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न रूठा किसी से कीजिये,
न झूठा वादा किसी से कीजिये,
कुछ फुरसत के पल निकालिये,
कभी खुद से भी मिला कीजिये..🔸|   🌼 🌄 𝐏𝐈𝐂𝐓𝐔𝐑𝐄...
27/01/2024

न रूठा किसी से कीजिये,
न झूठा वादा किसी से कीजिये,
कुछ फुरसत के पल निकालिये,
कभी खुद से भी मिला कीजिये..
🔸| 🌼

🌄 𝐏𝐈𝐂𝐓𝐔𝐑𝐄 𝐁𝐘 :
©ᴄᴏᴘʏʀɪɢʜᴛ ʀᴇᴛᴀɪɴᴇᴅ ʙʏ ᴛʜᴇ ᴀʀᴛɪꜱᴛ.

🔔 ᴛᴀɢ ʏᴏᴜʀ ꜰʀɪᴇɴᴅꜱ ᴡɪᴛʜ ᴡʜᴏᴍᴇ ʏᴏᴜ ᴡᴀɴᴛ ᴛᴏ ɢᴏ ʜᴇʀᴇ! 👫

𝐅𝐨𝐥𝐥𝐨𝐰 𝐮𝐬 : & 𝐡𝐚𝐬𝐡𝐭𝐚𝐠 :

“हिमाचल को साफ सुथरा रखें। धन्यवाद
ᴋᴇᴇᴘ ʜɪᴍᴀʟᴀʏᴀꜱ ᴄʟᴇᴀɴ & ɢʀᴇᴇɴ ▪

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“Himachal Pradesh Statehood Day🇮🇳”On 18th December, 1970 the State of Himachal Pradesh Act was passed by Parliament and ...
25/01/2024

“Himachal Pradesh Statehood Day🇮🇳”

On 18th December, 1970 the State of Himachal Pradesh Act was passed by Parliament and the new state came into being on 25th January, 1971. Thus H.P. emerged as the eighteenth state of Indian Union.
Himachal Pradesh has come a long way since then.

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𝐅𝐨𝐥𝐥𝐨𝐰 𝐮𝐬 : & 𝐡𝐚𝐬𝐡𝐭𝐚𝐠 :

“हिमाचल को साफ सुथरा रखें। धन्यवाद
ᴋᴇᴇᴘ ʜɪᴍᴀʟᴀʏᴀꜱ ᴄʟᴇᴀɴ & ɢʀᴇᴇɴ

कभी कभी खो भी जाना चाहिये ये देखने के लिए की कौन तलाश करने आता है
16/12/2023

कभी कभी खो भी जाना चाहिये ये देखने के लिए की कौन तलाश करने आता है

The village of Khab is located in Himachal Pradesh, India, a mountainous region. Near the India-Tibet border, in the val...
06/12/2023

The village of Khab is located in Himachal Pradesh, India, a mountainous region. Near the India-Tibet border, in the valley of the Sutlej River. State capital Shimla is accessible through National Highway 22 from Khab. It is located at the junction of the Spiti and Sutlej rivers in Khab Sangam.
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Ancient village Kalpa, kinnaur 📍•••Please keep Himalayan regions free from all kind of plastic garbage / neat and clean ...
29/11/2023

Ancient village Kalpa, kinnaur 📍



Please keep Himalayan regions free from all kind of plastic garbage / neat and clean so that our coming generations can also enjoy its beauty.










10/07/2023

⚠️
Heavy loss of life and property in Northern India as rain continues on the third day.
Himachal Pradesh worst hit state as Beas, Chenab, Satluj and their tributaries are in full fierce mode.
⚠️
Landslides, Cloudburst, Water logging, flashflood and continuous rain has put the whole state at the halt.
⚠️
Avoid unnecessary travel to any places and follow administration and govt instructions.
⚠️
Praying for the safety of everyone. ❤️

सरपारा में जन्में 9 नाग देवताओं की कहानी सरपारा- यह क्षेत्र जल और नाग देवता का निवास स्थान है। यहां पर जल और नाग देवता क...
19/05/2023

सरपारा में जन्में 9 नाग देवताओं की कहानी
सरपारा- यह क्षेत्र जल और नाग देवता का निवास स्थान है। यहां पर जल और नाग देवता का मंदिर भी स्थित है।इसके अलावा जल नाग देवता का पवित्र और सुंदर सरोवर (सौर) भी है।यह क्षेत्र नौ नागों की पवित्र जन्मभूमि भी है।दंत कथा के अनुसार एक समय की बात है सरपारा गांव के रायपाल्टू परिवार की अविवाहित युवती जल नाग के सरोवर (सौर) के पास पशु चरा रही थी।सरोवर में अनेक प्रकार के पुष्प खिले हुए थे।वहां पर खिले एक लाल रंग के सुंदर फूल को देखकर युवती उस फूल की और मोहित हुई।और उसने वो फूल तोड़ डाला और अपने घर ले गई।कुछ महीनो बाद वो महिला गर्भवती हो गई।युवती का स्थानीय नाम लामदूधी था। गर्भ धारण करने के कुछ समय के बाद उस युवती ने नौ नाग पुत्रों को जन्म दिया।लोक लाज के कारण उस युवती ने उन छोटे छोटे नागों को एक टोकरे (छाबडू) में बंद करके पशुशाला (खूड़) में छिपा कर रख दिया।जब वो युवती गाय का दूध निकालने जाती तब चोरी छिपे वो उन छोटे नागों के बचो को दूध पिलाती।ऐसा वो युवती रोज करने लगी।दूध की मात्रा में कमी होने के कारण उसके परिवार वालो को शक हो गया।परिवार वालों ने सोचा वो कच्चा दूध किसको पिलाती है।एक दिन उस युवती की मां पशुशाला (खूड़) में गई उसी समय परिवार की एक सदस्य गेंहू के कच्चे दाने (मौड़ी) भून रही थी।पशुशाला में टोकरे के भीतर नागों को देखकर युवती की मां आगबबूला हो गई।और उसने वो टोकरी गेहूं भूनने वाले बर्तन के उपर उड़ेल दिया।बर्तन गर्म होने के कारण नागों के छोटे-छोटे बच्चे अलग अलग दिशाओं में भागे।कुछ नागों ने साथ लगती जिला कुल्लू की सीमाओं में प्रवेश किया। उनमें से एक नाग धारा सरगा दूसरा खरगा तीसरा देथवा गए।
एक नाग ने मधुमक्खी का रूप धारण करके मंडी जिला में प्रवेश किया। जिसे आज महुनाग के नाम से जाना जाता है।एक नाग धुंए के रूप में सुंगरी बहाली होते हुए खाबल रोहड़ू गए।बाकी बचे नाग दूसरी दिशा में गए एक नाग जाघोरी गए उन्होंने जघोरी को ही अपना निवास स्थान चुना। सबसे छोटे नाग अधिक आग में जलने के कारण अपने पिता जलनाग के पास ही शरण ले ली।नाग में से सबसे बड़े भाई वर्तमान में बोंडा (सराहन) क्षेत्र के आराध्य देवता है।उनके अनुज भाई अपनी माता लाम्बदुधी को लेकर काओबिल की और चल पड़े।छोटे भाई ने काओबिल को अपना निवास चुना और वहीं रुक गए।वर्तमान में उन्हें काओबिल के स्थानीय नाग देवता के रूप में जाना जाता है। जलनाग देवता के सबसे बड़े पुत्र बोंडा नाग ने अपनी माता को अपने साथ ले जाने की जिद्द की नाग माता का वो सबसे प्रिय पुत्र था।अपने प्रिय पुत्र के आग्रह पर नाग माता उसके साथ सराहन की ओर चल पड़ी। काओबिल से नीचे उतरने के बाद वे सतलुज नदी के निकट आ पहुंचे।उस समय नदी पर कोई पुल नही था।नागमाता ने जल के स्तर को देख कर नदी पार जाने से इंकार कर दिया।अपनी माता को अपने बोंडा ले जाने की इच्छा पूरी करने के लिए नदी के आर पार एक विशालकाय नाग का रूप धारण नदी के आर पार अपना शरीर फैलाकर पुल का निर्माण किया।लेकिन नाग माता ने अपने प्रिय पुत्र की पीठ पर जाकर नदी पार करने से मना कर दिया।इस बात का साक्ष्य आज भी वह मौजूद है जहां नाग साहब ने पुल का निर्माण किया था आज वहां सीधा मैदान है। माता ने अपने बड़े बेटे से विनम्र निवेदन किया और काओबिल में रहने की इच्छा जताई।बड़े बेटे ने अपनी माता की आज्ञा का पालन किया और माता से विदा लेकर स्वयं सराहन क्षेत्र की ओर चल पड़े। नाग माता लाम्बदुधी जो उस वक्त मानव के रूप में थी ने काओबिल की ओर चढ़ाई चढ़ना शुरू की चलते चलते नाग माता थक गए और कुकीधार नामक जगह पर नीचे बैठ कर पसीना पोछने लगी।पसीने की कुछ बूंद जमीन पर गिरी।जिस स्थान पर पसीने की बूंद गिरी आज भी वहां पर जल का स्त्रोत मौजूद है।उसके पश्चात वो अपने प्रिय पुत्र को वहां से देखने लगी।लेकिन उसकी नजरे पुत्र को ढूंढ़ नही पाई।कुछ कदम दूर चलने के बाद नाग माता के स्तनों से दुग्ध की धारा बहने लगी।अब नाग माता को अपने पुत्र की याद सताने लगी।अपने पुत्र की याद में नाग माता ने कुकीधार के समीप अपना दूध निकल कर रखा।आज उस स्थान पर एक छोटा सा कुआं है जो इस बात का जीवंत प्रमाण है पूरे इलाके में सुखा होने के बावजूद भी वो नही सूखता।90 वर्ष के बुजुर्ग श्री भगत राम वर्मा के अनुसार जब वो युवावस्था में भेड़ बकरियां चुगाया करते थे।जब उनकी भेड़ बकरियां उस कुएं से पानी पीती थी तो उनके मुंह से पानी की जगह दूध की झाग निकलती थी।उसके पश्चात नाग माता ने चलते चलते कुकीधार में विश्राम किया।विश्राम करते करते उनकी नजर एक खुबसुरत झरने पर पड़ी।झरने की खूबसूरती को देखकर नाग माता की सारी थकान दूर हो गई।और नागमाता ने ये निश्चय किया की वे इस झरने के नीचे निवास करेगी।नाग माता ने अपना मानव का रूप छोड़ कर नागिन का रूप धारण किया।वर्तमान में इस झरने को काओछौ (झरना) के नाम से जाना जाता है।ऐसी मान्यता है जब सूर्य की किरणे इस झरने पर पड़ती है तो ये सात रंगों में बदल जाता है। ऐसा भी माना जाता है नाग माता उस समय झरने के नीचे स्नान करती थी।झरना विशाल चट्टान को चीरता हुआ बहता है।यह स्थान अत्यंत पवित्र एवम् दर्शनीय है।आज भी जब कभी किसी नाग देवता का आगमन काओबिल में होता है तो नाग अपनी माता की विधिवत पूजा अर्चना करके अपनी शीश नवाते है।और देवता के बजंत्री पारंपरिक तरीके से नाग माता का स्वागत करते है।
नौ नाग 👉
1, *बोंडा नाग* सराहन
2,*माहू नाग* मंडी
3,*राई नाग* देथवा
4,*जाहरू नाग* खरगा
5,*झाकड़ू नाग* धारा सरघा
6,*सकिर्णी नाग* जघोरी
7,*काओबिल नाग* लबाना सदाना
8,*बद्री विशाल सुनी नाग* खाबल छुआरा
9,*भंगरालू नाग* सरपारा
🙏जय हो नाग माता लाम्बदुधी की🙏
जय हो नौ नागों की🙏🙏
*नोट-उपरोक्त लिखित इतिहास लोक कथाओं एवं किस्से कहानियां पर आधारित है। इससे हम किसी भी समुदाय या धर्म को ठेस नहीं पहुंचाना चाहते हैं, इसके पश्चात अगर कोई भी त्रुटि हुई हो तो हम क्षमा प्रार्थी हैं।*
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