12/04/2016
कैसे हैं दोस्तों!!
नमस्कार मैं प्रखर, आप सबसे कुछ बात करना चाहता हूँ 7091013816।
क्या आपको नहीं लगता कि आप बोर हो गए हैं 15-20 हजार रुपए / महीने कमाकर और तंग आ गए हैं बढ़ती महंगाई से।
लेकिन क्या आप जानना चाहते हैं कि इस महंगाई में भी कुछ लोग जो अच्छी जिंदगी जी रहे हैं उनके पास इतना पैसा कहां से आ रहा है कि वो सपने को साकार कर रहे हैं।
तो सवाल यह उठता है कि क्या आप भी ऐसी जिंदगी जीना चाहते हैं जिसे कुछ लोग बस सपने के तौर पर देखते भर रह जाते हैं और जिंदगी काट लेते हैं 15-20 हजार रुपए कमाकर।
तो आइये मुद्दे की बात करते हैं दोस्तों!!
लेवरेज इनकम या समय-गुणन विधि द्वारा आय बढ़ाने की बात आपने सुनी है या कहीं पढ़ा है। जी हाँ दोस्तों, यही एकमात्र तरीका है एक बेहतर जिंदगी जीने लायक कमा पाने का। मान लीजिए आप किसी कम्पनी में ओवर-टाइम करने का विकल्प रखेंगे लेकिन क्या सोचा है आपने कितनी देर तक ओवर-टाइम करके आप बेहतर जिंदगी जीने लायक अच्छे पैसे कमा लेंगे 4 घंटे या 5 घंटे।
अब जोड़कर देखिए अपने कुल घंटों की मेहनत को और आप आय को जिससे आपको लगता है कि बेहतर जिंदगी जीने के लायक है।
आप बस ढग रहे हैं खुद को क्या आपको भी कहीं ऐसा हीं नहीं लगता या यूँ कहें की ढगा जा रहा है आपको। सच आप बेशक न बताना चाहे दोस्तों पर है ऐसा हीं।
शायद आपने मोर और शिकारी की कहानी कहीं सुनी या पढ़ी होगी पर अगर नहीं सुनी या पढ़ी तो संक्षेप में सुना देता हूँ। जानते हैं एक मोर था, जो पहले अच्छा भला कीट-पतंगो को जंगल में घुम-घुमकर खाता था परंतु एक दिन उसकी नजर एक शिकारी पर पड़ी जो कुछ कीट-पतंगो को बाजार में बेचने जा रहा था। कीट-पतंगो को देखकर मोर के मुंह में पानी आ गया और उसने बरबस हीं शिकारी से पुछ बैठा की आप इन कीट-पतंगो को कहाँ लिए जा रहे हो, तो उसने बताया मैं इन्हें बाजार में बेचने जा रहा हूँ, क्या तुम इन्हें खरीदना चाहोगे लेकिन इनके बदले तुम्हें बदले में कुछ देना होगा क्या तुम मुझे अपना एक पंख दे सकते हो। यदि तुम मुझे अपना एक पंख प्रतिदिन देने का वादा करो तो मैं तुम्हें प्रतिदिन कीट-पतंगे लाकर दिया करूँगा। उस समय तो शिकारी का सौदा मोर को बहुत पसंद आया लेकिन ज्यों-ज्यों दिन बिते मोर को अपनी गलती का एहसास होने लगा और वह उस शिकारी को तथा उस पल को कोसने लगा। लेकिन अब क्या अब तो कुछ हीं पंख बच गए थे। और यह बात मोर को दुःखी करने लगी, क्योंकि शर्त के मुताबिक पंख नहीं तो कीट-पतंगे नहीं। अब न तो पंख हीं बचे और न हीं शरीर में हीं इतना बल रहा की जंगल तक जाकर कीट-पतंगे हीं खा पाता।
जानते हैं दोस्तों उस मोर का क्या हुआ, वह मर गया लेकिन उसे इस गलती का एहसास हो गया की उसकी ऐसी असमय मौत क्यों हो रही है। क्योंकि बस थोड़ी आलस्य के चलते उसने सही को छोड़ गलत रास्ता अपना लिया था जिससे उसकी असमय मौत हो गई। जी हाँ दोस्तों कहीं न कहीं हम नौकरी और ओवर-टाइम के चक्कर में गलत रास्ता हीं तो नहीं अपना चुके हैं जो हमारी असमय मौत का कारण बन रहा है, जरा सोचिए दोस्तों और गहराई से सोचिए क्योंकि ये हमारे अपने लिए है।
मैं तो यही सलाह देना चाहूँगा कि छोडिए नौकरी का चक्कर बस 9-10 हजार लगाकर बिजनेस ( लेवरेज इनकम ) कीजिए और सफलतापूर्वक खुशहाल जिंदगी बिताइए, इसमें आप 100% सफल होंगे ये गारंटी मेरी है।
शुक्रिया दोस्तों, आपका दिन शुभ हो!!