकारी। इसमें सभी रंगों की तरकारी शामिल हैं, पत्तेदार सब्जियों को भाजी कहा जाता है।
तरकारी आमतौर पर दो तरह से तैयार की जा सकती है, सूखी और रसेदार। इनमें जिन चीजों को तेल मसाले में भूनकर सूखी बनाते हैं, उसे कहते हैं भुजिया। फिर गीली को क्या कहेंगे? उस मसालेदार तरल को हिंदी में झोल अथवा रस्सा कहते हैं, और उर्दू में शोरबा कहा जाता है। गीले व्यंजनो में सालन भी बनते हैं जो जरा भारी और संतृप्त होते हैं, उदाहरण के लिए दक्षिण भारत का मशहूर मिर्च का सालन, शोरबा, सालन के अपेक्षा पतला होता है। हालांकि सालन हिंदी का नहीं उर्दू का शब्द है, हिंदी में तो रसेदार या झोल वाली तरकारी ही कहा जाएगा।
सालन कई प्रकार के होते हैं, इसमें थोड़ी गाढ़ी ग्रेवी होती है, जो विभिन्न चीजों से बनाई जाती है, जैसे मिर्च के सालन में नारियल, मूंगफली, तिल आदि का प्रयोग होता है, दही वाले सालन भी होते हैं। अंग्रेज लोगों ने भारतीय रसेदार व्यंजनों को करी का नाम दिया, उनके हिसाब से करी में लगभग हर तरह की रसेदार भारतीय व्यंजन आ जाते हैं, जिन में दाल, सब्जी, कढ़ी सब कुछ शामिल था, हमारे लिए ये सब बहुत अलग हैं हालांकि। इस हिसाब से करी जो है वो कढ़ी से अलग है, कढ़ी हम दही से अथवा बिना दही के भी बनाते हैं, परंतु उसे रसेदार सब्जियों से अलग श्रेणी में रखते हैं।
अंग्रेजों द्वारा ग्रेवी बनाइ जाती थी जिसका उपयोग किसी खाद्य पदार्थ की ड्रेसिंग के रूप में होता था, व्यंजन में ऊपर से डालकर उसका स्वाद बढ़ाया जाता। पुराने जमाने में जो ग्रेवी अंग्रेज बनाते थे, वह आज की ग्रेवी से बिल्कुल अलग होती थी, ज्यादा गाढ़ी नही होती थी, सेब, प्याज और मसालों से बनी ये ग्रेवी ब्रिटिश काल में लोकप्रिय थी। बाद में हमारे रेस्टोरेंट्स में कई तरह की ग्रेवी विकसित हुईं। जिन में मशरूम, पनीर, सब्जियां, कोफ्ते आदि डालकर उनके व्यंजन बनाए गए। इस हिसाब से इन व्यंजनों को सब्जी कहना तो सही नहीं है। हालांकि इन्हें सालन भी नहीं कहा जा सकता क्योंकि पुराने तरीके से बनने वाले सालन से इनकी ग्रेवी अलग होती हैं। तो फिर जो शाही पनीर आदि हम खाते हैं वह क्या है?
हम हर तेल मसाले में बनी तीखी चटपटी चीज़ को सब्जी बोल देते हैं, जो की गलत है। मेरे विचार से ग्रेवी वाले या बिना ग्रेवी के जो भी पनीर व्यंजन हैं, उन्हें उनके नाम से ही बुलाया जाना चाहिए, जैसे पनीर पसन्दा जो है, वो पनीर पसन्दा ही है, पनीर की सब्जी नहीं। मेरी कल की पोस्ट वाली दूध सेंव ही है, दूध सेंव की सब्जी नहीं। जिनमे हरी सब्जियां उपयोग हों सिर्फ उन्हें ही सब्जी कहां जाना चाहिए, क्योंकि दुनिया मे पनीर की सब्जी जैसी कोई चीज़ नही होती 😃