24/06/2020
सामने आ गया आयुष मंत्रालय का झूठ, उन्होंने स्वयं दिया था बाबा रामदेव को कोरोना की दवा बनाने का अप्रूवल, बाबा रामदेव ने पेश किये डॉक्युमेंट, अब बाबा रामदेव की बनाई दवा का मजाक वही लोग उड़ा रहे हैं जो पेप्सी पी पीकर सेहत बना रहे हैं और फेयर एंड लवली लगा लगा कर गोरे हो चुके हैं।
कोरोना के समय में हर रोज टीवी पर चीख चीख कर डेटॉल के विज्ञापन में दिखाया जाता है कि डेटॉल 99.99% कीटाणु मार देता है कभी इसकी जांच आयुष मंत्रालय ने क्यो नही की ?दरअसल पतंजलि के दावे ने फार्मा की पोल खोल दी, ये लोग दोनों हाथों से लोगों को लूट रहे थे, अब इस बाजारी लूट को इस खबर ने कारपोरेट फार्मास्युटिकल लॉबी को तिलमिला दिया है।
लेखक तारिक फतह ने भी ट्वीट किया कि आइए थोड़ा इस बड़े खेल को समझते है। आयुष मंत्रालय कह रहा है कि उन्होंने रिसर्च पेपर नहीं देखें तो वे इस पर टिप्पणी नहीं कर सकता। इस बयान के बाद तो मानो कुछ लोग को अमृत मिल गया। एलोपैथी और बहुत सारे रामदेव विरोधी एक अलग ही प्रचार में लग गए कि दवा कारगर नहीं है, मीडिया प्रचार में लग गई। बेहद अलग हेडलाइन के साथ छेड़खानी की जाने लगी कि रामदेव की दवाई पर विवाद, दवाई पर रोक, आयुष मंत्रालय ने पल्ला झाड़ा, आयुष मंत्रालय ने रामदेव की दवाई को नकारा, आयुष मंत्रालय ने दवाई पर उठाए सवाल..कुछ तो ये भी कहने लगे की एलोपैथी ने रामदेव के दावे को नकारा।
ऐसी हेडलाइन और पोस्ट शेयर होने लगे जैसे कुछ फर्जी हो, जैसे की पहले ही कहा था कि मीम, वीडियो और पोस्ट के द्वारा पतंजलि को नीचा दिखाने का खेल शुरू हो गया।लेकिन आप को जानकर हैरानी होगी कि बात सिर्फ़ इतनी थी कि आयुष मंत्रालय को इनके रिसर्च पेपर की जानकारी नहीं थी.. क्यूंकि ये रिसर्च पतंजलि ने आयुष मंत्रालय के साथ नहीं करी थी। लेकिन कुछ लग गए बात का बतंगड़ बनाने ...
ख़ैर ज़रा अब ये देखते है कि अगर पतंजलि की ये दवा कारगर साबित हो गई तो किसको कितना झटका लगेगा।सबसे पहला झटका Pharmaceutical industry को लगेगा वो भी अरबों का, क्यूंकि उनकी दवाई का मूल्य 3000 के करीब है जिसका कोई प्रूफ नहीं आया है कि ठीक करती है या नहीं अब तक, दूसरा लगेगा, सैनिटाइजर और मस्क बेचने वालों को, तीसरा लगेगा, कोरोना की पीपीएफ किट बेचने वालों को, इसके बाद नंबर आता है टेस्टिंग किट वालों का क्यूंकि लोग symptoms होते है इलाज शुरू कर देंगे।
फिर आती है हॉस्पिटल लॉबी का को भारत के आम नागरिक से 3- 10 लाख आराम से लूट रही है। और अंत में नंबर आता है विदेशी कंपनियों का जो चाहती है भारत में हालात खराब हो और वो खरबों डॉलर की कमाई भारत में वैक्सीन बना कर करें। इससे पतंजलि के FMCG प्रोडक्ट को भी पुश मिलेगा जिससे भारत में विदेशी कंपनी जैसे HUL, COLGATE, P&G और ITC जैसी का व्यापार कम होने की आशंका का क्योंकि पतंजलि अब सब कुछ बना रही है इससे लोगों का भरोसा और बढ़ेगा।
वैसे ये भी कितना अजीब है कि जिस दावे पर परीक्षण और निरीक्षण होने थे... उसके प्रति सरकार और कॉरपोरेट में कोई खुशी नहीं हो रही... अभी दवाई लोगों ने खाई नहीं लेकिन सब बिना बिके ही JUDGE बन गए है। होना ये चाहिए था कि भारत सरकार तो बिना एक पल भी गवाए पतंजलि के इस दवाई के अपनी संतुष्टि के लिए प्रयोग करने चाहिए। लेकिन अब आयुष मंत्रालय क्या जवाब देगा, ये सब डॉक्युमेंट देख कर जो बाबा रामदेव ने जमा करवाए और फिर पतंजलि को अप्रूवल दे
दिया