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22/07/2020

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16/07/2020

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09/03/2020

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30/06/2019

GST रिटर्न भरना कारोबारियों के लिए अक्टूबर से हो जाएगा बेहद आसान, सारी दिक्कतें हो जाएंगी दूर
GST: नई प्रणाली को अमल में लाने की समय सीमा छोटे करदाताओं के लिये 1 जनवरी 2020 तथा पांच करोड़ रुपये से अधिक कर देने वाले बड़े करदाताओं के लिये 1 अक्टूबर 2019 है. नई प्रणाली के तहत रिटर्न भरने का नमूना सोमवार से उपलब्ध हो जाएगा. माल एवं सेवा कर (जीएसटी) रिटर्न दायर करने की नई प्रणाली के तहत व्यापारियों को कई तरह के प्रारूप के बजाय अब महीने में केवल एक बार एकल फॉर्मेट में ही रिटर्न भरना होगा. बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने इसकी जानकारी दी. मोदी जीएसटी क्रियान्वयन के बाद राजस्व में आई कमी पर विचार करने के लिये गठित मंत्रियों के समूह के प्रमुख हैं. उन्होंने नई प्रणाली को जीएसटी-2 बताते हुए कहा कि जीएसटी परिषद ने इस नए फॉर्मेट के तहत रिटर्न भरने को इस साल एक अक्टूबर से शुरू करने का निर्णय लिया है.

उन्होंने कहा कि नई प्रणाली को अमल में लाने की समय सीमा छोटे करदाताओं के लिये 1 जनवरी 2020 तथा पांच करोड़ रुपये से अधिक कर देने वाले बड़े करदाताओं के लिये 1 अक्टूबर 2019 है. उन्होंने कहा कि नई प्रणाली के तहत रिटर्न भरने का नमूना सोमवार से उपलब्ध हो जाएगा. मोदी ने संवाददाताओं से कहा कि नए फॉर्म सहज और सुगम को व्यापारियों के विभिन्न वर्ग के लिये विकसित किया गया है. उन्होंने कहा कि 1 जुलाई को जीएसटी क्रियान्वयन के दो साल पूरे हो जाएगे. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में मुख्य जोर प्रक्रिया को अधिक सरल बनाने, अनुपालन तथा कर चोरी पर रोक लगाने के तरीकों पर रहेगा.

मोदी ने जीएसटी-2 के बारे में बताया कि जब जीएसटी को डिजायन किया गया, रिटर्न के तीन फॉर्मेट थे तथा एक व्यापारी को महीने में 36 रिटर्न भरने होते थे. इसके अलावा अन्य रिटर्न और ऑडिट रिपोर्ट भी होते थे. नई प्रणाली में सारी दिक्कतें दूर हो जाएंगी और महीने में सिर्फ एक बार रिटर्न भरना होगा. उन्होंने कहा, ‘‘बड़े करदाताओं को साल में 12 रिटर्न भरना होगा जबकि छोटे करदाताओं को साल में सिर्फ चार रिटर्न भरने होंगे.’’

शनिवार को यहां हुई बैठक जीएसटी की सूचना प्रौद्योगिकी मुहिमों से संबंधित थी. समिति यह देखना चाहती थी कि नई जीएसटी प्रणाली के क्रियान्वयन का कार्य इन्फोसिस ने किस स्तर पर पहुंचाया है. मोदी ने कहा, ‘‘कंपनियों को एक ही स्रोत से रिफंड मिलेगा तथा पूरी तरह से ऑनलाइन रिफंड का क्रियान्वयन सितंबर 2019 तक कर लिया जाएगा. हमने यही समयसीमा तय की है.’’ कर चोरी रोकने के बारे में उन्होंने कहा कि इसके लिए ई-वे बिल में नए फीचर जोड़े जाएंगे. उन्होंने कहा, ‘‘ई-इनवॉयसिंग के जरिये ई-वे बिल तैयार होगा और स्वत: रिटर्न दायर हो जाएगा. यह कर चोरी को रोकने के लिये महत्वपूर्ण जरिया बनेगा.’’

उन्होंने कहा कि एक अन्य महत्वपूर्ण कदम वाहनों को रेडियो-फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन दिया जाना है. यह तय स्थानों पर सेंसरों के जरिये सूचनाएं जमा करेगा. यह स्वत: अधिकारियों को बता देगा कि ई-वे बिल निकाला गया है नहीं. मोदी ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण इन सेंसरों को परिचालित करेगा. उन्होंने फर्जी ई-वे बिल के बारे में कहा कि कम्पयूटरीकृत जीएसटी प्रणाली ने हाल ही में देश में इपनुट टैक्स क्रेडिट को लेकर बड़े स्तर की जा रही धोखाधड़ी को पकड़ा है. उन्होंने कहा कि ऐसी कंपनियां, जो है ही नहीं, फर्जी बिलों के जरिये इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा कर रही थीं.

मोदी ने कहा कि 2017-18 में जीएसटी का कुल संग्रह 7.40 लाख करोड़ रुपये रहा. हालांकि इस दौरान जीएसटी महज नौ महीने ही अमल में रहा. इसके बाद 2018-19 में जीएसटी संग्रह 11.77 लाख करोड़ रुपये रहा. उन्होंने कहा, ‘‘यह जीएसटी के महज दो साल ही है और मैं आपको कह सकता हूं

28/05/2019

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28/05/2019

नई मोदी सरकार व्यापारियों को देगी बड़ी राहत, एकसाथ मिलेगा पूरा GST रिफंड निर्यातकों के लिए GST प्रक्रिया सरल बनाने और उसमें तेजी लाने के लिए वित्त मंत्रालय कदम उठाने की तैयारी में है. इसके तहत GST रिफंड की मंजूरी और प्रोसेसिंग दोनों काम एक ही व्यवस्था या प्राधिकरण करेगा. एक अधिकारी ने यह बात कही. मौजूदा व्यवस्था में केंद्र और राज्य के कर अधिकारियों दोनों से रिफंड की मंजूरी की जरूरत होती है, लेकिन अगस्त में इस व्यवस्था में बदलाव हो सकता है. इसके बाद दो की जगह एक ही प्राधिकरण GST रिफंड की मंजूरी और उसके प्रसंस्करण का काम करेगा.

राजस्व विभाग इस व्यवस्था में काम कर रहा है. इसके अनुसार, करदाता को दावा मंजूर होने के बाद कर अधिकारी से पूरा रिफंड मिल जाएगा. वर्तमान में, करदाता के रिफंड के दावा करने पर केंद्रीय कर अधिकारी 50 प्रतिशत दावे का भुगतान कर देता है और बाकी बची राशि का भुगतान राज्य के कर अधिकारियों की जांच-पड़ताल के बाद किया जाता है. माल एवं सेवा कर (GST) रिफंड के लिए राज्य कर अधिकारियों के पास दावा करने पर भी इसी व्यवस्था का पालन किया जाता है. जिसकी वजह से पूरा रिफंड मिलने में काफी समय लगता है और निर्यातकों के सामने नकदी का संकट खड़ा हो जाता है. रिफंड प्रक्रिया में होने वाली इस देरी की समस्या को दूर करने के लिए ही एकल व्यवस्था का प्रस्ताव किया गया है.

सिंगल अथॉरिटी सिस्टम करेगी रिफंड की जांच
'एकल प्राधिकरण व्यवस्था' के तहत, करदाता के राज्य या केंद्र के कर अधिकारी के समक्ष रिफंड का दावा करने के बाद अधिकारी दावे की जांच, मूल्याकंन करके पूरे रिफंड (केंद्र और राज्य GST दोनों की हिस्सेदारी) को मंजूरी दे देगा. बाद में आंतरिक खाता समायोजन के माध्यम से दोनों कर प्राधिकरण बाकी बची राशि को समायोजित/ व्यवस्थित कर लेंगे.

28/05/2019

माल एवं सेवा कर (GST) की चोरी रोकने के लिए निर्धारित सीमा से ऊपर का कारोबार करने वाली कारोबारी यूनिट के बीच खरीद-फरोख्त के सभी चालान एक केंद्रीयकृत सरकारी पोर्टल से निकालने का नियम सितंबर से अनिवार्य किया जाएगा. इस तरह के ई-चालान की व्यवस्था लागू करने के संबंध में केंद्र, राज्यों और जीएसटी नेटवर्क के कुल 13 अधिकारियों की एक समिति बनायी जा चुकी है. केंद्रीय राजस्व सचिव इसको लागू करने के काम की निगरानी कर रहे हैं.

ई-चालान की व्यवस्था 3-4 महीने में लागू हो जाएगी
एक अधिकारी ने कहा, 'बी2बी (B2B) सौदों के लिए ई-चालान की व्यवस्था तीन-चार महीने में लागू कर दी जाएगी. यह काम चरणबद्ध तरीके से होगा. सभी चालान सरकारी पोर्टल से निकालने होंगे.' उम्मीद है कि इससे जीएटी की चोरी रोकने में काफी मदद मिलेगी और फर्जी चालान के इस्तेमाल पर अंकुश लगेगा. इससे कारोबार करने वाली इकाइयों के लिए जीएसटी रिटर्न दाखिल करना भी और असान हो जाएगा क्योंकि उनके कारोबार में माल के चालान का आंकड़ा केंद्रीयकृत पोर्टल में पहले से दर्ज होगा.

अधिकारी ने बताया कि इसके लिए सालाना एक न्यूनतम सीमा से अधिक का कारोबार करने वाली इकाइयों को ऐसा सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराया जाएगा जो जीएसटीएन नेटवर्क से जुड़ा होगा. इसकी मदद से से वे दूसरी कारोबारी इकाई को बेचे गए माल या सेवा के संबंध में ई-चालान निकाल सकेंगी. माल की खेप के मूल्य के आधार पर ई-चालान का नियम लागू किया जा सकता है.

अधिकारी ने कहा कि यह व्यवस्था लागू होने पर कारोबारी इकाइयां जरूरत होने पर माल के चालान (बीजक) के साथ साथ ई-वे बिल (इ-मार्ग बिल) भी निकाल सकेंगी. ई-वे बिल 50,000 रुपये से ऊपर की खेप दूर के ठिकानों पर भेजने के लिए जरूरी होती है. यह व्यवस्था सुचारु रूप से लागू होने के बाद सरकार इसे ऐसे क्षेत्रों में कारोबारी इकाई और उपभोक्ता (बी2सी) के बीच के लेन देन पर भी लागू कर सकती है जहां करापवंचन की आशंका ज्यादा दिखती हो. इस समय देश भर में कुल 1.21 करोड़ व्यावसायिक इकाइयां जीएसटी में पंजीकृत हैं. इनमें से 20 लाख कंपोजिट (एकमुश्त कर भुगतान सुविधा) योजना के तहत पंजीकृत इकाइयां हैं.

28/05/2019

अब जीएसटी भुगतान करने पर इलेक्ट्रॉनिक इनवॉयस से रजिस्टर हो जाएगा ट्रांजैक्शन, टैक्स चोरी करने वालों की खैर नहीं.

जल्द ही देश की सभी कंपनियां एक ही जीएसटी पोर्टल से अपने सभी कस्टमर्स को इनवॉयस जारी करेंगी। टैक्स चोरी पर लगाम लगाने के लिए सरकार GST के तहत एक इलेक्ट्रॉनिक इनवॉयस प्रणाली लागू करने पर विचार कर रही है, जिसे शुरुआत में बड़ी कंपनियों तक ही सीमित रखा जाएगा। यह प्रणाली हर ट्रांजैक्शन को ऑटोमैटिकली GST नेटवर्क पर रजिस्टर कर लेगी। इससे कंपनियों के लिए टैक्स चुराना मुमकिन नहीं होगा।
रियल टाइम बेसिस पर रजिस्टर होंगे ट्रांजैक्शन
ई-इनवॉयसिंग के जरिए सरकार रियल-टायम बेसिस पर ट्रांजैक्शन को रजिस्टर कर सकेगी। कंपनियों के लिए अपना टैक्स क्रेडिट हासिल करना आसान होगा। ई-वे बिल सिस्टम के सफलता से लागू होने के बाद सरकार ने टैक्स चोरी रोकने के लिए ई-इनवॉयसिंग की योजना बनाई है।
सब-ग्रुप करेगा ई-इनवॉयसिंग से जुड़े मुद्दों की जांच
जीएसटी काउंसिल द्वारा गठित की गई कमेटी ने एक सब-ग्रुप तैयार किया है, जो ई-इनवॉयसिंग से जुड़े मुद्दों की जांच करेगी। यह सब-ग्रुप ई-इनवॉयस के जेनरेट होने के बिजनेस प्रोसेस, पॉलिसी और कानूनी मसलों की भी पड़ताल करेगा। यह इनवॉयस के फॉर्मेट, इनवॉयस के कैंसिलेशन और मॉडिफिकेशन, बी2बी सप्लाई के लिए तत्कालिक मदद करने जैसे कई मामलों पर भी ध्यान देगा।

पर्याप्त समय दिया जाना है जरूरी
टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक ई-इनवॉयसिंग बिजनेस को आसान बनाएगा, लेकिन इसके लिए पर्याप्त समय दिया जाना जरूरी है। PwC, इनडायरेक्ट टैक्सेज के राष्ट्रीय नेता प्रतीक जैन के मुताबिक, 'तकनीक आने वाले समय में टैक्सेशन में अहम भूमिका निभाएगी। ई-वे बिल के जरिए हमारे पास मैन्युफैक्चरर्स और ट्रेडर्स के लिए रियल-टाइम ऑथेंटिकेशन प्रधाली है, जिसे सर्विस सेक्टर तक बढ़ाने की जरूरत है।'

06/05/2019

मेरे प्यारे दोस्तों आप सभी का तहेदिल से धन्यवाद। जो आप सभी ने मेरे पेज को पसंद किया । मै आप सब का आभारी रहूंगा और आप सभी को हर तरह की खबर देता रहूंगा

01/05/2019

कारोबारी व्यक्तियों द्वारा कर चोरी का पता लगाने के लिए जीएसटीएन के साथ आईटीआर डेटा साझा करने के लिए कर विभाग
जल्द ही, कर विभाग माल और सेवा कर नेटवर्क (जीएसटीएन) अधिकारी के साथ व्यापार व्यक्तियों के आयकर रिटर्न (आईटीआर) डेटा साझा करेगा। इस कदम का उद्देश्य उनके जीएसटी रिटर्न और आईटीआर के बीच आय विसंगतियों या बेमेल घटनाओं को दर्शाना है।

जीएसटी जांच शाखा ने टाटा स्टारबक्स को कॉफी की कीमतों में कमी न करके 4.51 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाने का दोषी पाया है
एंटी-प्रोफिटेयरिंग जनरल (डीजीएपी) की जांच से पता चला है कि टाटा और वैश्विक कॉफी श्रृंखला स्टारबक्स के बराबर संयुक्त उद्यम, टाटा स्टारबक्स ने जीएसटी परिषद द्वारा रेस्तरां से कर दरों में कटौती के बाद अपने एक कॉफी संस्करण के आधार मूल्य में बढ़ोतरी की थी 15 नवंबर, 2017 से प्रभावी 18 प्रतिशत से 5 प्रतिशत।
इससे उत्पाद की खुदरा बिक्री मूल्य पूर्व और जीएसटी दर में कमी बरकरार रही।

जीएसटी की चोरी पर अधिकारियों की सख्ती, इन लोगों पर विभाग की नजर
आने वाले दिनों में छोटे रेस्तरां और बी 2 सी कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। दरअसल, जीएसटी अधिकारियों की इन कारोबारियों पर नजर है। आरोप है कि ये कारोबारी कर वसूली करते हैं लेकिन वे इसे सरकारी खजाने में जमा नहीं कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, जीएसटी अधिकारी ऐसे मामलों से निपटने के लिए एक प्रणाली भी तैयार कर रहे हैं।

01/05/2019

Subject: Information to Taxpayers on new releases on GST Portal, as on 30/04/2019

Dear Taxpayer,

It is our constant endeavor to provide new functionalities on GST Portal and to improve features of the existing functionalities, to make GST compliance on GST portal, easy and smooth for the taxpayers. Here is an update on new functionalities deployed at GST portal recently for your reference.

2 Recently, offline utility for preparing Annual Return Form GSTR 9A and Form GSTR 9C, were deployed at GST Portal. The Excel based offline tools are designed to help taxpayers to prepare GSTR 9A return & GSTR 9C return offline, without the use of internet. The tool also contain the instructions for entering data against each table. Most of the data entry and business validations are inbuilt in the offline utility reducing chances of errors upon upload to GST Portal. This will help taxpayers to save time and effort for preparation of their GST Annual Return GSTR 9A and GSTR 9C. These offline tools can be downloaded from "Downloads" sections in homepage of GST Portal.

3. Offline utility for preparing Annual Return Form GSTR-9A: Form GSTR 9A for financial year 2017-18 is required to be filed by the taxpayers who have opted for composition scheme during any part of the said financial year.

a. GSTN has also provided a facility to download the system computed summary of the Annual Return GSTR 9A and also to download the GSTR 4 Return summary at GST Portal. Using Offline Utility of GSTR-9A, composition taxpayers will be able to open the system-computed Form GSTR-9A, which is based on the returns filed in Form GSTR-4, during the year. The system computed values can be edited in the offline tool.

b.Once the Returns are prepared using the offline tool, the composition taxpayers are required to upload the generated JSON file on GST Portal. They can then preview the details uploaded and can then file return on the GST portal. This Annual Returns is to be filed by the taxpayers by 30th June 2019, without payment of late fee.

c. The FAQs and Manual for GSTR-9 A (offline) is available at link:

i. User Manual:https://tutorial.gst.gov.in/downloads/gstr9aofflineutility.pdf

ii. FAQs:https://tutorial.gst.gov.in/downloads/gstr9aofflineutility.pdf

4. Offline utility for preparing Annual Return Form GSTR 9C: Form GSTR-9C is a reconciliation statement, required to be furnished along with filing of annual return in Form GSTR-9 by the taxpayer under normal category, whose turnover is above Rs.2 Crores during a financial year. The Excel based Form GSTR-9C Offline Tool is designed to help auditors in preparation of taxpayer's GSTR-9C statement.

a. Taxpayer can download the 'System generated summary based on GSTR-9' in PDF file from the portal by clicking on 'Download GSTR-9C tables derived from GSTR-9(PDF)' button. Downloaded PDF can be passed on to the auditor who can use the same to fill Form GSTR-9 related fields in GSTR-9C offline tool.

b. The Chartered Accountant/Cost Accountant shall use the GSTR 9C offline tool to fill up the required details. They can then generate a JSON file after validation. After generating JSON, the Auditor shall affix his digital signature on the same. Thereafter he shall pass on the signed JSON file to taxpayer for uploading it on the GST Portal.

c. The JSON file is to be uploaded on GST portal by the taxpayer, along with a copy of the documents like Balance Sheet, Income and Expenditure Account/ Profit and Loss Account and any other documents.

d. The FAQs and Manual for GSTR-9C (offline) is available at link ->

i. User Manual:https://tutorial.gst.gov.in/downloads/gstr9cofflineutility.pdf

ii. FAQs :https://tutorial.gst.gov.in/downloads/gstr9cofflineutility.pdf

5. Note: Any additional liability reported in the Annual Return can be paid in cash by the taxpayers using Form DRC-03 after selecting the reason as Annual Return/Reconciliation Statement, as applicable.

Recently we have conducted some Webinars on filing of Annual Returns, the recording of these webinars can be accessed at GSTN you tube channel

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