Gopala jems

Gopala jems रत्नों में चमत्कारी शक्ति है जो ग्रहो?

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31/03/2017

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24/06/2016

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सादगी, पवित्रता और कोमलता की निशानी माने जाने वाला मोती एक चमत्कारी ज्योतिषीय रत्न माना जाता है। इसे मुक्ता, शीशा रत्न औ...
24/06/2016

सादगी, पवित्रता और कोमलता की निशानी माने जाने वाला मोती एक चमत्कारी ज्योतिषीय रत्न माना जाता है। इसे मुक्ता, शीशा रत्न और पर्ल (Pearl) के नाम से भी जाना जाता है। मोती सिर्फ एक रंग का ही नहीं होता बल्कि यह कई अन्य रंगों जैसे गुलाबी, लाल, हल्के पीले रंग का भी पाया जाता है। मोती, समुद्र के भीतर स्थित घोंघे नामक कीट में पाए जाते हैं।
मोती के तथ्य (Facts of Moti or Pearl in Hindi)
* मोती के बारे में बताया जाता है कि यह रत्न, बाकी रत्नों से कम समय तक ही चलता है क्योंकि यह रत्न रूखेपन, नमी तथा एसिड से अधिक प्रभावित हो जाता है।
* प्राचीनकाल में मोती (Pearl or Moti) को सुंदरता निखारने के लिए इस्तेमाल में लाया जाता था तथा इसे शुद्धता का प्रतीक माना जाता था।
मोती के लिए राशि (Moti for Cancer Rashi)
कर्क राशि के जातकों के लिए मोती धारण करना अत्याधिक लाभकारी माना जाता है । चन्द्रमा से जनित बीमारियों और पीड़ा की शांति के लिए मोती धारण करना लाभदायक माना जाता है।
मोती के फायदे (Benefits of Pearl or Moti in Hindi)
* मोती धारण करने से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। जो जातक मानसिक तनाव से जूझ रहें हों उन्हें मोती को धारण कर लेना चाहिए।
* जिन लोगों को अपनी राशि ना पता हो या कुंडली ना हो, वह भी मोती धारण कर सकते हैं।
स्वास्थ्य में मोती का लाभ (Benefits of Pearl in Health)
* मानसिक शांति, अनिद्रा आदि की पीड़ा में मोती बेहद लाभदायक माना जाता है।
* नेत्र रोग तथा गर्भाशय जैसे समस्या से बचने के लिए मोती धारण किया जाता है।
* मोती, हृदय संबंधित रोगों के लिए भी अच्छा माना जाता

स्फटिक श्री यंत्र अचूक उपाय | Sphatik Sri Yantraस्फटिक श्री यंत्र स्थाई धन प्राप्ति का अचूक उपाय बनता है. इसके साथ देवी ...
17/06/2016

स्फटिक श्री यंत्र अचूक उपाय | Sphatik Sri Yantra
स्फटिक श्री यंत्र स्थाई धन प्राप्ति का अचूक उपाय बनता है. इसके साथ देवी लक्ष्मी, शुक्र देव और कुबेर जी की पूजा का विधान तुरंत असरदायक होता है. जहां देवी लक्ष्मी जी ऎश्वर्य देती हैं वहीं शुक्र देव की अनुकूलता से भोगों को भोगने का सामर्थ्य व सुख मिलता है और कुबेर धन का संचय कराते हैं और वैभव प्रदान करते हैं. इन तीनों की पूजा संयुक्त रुप से श्री यंत्र के समक्ष की जाए तो अवश्य ही संपन्नता व समृद्धि बनी रहती है. स्फटिक श्री यंत्र देवी लक्ष्मी जी का अमोघ फलदायक यंत्र है. श्री यंत्र में महालक्ष्मी जी का वास माना जाता है इस यंत्र को अपनाने से समस्त सुख व समृद्धि प्राप्त होती है. निर्धन धनवान बनता है और अयोग्य योग्य बनता है. इसकी उपासना से व्यक्ति कि मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. इस यंत्र को समस्त यंत्र में श्रेष्ठ स्थान प्राप्त है.

स्फटिक श्री यंत्र ऎश्वर्यदाता और लक्ष्मीप्रदाता है. यह यंत्र आय में वृद्धि कारक व व्यवसाय में सफलता दिलाने वाला होता है. आज के समय में स्थाई धन की अभिलाषा सभी के मन में देखी जा सकती है. अधिकतर व्यक्ति कितना भी कमाएं परंतु धन उनके पास जमा नहीं हो पाता व्यय बने ही रहते हैं. धन का संचय कर पाना कठिन काम हो जाता है.

11/06/2016
गोमेद एक रत्न है जिसे राहु ग्रह से समबन्धित किसी भी विषय के लिए धारण करने हेतु ज्योतिषशास्त्री परामर्श देते हैं. गोमेद न...
11/06/2016

गोमेद एक रत्न है जिसे राहु ग्रह से समबन्धित किसी भी विषय के लिए धारण करने हेतु ज्योतिषशास्त्री परामर्श देते हैं. गोमेद न सिर्फ राहु ग्रह की बाधाओं को दूर करता है बल्कि, गोमेद कई प्रकार की स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं से भी निजात दिलाता है (Gomed removes all problems caused by Rahu). गोमेद एक ऐसा रत्न है जो नज़र की बाधाओं, भूत-प्रेत एवं जादू-टोने से भी सुरक्षा प्रदान करता है. गोमेद में इतनी सारी खूबियां हैं जिनसे व्यक्ति के जीवन की बहुत सी मुश्किलें दूर हो सकती हैं. लेकिन इसे किसी अच्छे ज्योतिषी से सलाह लेकर धारण करना चाहिए.

गोमेद क्या है (What is Gomed / Hessonite)
गोमेद को अंग्रेजी में Agate, Hessonit, Onyx के नाम से जाना जाता है. संस्कृत में गोमद को गोमेदक, पीत रक्तमणि, पिग स्फटिक कहा गया है. सुलेमानी, हजार यामनी नाम से भी गोमद को जाना जाता है. गोमद को बंगाल में मोदित मणि के नाम से पुकारते हैं. गोमेद राहु का मुख्य रत्न है. इस रत्न में राहु की शक्तियां एवं गुण मौजूद है. गोमेद राहु की नकारात्मक उर्जा को सकारत्मक उर्जा में परिवर्तित करके राहु के कष्टकारी प्रभाव से व्यक्ति को सुरक्षा प्रदान करता है.

गोमेद की पहचान (How to recognize Gomed / Hessonite)
असली गोमेद को उसके रंग एवं चमक से पहचाना जा सकता है. गोमूत्र से मिलता जुलता रंग होने के कारण इसे गोमेद कहा जाता है. यह एक चमकीला पत्थर होता है जो दिखने में शहद के रंग के समान भूरा होता है. गोमेद धुएं के सामन एवं काले रंग का भी होता है. गोमेद के ऊपर जब प्रकाश डाला जाता है जो उससे जो रोशनी पार करके निकली है उसका रंग गोमूत्र जैसा दिखता है. असली गोमेद की पहचान इस तरह आसानी से की जा सकती है. शुद्ध गोमेद चिकना, चमकीला एवं सुन्दर दिखता है.

गोमेद किसे धारण करण चाहिए (Who should wear Gomed / Hessonite)
कुण्डली में राहु जिस भाव में हो उस भाव के शुभ फल को बढ़ाने के लिए राहु रत्न गोमेद पहनना चाहिए (Hessonite should be worn to strengthen the house where Rahu is located). ज्योतिषशास्त्र के अनुसार राहु तीसरे, छठे भाव में हो तो गोमेद पहनना चाहिए. मेष लग्न की कुण्डली में यदि राहु नवें घर में है तो गोमेद पहनने से भाग्य बलवान होता है. राहु यदि दशम अथवा एकादश भाव में है तब भी गोमेद धारण करना उत्तम होता है. लग्न में राहु होने पर स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियों को कम करने हेतु गोमद पहनना फायदेमंद होता है. राजनीति एवं न्याय विभाग से जुड़े लोगों की कुण्डली में राहु मजबूत होने पर सफलता तेजी से मिलती है. राहु को बलवान बनाने के लिए इन्हें गोमेद रत्न धारण करना चाहिए.

शनि रत्न नीलम (Blue Sapphire, The Gemstone of Saturn)सूर्य का रत्न माणिक्य है, चन्द्र का मोती, मंगल का मूंगा इसी प्रकार ...
05/06/2016

शनि रत्न नीलम (Blue Sapphire, The Gemstone of Saturn)

सूर्य का रत्न माणिक्य है, चन्द्र का मोती, मंगल का मूंगा इसी प्रकार शनि का रत्न है नीलम. शनि को नवग्रहों में पाप ग्रह तथा क्रूर ग्रह के रूप में संबोधित किया गया है. माना जाता है कि शनि अपनी दशा में व्यक्ति को उनके कर्मों के अनुसार दंड देता है इसलिए, शनि की दशा कष्टकारी प्रतीत होती है. शनि के कष्टदायी प्रभाव को कम करने हेतु शनि का रत्न नीलम धारण करना लाभप्रद होता है. नीलम को चमत्कारी रत्न माना जाता है, यह न सिर्फ शनि के प्रकोप से रक्षा करता है बल्कि इसमें तकदीर बदलने की भी क्षमता मानी जाती है. नीलम की खूबियों, पहचान एवं प्रकार के विषय में आपकी जो भी जिज्ञासा है इस आलेख में उन सभी विषयों की चर्चा की जा रही है.

शनि का रत्न क्यो है नीलम (Why is Saturn's Gemstone Blue Sapphire)
शनि का रंग नीला होता है. नीलम का रंग भी नीला होता है. नीलम में शनि की उर्जा को अवशोषित करने की क्षमता होती है यही वजह है कि नीलम को शनि का रत्न माना गया है. नीलम को कई नामों से जाना जाता है. नीलम को अंग्रेजी में Blue Sapphire कहते हैं. संस्कृत में नीलम को इन्द्रनील, तृषाग्रही नीलमणि नाम से जाना जाता है. फरासी में याकूत, कबूद नाम से इसे जाना जाता है.
नीलम के प्रकार (Types of Blue Sapphire)

नीलम की पहचान करने से पहले यह जान लेना जरूरी है कि नीलम कितने प्रकार का होता है. यह जान लेने से नीलम की पहचान करना आसान हो जाता है. संरचना के आधार पर संसार में प्राप्त होने वाले नीलम के दो प्रकार होते हैं जिनके नाम हैं जल नीलम और इन्द्र नीलम.

जल नीलम (Jala-Neelam Gemstone)
जिस नीलम के चारों तरफ नीली आभा दिखाई देती है तथा बीच में सफेद रंग की आभा नज़र आती है उसे जल नीलम कहा जाता है.

इन्द्र नीलम (Indra-Neelam Gemstone)
इन्द्र नीलम को शुक्र नीलम भी कहते हैं. यह नीलम चारों तरफ से गहरे रंग का होता है और बीच में हल्की नीली आभा छिटकती रहती है..

नीलम की पहचान (How to recognize a Blue Sapphire)
नीलम कीमती रत्न है अत: विक्रेता नकली नीलम बेचकर लोगों को खूब ठगते हैं. नीलम खरीदते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि हर नीला पत्थर नीलम नहीं होता है. अच्छा नीलम वह होता है जिसकी आभा से दूसरी वस्तु भी नीली दिखने लगती है. श्रेष्ठ नीलम से नीली रोशनी निकलती हुई प्रतीत होती है.

नीलम धारण करने में सावधानी (Precautions While Wearing Blue Sapphire)
नीलम को बहुत ही प्रभावशाली रत्न माना जाता है. त्रुटिपूर्ण नीलम धारण करने से नुकसान होता है. जिस नीलम में दो रंग की आभा दृष्टिगत होती है उसे नहीं पहनना चाहिए. यह परिवार के लिए नुकसानदेय होता है, विशेषतौर पर संतान एवं जीवनसाथी के लिए कष्टकारी माना जाता है. जिस नीलम में जाल दिखता हो उसे धारण करने से रोग में वृद्धि होती है. जिस नीलम में चीरा दिखाई देता हो उसे नहीं पहनना चाहिए. इससे धन की हानि होती है. सफेद लकीर वाली नीलम तथा दाग़दार नीलम पहनना कष्टकारी होता है. इससे दुर्घटना भी हो सकती है.

नीलम किसे पहनना चाहिए (Who should wear Blue Sapphire)
मेष, वृष एवं तुला लग्न के लिए शनि योगकारी ग्रह होते हैं. इस लग्न के व्यक्ति नीलम धारण कर सकते हैं. मकर एवं कुम्भ राशि के स्वामी शनि ग्रह हैं अत: इस लग्न के लिए शनि शुभ होते हैं अत: मकर एवं कुम्भ लग्न के व्यक्ति भी नीलम पहन सकते हैं. कुण्डली में अगर शश योग है तो नीलम पहनना बहुत ही फायदेमंद होता है. वे लोग जिनकी कुण्डली में शनि कमज़ोर, वक्री एवं अस्त हैं और शुभ भाव में बैठे हैं अथवा शुभ भावों के स्वामी हैं तो नीलम पहनन सकते हैं.

नीलम कब पहनना चाहिए (When should one Wear Blue Sapphire)
जब शनि की महादशा अथवा अन्तर्दशा चल रही हो उस समय नीलम पहनना लाभकारी रहता है. साढ़ेसाती एवं ढैय्या की अवधि में भी नीलम धारण कारण कल्याणकारी होता है.

नीलम के लाभ (Benefits of Wearing Blue Sapphire)
नीलम शनि का रत्न है अत: इसे धारण करने से व्यक्ति में धैर्य व साहस बढ़ता है. मेहनत करने की क्षमता बढ़ती है तथा मेहनत का पूरा फल प्राप्त होता है. नेत्र रोग, ज्वर एवं रक्त सम्बन्धी रोग में कमी आती

Yellow Sapphire in Englishपुखराज पीले रंग का एक बेहद खूबसूरत रत्न है। इसे बृहस्पति ग्रह का रत्न माना जाता है। पुखराज की ...
02/06/2016

Yellow Sapphire in English
पुखराज पीले रंग का एक बेहद खूबसूरत रत्न है। इसे बृहस्पति ग्रह का रत्न माना जाता है। पुखराज की गुणवत्ता आकार, रंग तथा शुद्धता के आधार पर तय की जाती है। पुखराज (Pukhraj or Yellow Sapphire) तकरीबन हर रंग में मौजूद होते हैं, लेकिन जातकों को अपनी राशि के अनुसार इन पुखराज को धारण करना चाहिए।
पुखराज के तथ्य (Facts of Pukhraj or Yellow Sapphire)
पुखराज के बारे में बताया जाता है कि जिन जातकों की कुंडली में बृहस्पति कमज़ोर हो उन्हें पीला पुखराज धारण करना चाहिए।
पुखराज के लिए राशि (Pukhraj for Rashi)
धनु तथा मीन राशियों के जातकों के लिए पुखराज धारण करना अत्यंत लाभकारी माना गया है।
पुखराज के फायदे (Benefits of Pukhraj in Hindi)
* पुखराज धारण करने से मान सम्मान तथा धन संपत्ति में वृद्धि होती है।
* यह रत्न शिक्षा के क्षेत्र में भी सफलता प्रदान करवाता है।
* इस रत्न से जातकों के मन में धार्मिकता तथा सामाजिक कार्य में रुचि होने लगती है।
* विवाह में आती रुकावटें तथा व्यापार में होता नुकसान से बचने के लिए भी पीला पुखराज धारण करने की सलाह दी जाती है।
पुखराज के स्वास्थ्य संबंधी लाभ (Health Benefits of Pukhraj)
* ज्योतिषी मानते हैं कि जिन जातकों को सीने की दर्द, श्वास, गला आदि रोगों से परेशानी है तो उन्हें पुखराज धारण करना चाहिए।
* अल्सर, गठिया, दस्त, नपुंसकता, टीबी, हृदय, घुटना तथा जोड़ों के दर्द से राहत पाने के लिए भी पुखराज का उपयोग किया जाता है।
कैसे धारण करें पुखराज (How to Wear Yellow Sapphire)
पुखराज गुरुवार के दिन धारण करना चाहिए। धारण करने से पूर्व पीली वस्तुओं विशेषकर जो बृहस्पति से संबंधित हो उनका देना चाहिए। बृहस्पति से संबंधित कुछ वस्तुएं हैं केला, हल्दी, पीले कपड़े आदि। माना जाता है कि पुखराज हमेशा सवा 5 रत्ती, सवा 9 रत्ती, सवा 12 रत्ती की मात्रा में धारण करें। पुखराज धारण करने से पहले इसकी विधिवत पूजा-अर्चना करनी चाहिए। बिना ज्योतिषी की सलाह और कुंडली देखे बिना पुखराज या अन्य रत्न नहीं धारण करने चाहिए।
पुखराज का उपरत्न (Substitutes of Yellow Sapphire)
पुखराज के स्थान पर रत्न ज्योतिषी धिया, सुनैला, सुनहला या पीला हकीक पहनने की भी सलाह देते हैं।

- See more at: http://astrology.raftaar.in/astro/gemstones/pukhraj-ratan .dR8Fg9DC.dpuf

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