Mintu Kumar & Associates, Chartered Accountants

Mintu Kumar & Associates, Chartered Accountants Mintu Kumar & Associates is registered as Chartered Accountant firm with Eastern Indian Regional Council of ICAI

30/06/2024

भारत मात्र 7 रनों से जीता जबकि कॉमेंट्री में सिंधु ने 30 रनों से जितने की बात कही थी। यह भारत की नैतिक हार है। अतः विजेता अफ्रीका को घोषित करना चाहिये
- गुलामों की चाची कुप्रिय कुनेत -

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16/06/2024

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29/03/2024

जरा ध्यान से पढ़ें जीवन की यही सच्चाई है 🙏🙏🙏

*मत परेशान हो, क्योंकि आमतौर पर...*

*1. चालीस साल की अवस्था में* "उच्च शिक्षित" और "अल्प शिक्षित" एक जैसे ही होते हैं। (क्योंकि अब कहीं इंटरव्यू नहीं देना, डिग्री नहीं दिखानी).

*2. पचास साल की अवस्था में* "रूप" और "कुरूप" एक जैसे ही होते हैं। (आप कितने ही सुन्दर क्यों न हों झुर्रियां, आँखों के नीचे के डार्क सर्कल छुपाये नहीं छुपते).

*3. साठ साल की अवस्था में* "उच्च पद" और "निम्न पद" एक जैसे ही होते हैं। (चपरासी भी अधिकारी के सेवा निवृत्त होने के बाद उनकी तरफ़ देखने से कतराता है).

*4. सत्तर साल की अवस्था में* "बड़ा घर" और "छोटा घर" एक जैसे ही होते हैं। (बीमारियाँ और खालीपन आपको एक जगह बैठे रहने पर मजबूर कर देता है, और आप छोटी जगह में भी गुज़ारा कर सकते हैं).

*5. अस्सी साल की अवस्था में* आपके पास धन का "कम होना" या "ज्यादा होना" एक जैसे ही होते हैं। (अगर आप खर्च करना भी चाहें, तो आपको नहीं पता कि कहाँ खर्च करना है).

*6. नब्बे साल की अवस्था में* "सोना" और "जागना" एक जैसे ही होते हैं। (जागने के बावजूद भी आपको नहीं पता कि क्या करना है).

जीवन को सामान्य रुप में ही लें क्योंकि जीवन में रहस्य नहीं हैं जिन्हें आप सुलझाते फिरें.

*आगे चल कर एक दिन सब की यही स्थिति होनी है, यही जीवन की सच्चाई है...*

चैन से जीने के लिए चार रोटी और दो कपड़े काफ़ी हैं... पर ,बेचैनी से जीने के लिए चार गाड़ी, दो बंगले और तीन प्लॉट भी कम हैं !!

*जीवन की सच्चाई!*

04/12/2023

टिंग-टॉन्ग.... दरवाजे पर घन्टी बजती है।

बहु देखना कौन है? सोफे पर लेटकर टीवी देख रहे ससुर ने कहा।

माया किचन से निकलकर दरवाज़ा खोलती है।

हां जी, आप कौन?

'महिलाओं की स्थिति पर एक सर्वे चल रहा है। उसी की जानकारी के लिए आई हूँ।' दरवाज़े पर खड़ी महिला ने जवाब दिया।

कौन है बहु? पूछते हुए ससुरजी बाहर आ जाते हैं।
महिला- 'बाऊजी सर्वे करने आई हूँ।'

घनश्याम जी- 'हां पूछिए'

महिला- 'आपकी बहु सर्विस करती हैं या हाउस वाइफ हैं?'

माया हाउस वाइफ बोलने ही वाली होती है कि उससे पहले घनश्याम जी बोल पड़ते हैं।

घनश्याम जी- 'सर्विस करती है'

'किस पद पर हैं और किस कंपनी में काम कर रही हैं?' महिला ने पूछा।

घनश्याम जी कहते हैं

वो एक नर्स है, जो मेरा और मेरी पत्नी का बखूबी ध्यान रखती है। हमारे उठने से लेकर रात के सोने तक का हिसाब बहु के पास होता है। ये जो मैं आराम से लेटकर टीवी देख रहा था ना वो माया की बदौलत ही है।

माया बेबीसीटर भी है। बच्चों को नहलाने, खिलाने और स्कूल भेजने का काम भी वही देखती है। रात को रो रहे बच्चे को नींद माँ की थपकी से ही आती है।

मेरी बहु ट्यूटर भी है। बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी भी इसी के कंधे पर है।

घर का पूरा मैनेजमेंट इसी के हाथों में है। रिश्तेदारी निभाने में इसे महारत हासिल है।

मेरा बेटा एयरकंडीशन्ड ऑफिस में चैन से अपने काम कर पाता है तो इसी की बदौलत। इतना ही नहीं ये मेरे बेटे की एडवाइजर भी है।

ये हमारे घर की इंजन है। जिसके बग़ैर हमारा घर तो क्या इस देश की रफ़्तार ही थम जाएगी।

बाऊजी मेरे फॉर्म में इनमें से एक भी कॉलम नहीं है, जो आपकी बहु को वर्किंग कह सके।

घनश्याम जी मुस्कुराते हुए कहते हैं, फिर तो आपका ये सर्वे ही अधूरा है।

महिला- 'लेकिन बाऊजी इससे इनकम तो नहीं होती है ना।

घनश्याम जी कहते हैं, अब आपको क्या समझाएं।

इस देश की कोई भी कंपनी ऐसी बहुओं को वो सम्मान, वो सैलरी नहीं दे पाएंगी।

बड़ी शान से वो कहते हैं, मेरी हार्ड वर्किंग बहु की इनकम हमारे घर की मुस्कुराहट है !

27/11/2023

*जुल्फिकार अली भुट्टो ने इंदिरा गांधी को कैसे मूर्ख बनाया था*

जो लोग 1971 की लड़ाई में इंदिरा गांधी की पीठ थपथपाते हैं उन लोगों को बेनजीर भुट्टो के पति आसिफ अली जरदारी का पाकिस्तान के संसद में दिया गया यह बयान जरूर पड़ना चाहिए।

जब पाकिस्तान के 90000 से ज्यादा सैनिक भारत की कैद में थे उनके तीन हजार से ज्यादा सैनिक अधिकारी हमारे हिरासत में थे... पाकिस्तान की सेना आत्मसमर्पण कर चुकी थी। भारतीय सेना सिंध के जिले थारपारकर को भारत में मिला शामिल कर चुकी थी और उसे गुजरात का एक नया जिला घोषित कर दिया गया था और मुजफ्फराबाद पार्लियामेंट पर तिरंगा झंडा फहरा दिया गया था।

जुल्फिकार अली भुट्टो जब इंदिरा गांधी से शिमला समझौता करने आए तब वह अपनी बेटी बेनजीर भुट्टो को भी साथ में लाए थे। जुल्फिकार अली भुट्टो अपनी बेटी को राजनीति सिखा रहे थे।

इंदिरा गांधी ने जुल्फिकार अली भुट्टो के सामने शर्त रखी, यदि आपको अपने 93000 सैनिक वापस चाहिए तब आप कश्मीर हमें दे दीजिए। जुल्फिकार अली भुट्टो इंदिरा गांधी से कहा कि हम आपको कश्मीर नहीं देंगे। मैं कोई दस्तखत नहीं करूंगा आप यह 93000 सैनिकों को अपने पास ही रखो।लेख के लिए 8527524513 को सेवकर मिस्डकॉल करें!

इंदिरा गांधी सपने में भी नहीं सोची थी कि जुल्फिकार अली भुट्टो उनसे भी बड़ा खिलाड़ी है वह जानता है की सीमाओं पर हारी गई युद्ध को टेबल पर कैसे जीता जाता है। इंदिरा गांधी की हालत ऐसी हो गई थी जैसे कोई रोजा रखने जाए और उसके गले नमाज पड़ जाए।

पुपुल जयकर और कुलदीप नैयर दोनों ने अपनी किताब में लिखा है इंदिरा गांधी उस मौके पर चूक गई और उनके और उनके सलाहकारों के पास कोई ऐसी कूटनीतिक ज्ञान नहीं था कि ऐसे में स्थिति को कैसे संभाला जाए। जिनेवा समझौते के तहत यदि कोई देश किसी युद्ध बंदी को पकड़ता है तब वह उसके डिग्निटी का पूरा ख्याल रखना होता है।

जुल्फिकार अली भुट्टो शाम को होटल में अपनी बेटी बेनजीर भुट्टो से कहा इस युद्ध में भारत की कमर टूट चुकी है। हमने पूरी बहादुरी से लड़ा भले ही हमने भारत की अर्थव्यवस्था को बहुत करारी चोट दिया है। भारत पहले ही बांग्लादेशी शरणार्थियों का बोझ झेल चुका है। अब भारत 93000 पाकिस्तानी सैनिकों को कैसे पालेगा और अगर भारत 93000 पाकिस्तानी सैनिकों को अपने पास बसाना चाहता है तो बसाएं। और उन कायर सैनिकों को हम वापस लेकर भी क्या करेंगे मैंने इंदिरा गांधी की हालत सांप के गले में पड़ी छछूंदर जैसी कर दी है।

और अंत में इंदिरा गांधी की हालत ऐसी हो गई जैसे कोई जूते भी खाए और प्याज भी खाए। इंदिरा गांधी ने कश्मीर भी पाकिस्तान को दे दिया 93000 सैनिक भी वापस कर दिए और अपने 56 सैनिकों को पाकिस्तान की जेल मरने को छोड़ दिया। और 8 महीने के बाद नोबेल पुरस्कार की इच्छा में भारत के गुजरात राज्य में शामिल जिला थारपारकर को ही पाकिस्तान को वापस कर दिया जबकि थारपारकर कि उस वक्त 98% आबादी हिंदू थी।

शिमला समझौते के बाद उस वक्त के सेना प्रमुख ने रिटायरमेंट के बाद जो किताब लिखी थी उसमें कहा था इस युद्ध को हमने लड़ाई के मैदान में तो जीत लिया लेकिन टेबल पर राजनेताओं ने भारत को हरा दिया।

ओर वो राजनेता इंदिरा गांधी थी।

19/11/2023

हे भगवान भारत को इस बार वर्ल्ड कप जीता देना। चाहें तो

इसके बदले कांग्रेस को राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में हरा देना 😔

19/11/2023

*" उरुग्वे "* एक ऐसा देश है , जिसमे औसतन हर एक आदमी के पास 4 गायें हैं ... और
पूरे विश्व में वो खेती के मामले में नम्बर वन की पोजीशन में है ...
सिर्फ 33 लाख लोगों का देश है और 1 करोड़ 20 लाख 🐄 गायें है ...
हर एक 🐄 गाय के कान पर इलेक्ट्रॉनिक 📼 चिप लगा रखी है ...
जिससे कौन सी 🐄 गाय कहाँ पर है , वो देखते - रहते हैं ...
एक किसान मशीन के अन्दर बैठा , फसल कटाई कर रहा है , तो दूसरा उसे स्क्रीन पर जोड़ता है , कि फसल का डाटा क्या है ... ???
इकठ्ठा किये हुये डाटा के जरिए , किसान प्रति वर्ग मीटर की पैदावार का स्वयं विश्लेषण करता हैं ...
2005 में 33 लाख लोगों का देश , 90 लाख लोगों के लिए अनाज पैदा करता था ... और ...
आज की तारीख में 2 करोड़ 80 लाख लोगों के लिये अनाज पैदा करता है ...
*" उरुग्वे "* के सफल प्रदर्शन के पीछे देश , किसानों और पशुपालकों का दशकों का अध्ययन शामिल है ...
पूरी खेती को देखने के लिए 500 कृषि इंजीनियर लगाए गए हैं और ये लोग ड्रोन और सैटेलाइट से किसानों पर नजर रखते हैं , कि खेती का वही तरीका अपनाएँ जो निर्धारित है ...
यानि *" दूध , दही , घी , मक्खन "* के साथ आबादी से कई गुना ज्यादा अनाज उत्पादन ...
*" सब अनाज , दूध , दही , घी , मक्खन , आराम से निर्यात होते हैं और हर किसान लाखों में कमाता है ... "*
एक आदमी की कम से कम आय 1,25,000/= महीने की है , यानि 1,90,000 डॉलर सालाना ...
*" इस देश का राष्ट्रीय चिन्ह सूर्य 🌞 व राष्ट्रीय प्रगति चिन्ह गाय 🐄 व घोड़ा 🐎 हैं ... "*
*" उरूग्वे में गाय 🐄 की हत्या पर तत्काल फाँसी का कानून है ... "*
🐄🐎🌞 🐄🐎🌞 🐄🐎🌞
*" धन्यवाद है , इस गौ - प्रेमी देश को ... "*
मुख्य बात यह है , *" कि ये सभी गो - धन भारतीय हैं ... "*
जिसे वहाँ *" इण्डियन काउ "* के तौर पर जानते हैं ...
*" दु:ख इस बात का है , कि भारत में गो - हत्या होती है और वहाँ उरुग्वे में गो - हत्या पर मृत्युदण्ड का प्रावधान है ... "*
*" क्या हम इस कृषक राष्ट्र उरुग्वे से कुछ सीख सकते हैं ... ??? "*

17/11/2023

*सहारा श्री की अंतिम क्रिया में नहीं शामिल हुए उनके दोनों लड़के* । *पत्नी भी नहीं आईं ।' यह सिर्फ खबर भर नहीं है । यह आईना है जीवन का जिसमें हमें और आपको अपनी छवि गौर से देखनी चाहिए* ।

*सुब्रत रॉय अर्थात् सहारा श्री आज पंचतत्व में विलीन हो गया । उनके पोते ने उन्हें मुखाग्नि दी । उनके अंतिम क्रिया के वक्त उनके शुभचिंतक नजर आये* ।

*अगर कोई उनकी अंतिम यात्रा के वक्त नहीं दिखे तो वे थीं उनकी पत्नी और उनके दोनों बेटे । उनकी मौत के वक्त भी उनके परिवार का कोई सदस्य उनके पास नहीं था...। पत्नी और बेटे तक नहीं* ।

*यह वही सहारा श्री थे जिनके कारोबार की धाक कभी पूरी दुनिया भर में फैली थी । चिट फण्ड, सेविंगस फाइनेंस, मीडिया , मनोरंजन, एयरलाइन, न्यूज़, होटल, खेल,‌ भारतीय क्रिकेट टीम का 11 साल तक स्पान्सर, वगैरह वगैरह*...
*ये वही सहारा श्री थे जिनकी महफिलों में कभी राजनेता से लेकर अभिनेता और बड़ी बड़ी हस्तियां दुम हिलाते नजर आते थे*...
*ये वही सहारा श्री थे जिन्होंने अपने बेटे सुशान्तो-सीमांतो की शादी में 500 करोड़ से भी अधिक खर्च किए थे* ।

*ऐसा भी नहीं था कि सहारा श्री ने अचानक दम तोड़ा ! उन्हें कैंसर था और उनके परिवार के हरेक सदस्य को उनकी मौत का महीना पता होगा लेकिन तब भी अंतिम वक्त में उनके साथ, उनके पास परिवार का कोई सदस्य नहीं था*...! *बेटों ने उनके शव को कांधा तक नहीं दिया*...!
*तो, यही सच्चाई है जीवन की । जिनके लिए आप जीवन भर झूठ-सच करके कंकड़-पत्थर जमा करते हैं*... *जिनके लिए आप जीवन भर हाय-हाय करते रहते हैं... जिनकी खुशी के लिए आप दूसरों की खुशी छीनते रहते हैं*... *जिनका घर बसाने के लिए आप हजारों घर उजाड़ते हैं*... *जिनकी बगिया सजाने और चहकाने के लिए आप प्रकृति तक की ऐसी तैसी करने में बाज नहीं आते*...
*वे पुत्र और वह परिवार आपके लिए, अंतिम दिनों में साथ तक नहीं रह पाते* !
*कभी ठहरकर सोचिएगा कि आप कुकर्म तक करके जो पूंजी जमा करते हैं, उन्हें भोगने वाले आपके किस हद तक 'अपने' हैं*...?
*अंगुलीमाल से बुद्ध ने यही तो कहा था कि "मैं तो कब का ही रूक गया, तुम कब रूकोगे*
*आज मैं आप सभी से पूछना चाहता हूं* - *हम सब कब रूकेंगे*...?"

21/10/2023

गांव की स्कूल में नए मास्टरजी आये थे ! उन्होंने सोचा किसी अच्छे लड़के को मोनिटर बना दूं !

अब उन्होंने एक के बाद एक लड़कों से सवाल पूछना शुरू किया !

"स्कूल से छूटने के बाद घर पर जाके क्या करते हो ?"

एक लड़के ने कहा, "मैं नारायण भंडारी के घर से मेरे पप्पा के लिए भांग की गोलियां लाता हूँ !"

दूसरेने कहा, "मैं नारायण भंडारी के घर से मेरे बापू के लिए देसी दारू का खंभा लाता हूँ !"

तीसरे ने कहा, "मैं नारायण भंडारी के घर से मेरे बाबा के लिए गांजे की पूड़ियाँ लाता हूँ !"

चौथे लड़के ने कहा,

"मैं घर जाकर हाथ पैर धोकर थोड़ा नास्ता करता हूं, फिर भगवान को दिया-बत्ती करके स्तोत्र वगैरा का पाठ करता हूँ ! फिर मैं अपने माँ बाप को काम में मदद करता हूं और स्कूल का होम वर्क करता हूं !"

मास्टरजी तो एकदम गदगद हो गए ! बोले,

"बेटा, इस कक्षा में तो मोनिटर बनने लायक तुम एक ही हो, आज से तुम इस कक्षा के मोनिटर हो !"

"नाम क्या है तुम्हारा ?"

लड़केने कहा,

' नारायण भंडारी '.....

पिछली बार मिशन असफल हुआ तो वो रोने लगे थे। जैसे सारी असफलता का बोझ उनके कंधे पर आ गिरा हो। एक सच्चा निदेशक ऐसा ही तो होत...
23/08/2023

पिछली बार मिशन असफल हुआ तो वो रोने लगे थे। जैसे सारी असफलता का बोझ उनके कंधे पर आ गिरा हो। एक सच्चा निदेशक ऐसा ही तो होता है।

इस बार टीवी स्क्रीन पर मेरी निगाहें बस उन्हीं को खोज रहीं थीं.. सफल लैंडिंग के बाद के शिवन जी को मुस्कराते देख एक अलग ही अनुभूति हुई।

असफलता के आँसू एक दिन सफलता की सच्ची मुस्कान बन सकते हैं। बस इसरो जैसा लगन औऱ समर्पण चाहिए।

बधाई हम सबको... 🇮🇳

12/07/2022

मिलार्ड चिंतित हैं कि लोग हमें गालियां दे रहे हैं

आतंकवादी की फांसी पर रोक के लिए आधीरात को सुनवाई, प्रशांत भूषण को 1₹ और विजय माल्या को 2000₹ जुर्माना और नूपुर शर्मा को "सर तन से जुदा" सही ठहराना?
ऐसे फैसले जनता को दुखी करते हैं और वो मजबूरन गालियां देते हैं

सुधर जाओ मिलार्ड

11/07/2022

We have heard the story of *Venezuela* and now watching *Srilanka*. Let us learn the story of *Switzerland* but in a different context.

This country covered with snowy valleys is an amazing masterpiece of beauty. Whether it is greenery or snow, wherever the eyes go, they remain wide open in wonder.

Switzerland is the most affluent country in the world. The wages and salary of workers and employees is the highest in the world (of course no one is left while coming to tax payment). Here is an interesting story of this country which is rich in every way.

About 50 years ago today a private bank was established in Switzerland named *Swissbank*. Rules of this bank were different from other banks in the world. This bank used to charge its customers heavily in exchange for safe keeping their money, its maintenance and privacy.

The bank guaranteed absolute privacy. Never asked customer where did the money come from ? No question no form fill up, no guaranteer, no obligation. This bank's reputation had spread worldwide over the year. Swiss Bank became the first choice of thieves, dishonest leaders, mafia, smugglers and dishonest businessmen.

The bank had only one rule. Just like a recharge card, a number is allotted to the account holder, and a password is set.

Bank knew only that person who had that number. No other detail was asked about the customer or his antecedents.
But there was a rule of the bank that if there was no transaction for seven years or the account was not used for seven years, the bank will seize the account and deposit the money with the authorities.

Money accumulated in the Swissbank where no transaction had occured for seven years stared pilling up.

Because bank was not in a position to know how many mafia are killed every day in the world. How many Leaders are caught and prosecuted. How many smugglers are caught or killed, got life imprisonment. In such a situation, huge number of accounts were seized in the bank.

All the unaccounted black money they got was around 50% of the whole world's black money. While starting the bank, it had never imagined that such huge amount of money will be seized by becoming inoperative.

The bank management was not able to decipher what to do with this enormous wealth ? So, the bank made an announcement and sought opinion from all the citizens of Switzerland, as what to do with this amount.

And the bank openly declared that If the amont is distributed among citizens, each citizen will get more than a million Swiss Franc.

The survey continued for 15 days. 99.2% of Swiss people had opined that the amount should be spent in enhancing the beauty of the country and towards tourism development and offering comforts to foreign tourists. Only 0.8% people opted for tranfer of money to personal account.

It was a very simple decision for patriotic Switzerland public. They rejected the idea of money to be paid to them personally. Not only did they refuse free money, but on 25 January 2000, the people of Switzerland gathered outside the government offices with banners demanding that 0.8% of the people who wanted free money, and make their names public.

Because, the freebie mindset they considered a stigma on society and pride of their country.

After a lot of assurances, the government was able to convince people to punish those who wanted free monies, only then did the public calm down.

Just imazine what Indians would have opted for in this survey !!!
Because *Mera Bharat Mahan*

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