28/10/2024
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया है कि एक बार किसी करदाता का जीएसटी पंजीकरण रद्द हो जाने के बाद, केवल जीएसटी पोर्टल पर नोटिस अपलोड करना पर्याप्त नहीं है; इसके बजाय, नोटिस को वैकल्पिक माध्यमों से भी सेवा करना आवश्यक है।
यह आदेश मामला: M/S Ahs Steels बनाम राज्य कर आयुक्त और अन्य में आया, जिसमें न्यायालय ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन होने की बात कही।
केस का विवरण:
पृष्ठभूमि: M/S Ahs Steels का जीएसटी पंजीकरण 18 मार्च 2019 को रद्द कर दिया गया था, जिसके बाद से कोई व्यावसायिक गतिविधियाँ नहीं की गईं। इसके बाद, यूपी जीएसटी अधिनियम 2017 की धारा 73 के तहत बिना किसी पूर्व नोटिस सेवा के एक आदेश पारित किया गया।
मुद्दा: पंजीकरण रद्द होने के बाद, कथित कर देनदारियों के संबंध में एक शो-कॉज नोटिस जीएसटी पोर्टल पर अपलोड किया गया, परंतु यह सूचना सीधे रूप से व्यावसायिक मालिक को नहीं दी गई।
न्यायालय का निर्णय: न्यायालय ने माना कि पंजीकरण रद्द हो जाने के बाद करदाता से जीएसटी पोर्टल पर नोटिस देखने की अपेक्षा नहीं की जा सकती। इसलिए, न्यायालय ने आदेश दिया कि नोटिस को भौतिक माध्यम या ईमेल द्वारा सेवा किया जाना चाहिए ताकि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन हो सके।
इस निर्णय में,
उच्च न्यायालय ने पहले के निर्णय M/S Katyal Industries बनाम राज्य उत्तर प्रदेश का संदर्भ दिया, जहाँ इसी प्रकार का मुद्दा उठा था और वहाँ भी यही निर्णय दिया गया था कि नोटिस की सीधी सेवा होनी चाहिए।
इस प्रकार, न्यायालय ने वर्तमान मामले में कर अधिकारियों को नए सिरे से नोटिस जारी करने और कानून के अनुसार कार्यवाही करने के निर्देश दिए।
केस का सारांश:
केस शीर्षक: M/S Ahs Steels बनाम राज्य कर आयुक्त और अन्य
केस संख्या: WRIT TAX No. – 1676 of 2024
तारीख: 15.10.2024
याचिकाकर्ता के वकील: प्रवीण कुमार, वैभव सिंह
प्रत्युत्तर के वकील: सी.एस.सी.
इस निर्णय से यह स्पष्ट हो गया है कि कर अधिकारियों को उचित सेवा के बिना किसी आदेश को पारित करने का अधिकार नहीं है, और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नोटिस उचित तरीके से सेवा किया गया हो।