20/10/2024
फ़िल्म इंडस्ट्री ….नाम बड़ा दर्शन छोटे
नाम से क्या लगता है बहुत बड़ा उद्योग, असल में ये नाटकीय उद्योग है, जिसको हम देखते है, आज कल इसने नगनता फूहड़ता का चोला पहना हुआ है, कुछ लोग नाटक करके अपने आप को हीरो समझने लगे है, जो की वाक्य में किसी काल्पनिक कहानी के काल्पनिक किरदार है । असल किरदार वो है जो कहानी अपनी जिंदगी को जीता है, ये सब तो फूहतड़ता का प्रदर्शन कर रहे है , इनका कोई माई बाप है , वो है दा*द, समझने वाले समझ गए , हम कलाकारों की भावनाओ की कद्र करते है, भड़वो की नहीं ….जय हिन्द जय भारत, वंदे मातरम्