28/08/2025
खेती वाले डॉक्टर बनाम इंसान वाले डॉक्टर..
अब देश में बहस होना ही चाहिए..
खेती की दवाई.. सही काम न करें तो.. दवा कंपनी का लाइसेंस खारिज़...
MBBS डाक्टर के दिशा निर्देश में दवाई निगलने के बाद भी,जब इंसान का कष्ट दूर नहीं होता, तब क्या..??
डाक्टर साहब के डाक्टरी का लाइसेंस खारिज होना चाहिए?
डाक्टर साहब द्वारा लिखी गई दवा कंपनी का लाइसेंस रद्द नहीं होना चाहिए..??
हम जानते हैं.. खेती की दवाई बेचने वाला भी.. जादा कमाने के चक्कर में.. कुछ दवा.. लग्गू लगा देता है!
लेकिन क्या Pharma Company के Medical Representative से दिन भर दुआ सलाम और भेंट से घिरे रहने वाले डॉक्टर साहब.. अपने पेशेंट का जादा लाभ करवाने के फेर में.. एक - आध.. लग्गू दवा नहीं.. ठोंकते..??
देश के माननीय स्वास्थ्य मंत्री.. कब जागेंगे..?
देश के माननीय कृषि मंत्री.. से कुछ सीखना चाहिए भारत के स्वास्थ्य मंत्री जी को..की नहीं??
खेती की दवाई का प्रयोग चुंकि.. दवाई बनाने वाली कंपनी के नियंत्रण से बाहर होता है! दवाई कितनी कारगर होगी..यह इस्तेमाल के तौर तरीकों, पानी के pH और उचित डोज , तापमान आदि अनेक कारकों पर निर्भर करता है!
एक ही दवा एक ही गांव के एक ही किसान के एक खेत में जादा रिजल्ट देती है और दूसरे खेत में.. कम!
खरपतवार और घास से निजात दिलाने वाले हर्बिसाईड, वीडिसाईड.. का रिजल्ट.. खरपतवार/ घास के स्टेज़ पर भी निर्भर करता है!
कीटनाशक और हर्बिसाईड का रिजल्ट.. उसके छिड़काव में इस्तेमाल पानी के.. क्वालिटी से भी प्रभावित होता है!
इसलिए.. खेती - बाड़ी..की सेवा में लगी कीटनाशक कंपनियां..
सिर्फ अपने प्रोडक्ट के क्वालिटी का दावा करती हैं, इसके परिणाम का नहीं, क्योंकि.. इनका इस्तेमाल निर्माता कंपनी के नियंत्रण क्षेत्र से बाहर होता है!
जबकि.. इंसान के रोग का इलाज.. हेतु दवाई का निर्माण करने वाली फार्मा कंपनी की दवाई का इस्तेमाल..
ज्यादातर.. प्रशिक्षित MBBS. डाक्टर के मार्ग दर्शन में किया जाता है! फिर भी इंसान.. एक डॉक्टर से दूसरे डाक्टर, एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल.. तक.. स्वस्थ जीवन की आस और तलाश में.. संघर्ष करता.. देखा जाता है!
धन्यवाद,,