सनातन धर्म

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मौलाना बार-बार चिल्लाते हैं सारी जमीन वफ़ बोर्ड की हैं और  हमारे पूर्वजों ने जो 565 रियासतें दान देकर अखण्ड भारत का निर्म...
22/10/2024

मौलाना बार-बार चिल्लाते हैं सारी जमीन वफ़ बोर्ड की हैं और हमारे पूर्वजों ने जो 565 रियासतें दान देकर अखण्ड भारत का निर्माण कराया उसका कोई जिक्र ही नहीं करता 👏.....
#जयहिंद
#जयभारत

आजकल जो ट्रेंड चल रहा है समाज में, जल्द ही सुहागरात भी चौराहे पर मनाना आधुनिकता कहलाएगा। ये पश्चिमी आधुनिकता ले डूबेगी। ...
08/05/2024

आजकल जो ट्रेंड चल रहा है समाज में, जल्द ही सुहागरात भी चौराहे पर मनाना आधुनिकता कहलाएगा। ये पश्चिमी आधुनिकता ले डूबेगी। क्योंकि फटी जीन्स में आपको वही लोग नही देखना चाहते जो आपके शुभचिंतक है।

एक समय था जब कपड़े उतारने पर महाभारत हुई थी और आज किसी ने कपड़े पहनने के लिए बोल दिया तो महाभारत हो रही है।

आओ जड़ो की ओर लौट चले। क्योंकि जड़ो से कटने के बाद वृक्ष कहीं का नही रहता।
जागो और मर्यादा का पालन करो मॉडर्न थीम के चक्कर में विवाह जैसे पवित्र रिश्तों एवं सामाजिक वातावरण को मत बिगाड़ो।

सभी से विनम्र निवेदन🙏.........

षटतिला एकादशी व्रत कथा 1. तिल स्नान, 2. तिल का उबटन, 3. तिल का हवन, 4. तिल का तर्पण, 5 तिल का भोजन और 6. तिलों का ‍दान- ...
05/02/2021

षटतिला एकादशी व्रत कथा

1. तिल स्नान, 2. तिल का उबटन, 3. तिल का हवन, 4. तिल का तर्पण, 5 तिल का भोजन और 6. तिलों का ‍दान- ये तिल के 6 प्रकार हैं । इनके प्रयोग के कारण यह षटतिला एकादशी कहलाती है। इस व्रत के करने से अनेक प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं। इतना कहकर पुलस्त्य ऋषि कहने लगे कि अब मैं तुमसे इस एकादशी की कथा कहता हूँ।

https://youtu.be/mdHb2xHnb6M

एक समय नारदजी ने भगवान श्रीविष्णु से यही प्रश्न किया था और भगवान ने जो षटतिला एकादशी का माहात्म्य नारदजी से कहा- सो मैं तुमसे कहता हूँ। भगवान ने नारदजी से कहा कि हे नारद! मैं तुमसे सत्य घटना कहता हूँ। ध्यानपूर्वक सुनो।

https://youtu.be/mdHb2xHnb6M

प्राचीनकाल में मृत्युलोक में एक ब्राह्मणी रहती थी। वह सदैव व्रत किया करती थी। एक समय वह एक मास तक व्रत करती रही। इससे उसका शरीर अत्यंत दुर्बल हो गया। यद्यपि वह अत्यंत बुद्धिमान थी तथापि उसने कभी देवताअओं या ब्राह्मणों के निमित्त अन्न या धन का दान नहीं किया था। इससे मैंने सोचा कि ब्राह्मणी ने व्रत आदि से अपना शरीर शुद्ध कर लिया है, अब इसे विष्णुलोक तो मिल ही जाएगा परंतु इसने कभी अन्न का दान नहीं किया, इससे इसकी तृप्ति होना कठिन है।

भगवान ने आगे कहा- ऐसा सोचकर मैं भिखारी के वेश में मृत्युलोक में उस ब्राह्मणी के पास गया और उससे भिक्षा माँगी। वह ब्राह्मणी बोली- महाराज किसलिए आए हो? मैंने कहा- मुझे भिक्षा चाहिए। इस पर उसने एक मिट्टी का ढेला मेरे भिक्षापात्र में डाल दिया। मैं उसे लेकर स्वर्ग में लौट आया। कुछ समय बाद ब्राह्मणी भी शरीर त्याग कर स्वर्ग में आ गई। उस ब्राह्मणी को मिट्टी का दान करने से स्वर्ग में सुंदर महल मिला, परंतु उसने अपने घर को अन्नादि सब सामग्रियों से शून्य पाया।

https://youtu.be/mdHb2xHnb6M

घबराकर वह मेरे पास आई और कहने लगी कि भगवन् मैंने अनेक व्रत आदि से आपकी पूजा की परंतु फिर भी मेरा घर अन्नादि सब वस्तुओं से शून्य है। इसका क्या कारण है? इस पर मैंने कहा- पहले तुम अपने घर जाओ। देवस्त्रियाँ आएँगी तुम्हें देखने के लिए। पहले उनसे षटतिला एकादशी का पुण्य और विधि सुन लो, तब द्वार खोलना। मेरे ऐसे वचन सुनकर वह अपने घर गई। जब देवस्त्रियाँ आईं और द्वार खोलने को कहा तो ब्राह्मणी बोली- आप मुझे देखने आई हैं तो षटतिला एकादशी का माहात्म्य मुझसे कहो।

उनमें से एक देवस्त्री कहने लगी कि मैं कहती हूँ। जब ब्राह्मणी ने षटतिला एकादशी का माहात्म्य सुना तब द्वार खोल दिया। देवांगनाओं ने उसको देखा कि न तो वह गांधर्वी है और न आसुरी है वरन पहले जैसी मानुषी है। उस ब्राह्मणी ने उनके कथनानुसार षटतिला एकादशी का व्रत किया। इसके प्रभाव से वह सुंदर और रूपवती हो गई तथा उसका घर अन्नादि समस्त सामग्रियों से युक्त हो गया।

https://youtu.be/mdHb2xHnb6M

अत: मनुष्यों को मूर्खता त्यागकर षटतिला एकादशी का व्रत और लोभ न करके तिलादि का दान करना चाहिए। इससे दुर्भाग्य, दरिद्रता तथा अनेक प्रकार के कष्ट दूर होकर मोक्ष की प्राप्ति होती है।

#षटतिला #एकादशी

यद्यपि यह नव वर्ष भारतीय नहीं है, तथापि सबके लिये कल्याणप्रद हो; क्योंकि सम्पूर्ण विश्व हमारा कुटुम्ब ही तो है !धर्म-शास...
24/01/2021

यद्यपि यह नव वर्ष भारतीय नहीं है, तथापि सबके लिये कल्याणप्रद हो; क्योंकि सम्पूर्ण विश्व हमारा कुटुम्ब ही तो है !

धर्म-शास्त्रानुसारं नववर्षस्य आरम्भ: चैत्रमासस्य शुक्लपक्षे भवति -
तत्र सन्ति अनेकानि कारणानि ।
१. पुष्पिता फलिताश्च भवन्ति वृक्षा: ।
२. नवरात्रस्य प्रथमं दिनम् ।
३.भगवत: श्रीरामचन्द्रस्य राज्याभिषेक: ।
४. विक्रमादित्यस्य अखण्डराज्यस्य स्थापनम् ।
५. युधिष्ठिरस्य राज्याभिषेक:
इदानीं नववर्षस्य आचरणे नास्ति किमपि वैज्ञानिकं कारणम् ।
उक्तं च -
चैत्रे मासे जगद् ब्रह्मा ससर्ज प्रथमेsहनि ।
शुक्लपक्षे समग्रे तु सदा सूर्योदये सति।।
According to the scriptures, the beginning of the new year takes place in the Shukla paksha of Chaitra month, in which there are many reasons.
1.The new flower leaves appear in the tree..
2.Coronation of Shri Ramchandra.
3.Navaratri is the first day.
4.Vikramaditya established his kingdom.
5.Yudhisthira's coronation was.
There is no scientific reason for celebrating New Year at this time.

*आप सभी को अंग्रेजी वर्ष 2021 में पदार्पण की मंगलकामनायें !!*
*जय श्री राधे सुप्रभातम💐💐*

*🌷पुत्रदा एकादशी व्रत 24/01/21 रविवार को हैं ।*🌷पुत्रदा एकादशी व्रत का आरंभ 23 जनवरी, शनिवार को रात 08 बजकर 55 मिनट पर ह...
24/01/2021

*🌷पुत्रदा एकादशी व्रत 24/01/21 रविवार को हैं ।
*🌷पुत्रदा एकादशी व्रत का आरंभ 23 जनवरी, शनिवार को रात 08 बजकर 55 मिनट पर होगा और व्रत की समाप्ति 24 जनवरी, रविवार को 10 बजकर 56 मिनट पर होगी. व्रत पारण 25 जनवरी, सोमवार को सुबह 07 बजकर 12 मिनट से 09 बजकर 22 मिनट तक होगा.*

https://youtu.be/lc9Ygg6GXT0

*पुत्रदा एकादशी का महत्व*
*पुत्रदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है. माना जाता है कि जो जातक पुत्रदा एकादशी पर विधि-विधान से व्रत रखता है, भगवान विष्णु उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं. इस दिन व्रत रखने से व्रती को योग्य संतान की प्राप्ति भी होती है.*

http://bit.ly/putrdaeka

*पुत्रदा एकादशी व्रत कथा*
*धार्मिक कथाओं के अनुसार, भद्रवती राज्य में सुकेतुमान नाम का राजा राज किया करता था. राजा की पत्नी का नाम शैव्या था. दोनों की कोई संतान नहीं थी. इस वजह से राजा और रानी उदास रहा करते थे. एक दिन सुकेतुमान सब कुछ त्याग कर जंगल में जला गया. वहां राजा एक तालाब के किनारे बैठ कर मृत्यु के बारे में सोचने लगा. वहां पर ऋषि-मुनियों के आश्रम बने हुए थे. राजा आश्रम में गया और उसे देखकर ऋषि-मुनि प्रसन्न हो गए. उन्होंने राजा से उसकी इच्छा पूछी.*

http://bit.ly/putrdaeka

*राजा ने ऋषि-मुनि को बताया कि कोई संतान न होने की वजह से वे चिंतित रहते हैं. राजा की बात सुनकर ऋषि-मुनि ने राजा को पुत्रदा एकादशी पर व्रत रखने के लिए कहा. ऋषि मुनि की बात को मानकर राजा ने विधि-विधान से पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा और द्वादशी को पारण किया. इसके कुछ समय पश्चात ही रानी ने गर्भ धारण किया और नौ माह बाद राजा-रानी को पुत्र की प्राप्ति हुई.*

https://youtu.be/lc9Ygg6GXT0

#पुत्रदा_एकादशी_व्रत_कथा

पौष शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी के रूप में मनाया जाता है। संतान की इच्छा रखने वाले माता-पिता के लिए यह व्रत व...
23/01/2021

पौष शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी के रूप में मनाया जाता है। संतान की इच्छा रखने वाले माता-पिता के लिए यह व्रत वरदान की तरह है। ये तिथि सब पापों को हरने वाली पितृऋण से मुक्ति दिलाने में सक्षम है।
http://bit.ly/putrdaeka
जगतगुरु भगवान विष्णु इस तिथि के अधिदेवता हैं, इसलिए जप, तप, दान-पुन्य और सकाम अनुष्ठान-पूजा के लिए यह सर्वोच्च तिथि है।
https://bit.ly/putrdaeka

चराचर जगत में प्राणियों के लिए इससे बढ़कर दूसरी अन्य कोई तिथि नहीं है। इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की भक्ति पूर्वक षोडशोपचार विधि के द्वारा 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' इस अमोघ मंत्र द्वारा पूजन सामग्री अर्पित करना चाहिए। पूजन के मध्य भी इस मंत्र का जप करते रहना चाहिए। समापन के समय श्रद्धा-भाव से इस मंत्र के द्वारा जनार्दन की प्रार्थना करना करना चाहिए। 'एकादश्यां निराहारः स्थित्वाहमपरेऽहनि ।
https://bit.ly/putrdaeka

भोक्ष्यामि पुण्डरीकाक्ष पुत्रं में भवाच्युत ।। अर्थात- हे 'कमलनयन' भगवान अच्युत ! मैं एकादशी को निराहार रहकर दूसरे दिन भोजन करूँगा आप मुझे उत्तम पुत्र दें, ऐसी प्रार्थना करनी चाहिए।
http://bit.ly/putrdaeka

#पुत्रदा_एकादशी_व्रत_कथा

सफला एकादशी व्रत कथाhttp://bit.ly/saflaekadsiपद्म पुराण में वर्णित एक कथा के अनुसार, महिष्मान नाम का एक राजा था। इनका ज्...
09/01/2021

सफला एकादशी व्रत कथा

http://bit.ly/saflaekadsi

पद्म पुराण में वर्णित एक कथा के अनुसार, महिष्मान नाम का एक राजा था। इनका ज्येष्ठ पुत्र लुम्पक पाप कर्मों में लिप्त रहता था। इससे नाराज होकर राजा ने अपने पुत्र को देश से बाहर निकाल दिया। लुम्पक जंगल में रहने लगा।

http://bit.ly/saflaekadsi

पौष कृष्ण दशमी की रात में ठंड के कारण वह सो न सका। सुबह होते होते ठंड से लुम्पक बेहोश हो गया। आधा दिन गुजर जाने के बाद जब बेहोशी दूर हुई तब जंगल से फल इकट्ठा करने लगा। शाम में सूर्यास्त के बाद यह अपनी किस्मत को कोसते हुए भगवान को याद करने लगा। एकादशी की रात भी अपने दुखों पर विचार करते हुए लुम्पक सो न सका।

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इस तरह अनजाने में ही लुम्पक से सफला एकादशी का व्रत पूरा हो गया। इस व्रत के प्रभाव से लुम्पक सुधर गया और इनके पिता ने अपना सारा राज्य लुम्पक को सौंप दिया और खुद तपस्या के लिए चले गए। काफी समय तक धर्म पूर्वक शासन करने के बाद लुम्पक भी तपस्या करने चला गया और मृत्यु के पश्चात विष्णु लोक में स्थान प्राप्त हुआ।

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31/12/2020

जानिए आपके लिए कैसा रहेगा साल 2021 क्या कहती है आपकी राशि
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28/12/2020

नमस्कार
आपका ह्रदय की गहराइयों से बहुत बहुत धन्यवाद आप सभी ने इतना प्यार दिया और अपनी सनातन संस्कृति के प्रचार प्रसार के लिए हमारे यूट्यूब चैनल को सपोर्ट किया एक बार फिर से बहुत बहुत धन्यवाद
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