06/12/2023
फार्मर भाईयो,
ठण्ड की दस्तक के साथ ही बीमारियों की दस्तख़त भी दिखने लग जाती है।
यह जरूरी है कि हम अपनी तरफ से कोई गलती न करें, और यह लक्ष्य तय करके चलें कि मैनेजमेंट की बारीकियों को ध्यान में रख कर स्वस्थ फ्लॉक निकालें।
मैं इस लेख में सिर्फ उन्हीं बातों का उल्लेख कर रहा हूँ जो गलतियां हम अक्सर कर जाते हैं।
ठण्ड के मौसम में विशेष तौर पर ध्यान रखने वाली बातें हैं,
1) सही तापमान
2) सही नमी/ आर्द्रता (ह्यूमिडिटी)
3) ताज़ी हवा का नियमित संचार
4) ठंडी हवा के झोंको पर रोक
5) दूषित गैस की सही निकास
6) पानी का सही तापमान
7) साफ़ पानी
8) पर्याप्त जगह
9) पर्याप्त रौशनी
10) ठंडी के लिए उपयुक्त पोषण।
11) बीमारियों के विरुद्ध सही टीका और रोकथाम के सही उपाय।
आम तौर पर पहले सप्ताह में 90-95 डिग्री फ़ारेनहाइट , दुसरे सप्ताह में 90 डिग्री फ़ारेनहाइट उसके बाद 85 डिग्री फ़ारेनहाइट रखने का प्रावधान है, लेकिन तापमान को कभी बिना ह्यूमिडिटी के आँका नहीं जा सकता। यह मानक तभी उचित हैं जब रिलेटिव ह्यूमिडिटी भी लगभग 60 के आसपास हो। याद रहे यदि ह्यूमिडिटी इससे ज्यादा है, तो ये मानक उचित तापमान की बजाय अधिक तापमान करवा देंगे।
फार्मर भाई अपने फ़ार्म पर तापमान और ह्यूमिडिटी मापने का यन्त्र जरूर रखे और अंदाज वश काम न करें।
तापमान को नियंत्रित करने के लिए आम तौर पर ब्रूडिंग एरिया को पूरी तरह सील कर दिया जाता है ताकि रूम को गर्म करना आसान हो। लेकिन ऐसे में ताज़ी हवा का संचार रूक जाता है, जहरीली गैस जमा होती हैं और विभिन्न तरह की बीमारियों को न्योता देती हैं।
इससे बचने के लिए इस बात को सुनिश्चित करना जरूरी है, की हवा के आदान प्रदान के लिए कुछ व्यवस्था करने के बाद भी ब्रूडिंग एरिया को गर्म करने की हमारी क्षमता हो। साइड से परदे हटाना उचित न हो, तो फ़ार्म की लंबाई वाली खाली पड़ी एरिया से हवा ली जा सकती है,और एक्सहॉस्ट फैन का उपयोग किया जा सकता है।
पुरे समय, चाहे दिन हो या रात, एक समान तापमान महत्वपूर्ण है, और यदि उच्चतम और न्यूनतम तापमान का फर्क बड़ा होगा तो दिक्कत आ सकती है। तापमान को नियंत्रित करने के लिए फाल्स सीलिंग, और डबल कर्टेन इस्तेमाल कर सकते हैं, बस वेंटिलेशन का ध्यान रखना जरूरी है। यदि दिन के वक़्त किसी तरफ से पर्दा खोलना उपयुक्त हो तो सूरज की दिशा में खोले,और बच्चो के स्तर पर पर्दा न खोले, ताकि सीधी हवा बच्चो पर न लगे।
बच्चे को पानी सही तापमान पर मिलना जरूरी है। बहुत ठन्डे पानी से शरीर की गर्मी का नुकसान होगा और पीने योग्य गुनगुने पानी से अधिक ठंडी में कुछ राहत मिल सकती है। पानी अशुद्धियों से मुक्त होना चाहिए।
सुनिश्चित करें, की तय रौशनी से कम या ज्यादा रोशनी न दे। ब्रायलर को अपनी उम्र के मुताबिक सही लाइट दें।
ठंडियों में शरीर गर्म रखने के लिए बच्चों को अधिक एनर्जी की जरूरत होती है, जिससे वो ज्यादा दाना खा लेते हैं। इस बात को सुनिश्चित करें की दाने में एनर्जी, प्रोटीन, तथा फीड एडिटिव मौसम के अनुरूप हों।
राउंड ब्रूडिंग अवश्य करें, बच्चो को शुरुवात में 0.25 से 0.3 वर्ग फ़ीट जगह दे, फिर उम्र अनुसार बढ़ाएं। 13 फ़ीट व्यास के क्षेत्रफल में इस तरह 400 से 500 बच्चे रखे जा सकते हैं (मौसम और उम्र के अनुरूप)।
पेपर फीडिंग, मिनी ड्रिंकर, टायर फीडिंग इत्यादि का उपयोग लाभप्रद है। कम से कम 5 प्रतिशत बच्चो का मुँह पानी और फिर दाने में टच करके छोड़ने से सभी बच्चे दाना पानी जल्दी ढूंढ लेंगे। बच्चो के आने के 12-24 घंटे पहले से ही उचित तापमान शेड में सेट हो जाना चाहिए। थर्मामीटर को हीटर से 1.5-2 फ़ीट दूर और जमीन से 1.5 फ़ीट ऊपर होना चाहिए।
गैस ब्रूडर, इलेक्ट्रिक ब्रूडर इत्यादि का उपयोग बुखारी से बेहतर होता है। यदि बुखारी का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो विशेष सावधानी बरतें की गैस का सही निष्काशन हो जाये।
बायोसीक्योरिटी का विशेष ध्यान रखे। शेड की सफाई सही हो, प्रति सप्ताह छिड़काव हो, बिना काम के लोग या वस्तु फ़ार्म तक ना पहुंचे। फ़ार्म पर आने वाले लोग और वस्तु पर छिड़काव हो।
सहरसा कोशी पोल्ट्री फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड ।
संदक्ष परासर
9304808113