IBC Dipak Jagdev Maharashtra

IBC Dipak Jagdev Maharashtra I Am Dipak Jagdev. Senior Business Consultant Of Bada Business Prt Ltd. 2 Years Extensive Experience

Soft Skills That Can Help You Accelerate Your CareerSoft Skills That Can Help You Accelerate Your CareerSoft Skills That...
08/08/2023

Soft Skills That Can Help You Accelerate Your Career

Soft Skills That Can Help You Accelerate Your Career
Soft Skills That Can Help You Accelerate Your Career.
Soft skills are personal attributes that enable individuals to interact effectively and harmoniously with others in the workplace and other areas of life. They are often referred to as interpersonal or people skills, and they complement an individual's technical or hard skills.

Soft skills include a range of abilities, such as communication, teamwork, problem-solving, leadership, time management, adaptability, emotional intelligence, and networking. These skills are essential for success in any job or career, as they help individuals work effectively with others, build strong relationships, and navigate workplace challenges.

How to develop strong soft skills
Developing strong soft skills is essential for fast-tracking your career. Here are some soft skills that can help you excel in your career:

Communication:
Good communication skills are essential for success in any job. Being able to communicate clearly, both verbally and in writing, will help you convey your ideas effectively and build strong relationships with colleagues and clients.

Leadership:
Being a good leader means being able to inspire and motivate others, delegate tasks effectively, and provide constructive feedback. Strong leadership skills can help you stand out in your career and can help you advance to higher positions.

Time management:
Effective time management is crucial for success in any career. Being able to prioritize tasks, set realistic deadlines, and manage your workload efficiently will help you be more productive and achieve your goals more quickly.

Adaptability:
In today's fast-paced work environment, it's essential to be adaptable and able to work well under pressure. Being flexible, open to change, and able to pivot quickly when needed can help you excel in your career.

Problem-solving:
The ability to identify problems, analyze data, and develop practical solutions is a valuable skill in any job. Being a good problem-solver can help you stand out in your career and can lead to opportunities for advancement.

Emotional intelligence:
Emotional intelligence is the ability to recognize and manage your own emotions, as well as those of others. Having strong emotional intelligence can help you build stronger relationships, work effectively in teams, and navigate workplace conflicts more effectively.

Networking:
Building a strong professional network can help you create more opportunities for your career. Having the ability to build relationships, make connections, and maintain those relationships over time can help you access new job opportunities and advance in your career.

By developing these soft skills, you can position yourself for success in your career and fast-track your way to the top. Unlike hard skills, which are often specific to a particular job or industry, soft skills are transferable and can be applied in a variety of settings. Employers look for candidates with strong soft skills, as they are often indicative of a person's ability to work well with others, communicate effectively, and adapt to changing circumstances.

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एक समय था जब देश में बहुत कम वुमन एंटरप्रेन्योर हुआ करती थीं। उन दिनों व्यवसाय जगत में आमतौर पर पुरुषों का दबदबा हुआ करत...
03/08/2023

एक समय था जब देश में बहुत कम वुमन एंटरप्रेन्योर हुआ करती थीं। उन दिनों व्यवसाय जगत में आमतौर पर पुरुषों का दबदबा हुआ करता था। लेकिन आज महिलाएं ना सिर्फ अपना स्टार्टअप शुरू कर रही हैं, बल्कि सफलता पूर्वक उसे आगे भी बढ़ा रही हैं। आज वुमनप्रेन्योर का दबदबा पूरी दुनिया मान रही है।

लेकिन सोचने वाली बात ये है कि क्यों इतने सालों तक देश में ज्यादा महिला उद्यमी आगे नहीं आ पाईं। आज के इस आर्टिकल में हम आपको बताएँगे कुछ ऐसी समस्याएं जो महिलाओं के सफल उद्यमी बनने में आड़े आती हैं और कैसे कोई भी महिला बन सकती हैं एक सफल उद्यमी, साथ ही जानिये सरकार द्वारा चलाई जा रही ऐसी योजनाएं जो महिलाओं को उद्यमी बनने में सहायता करती हैं –

ऐसे बिज़नेस माइंडसेट को डेवलप करें

किसी भी बिज़नेस को शुरू करने से पहले ज़रूरी है बिज़नेस के लिए सही माइंडसेट डेवलप करना। उसके लिए ये टिप्स महिलाओं के काम आ सकती है –

स्किल पर काम करें :

जब भी कोई बिज़नेस करना चाहता है, तो वह अपनी स्किल से जुड़ा बिज़नेस ही करता है। एक महिला के रूप में अपने बिज़नेस को करने से पहले आपको अपनी स्किल पर काम करना चाहिए। आप अपनी स्किल को और बेहतर बनाइये। साथ ही कोशिश कीजिए कि आप अपनी स्किल के द्वारा कुछ ऐसा कर दें, जिससे कोई आमूलचूल परिवर्तन कर दें।

बिज़नेस प्लान पर काम करें :

अपना बिज़नेस शुरू करने से पहले आपको विस्तार से अपने बिज़नेस के प्लान को तैयार करना चाहिए। जैसे आपको अपने बिज़नेस के लिए कितने फंड की ज़रूरत होगी और वो आपको कहाँ से मिलेगा। आपको कितने लोगों की ज़रूरत होगी। आप किस प्रकार की मार्केटिंग और अन्य स्ट्रेटेजी अपनाएंगे आदि सभी बातों के बारे में आपको विस्तार में काम करना होगा।

मार्केट रिसर्च :

एक महिला के रूप में अपने बिज़नेस को सफल बनाने के लिए मार्केट की रिसर्च करना भी बहुत ज़रूरी है। आपको यह देखना होगा कि आपके कॉम्पिटिटर्स कौन-कौन हैं। आपके टार्गेटेड कंस्यूमर्स कौन होंगे। उन्हें क्या पसंद आएगा और क्या नहीं। इन सब बातों की रिसर्च करके ही आप अपने बिज़नेस को सफल बना सकते हैं।

पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ को मैनेज करें :

एक महिला के लिए अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ को मैनेज करना बहुत ही कठिन होता है। लेकिन एक महिला में यह क्षमता होती है कि वह अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ को सही तरीके से मैनेज कर सकती है।

बिज़नेस शुरू करने के कुछ स्टेप्स

जब आप अपना बिज़नेस करने का पूरा माइंडसेट बना चुके हैं, तो अब हम आपको बता रहे हैं बिज़नेस शुरू करने के कुछ स्टेप्स –

बिज़नेस का यूनिक नाम :

बिज़नेस मुख्य रूप से 3 प्रकार के होते हैं - सोलोप्रेन्योरशिप, पार्टनरशिप या कंपनी। आप इनमें से चाहे किसी भी प्रकार का बिज़नेस शुरू करने जा रही हैं। आपको अपने बिज़नेस के लिए एक यूनिक नाम तय करना होगा। आपके बिज़नेस का यह नाम किसी पहले से मौजूद बिज़नेस से मिलता-जुलता ना हो, वरना आप रजिस्ट्रेशन नहीं करवा पाएंगी।

यदि आप सोलोप्रेन्योरशिप (प्रोप्राइटरशिप) के रूप में बिज़नेस करना चाहती हैं, तो

सोलोप्रेन्योर बिज़नेस को शुरू करने के स्टेप :

यदि आप स्वयं ही बिज़नेस शुरू करना चाहती हैं तो उसे सोलोप्रेन्योर (प्रोप्राइटरशिप) कहते हैं। कई स्टार्टअप जैसे होम किचन या छोटे स्तर का कोई बिज़नेस सोलोप्रेन्योरशिप के अंतर्गत आते हैं।

सोलोप्रेन्योर बिज़नेस का रजिस्ट्रेशन :

सोलोप्रेन्योर बिज़नेस का रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए आपको अपने शहर के स्थानीय विभाग (जैसे नगर पालिका/नगर निगम, नगर परिषद आदि) में रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। इसके लिए आपकी पहचान और पते का प्रमाण पत्र, जगह आपकी है तो उसकी रजिस्ट्री या रेंट एग्रीमेंट की कॉपी इत्यादि ज़रूरी होती है।

ज़रूरी डाक्यूमेंट्स :

पहचान प्रमाण पत्र (आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस या पहचान का मान्यता प्राप्त कोई भी डॉक्यूमेंट)
पते का प्रमाण पत्र (आधार, मतदाता या कोई अन्य प्रमाण पत्र)
स्थान की रजिस्ट्री या रेंट एग्रीमेंट की कॉपी
स्टार्टअप इंडिया के लिए रजिस्ट्रेशन :

अपने शहर के स्थानीय विभाग में सोलोप्रेन्योरशिप को रजिस्टर करवाने के बाद आपको स्टार्टअप इंडिया के लिए रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। भारत सरकार भारत में स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए कई सारी सुविधाएँ देती है। इनका लाभ आपको स्टार्टअप इंडिया की वेबसाइट https://www.startupindia.gov.in/ पर रजिस्टर करवाने से मिल जाएगा।

यदि आप पार्टनरशिप के रूप में बिज़नेस करना चाहते हैं, तो

पार्टनरशिप बिज़नेस को शुरू करने के स्टेप :

यदि आप किसी के साथ मिलकर बिज़नेस करती हैं, तो आपको पार्टनरशिप के रूप में रजिस्ट्रेशन करवाना होगा।

पार्टनरशिप का रजिस्ट्रेशन :

अपने बिज़नेस को पार्टनरशिप के रूप में शुरू करने के लिए आपको कंपनी एक्ट 2013 के अंतर्गत रजिस्टर करवाना होगा। इसके लिए आप मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स की वेबसाइट https://www.mca.gov.in/content/mca/global/en/home.html पर जाकर रजिस्टर करवा सकते हैं।

ज़रूरी डाक्यूमेंट्स :

साझेदारी की प्रमाणित फोटोकॉपी
सभी साझेदारों के पैन कार्ड
बिज़नेस का पैन कार्ड
स्थान की रजिस्ट्री या रेंट एग्रीमेंट की कॉपी
स्टार्टअप इंडिया के लिए रजिस्ट्रेशन :

पार्टनरशिप फर्म का रजिस्ट्रेशन करवाने के बाद आपको स्टार्टअप इंडिया के लिए रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। भारत सरकार भारत में स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए कई सारी सुविधाएँ देती है। इनका लाभ आपको स्टार्टअप इंडिया की वेबसाइट https://www.startupindia.gov.in/ पर रजिस्टर करवाने से मिल जाएगा।

यदि आप प्राइवेट कंपनी के रूप में स्टार्टअप करना चाहते हैं, तो

प्राइवेट कंपनी के रूप में स्टार्टअप को शुरू करने के स्टेप :

कंपनी के रूप में अपने बिज़नेस का रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए आपको भारतीय कंपनी अधिनियम 2013 के अंतर्गत रजिस्टर करवाना होगा।

कंपनी के रूप में स्टार्टअप का रजिस्ट्रेशन :

इसके लिए आप आपको मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स की वेबसाइट https://www.mca.gov.in/content/mca/global/en/home.html पर जाकर रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। आपको सभी ज़रूरी डाक्यूमेंट्स और प्रोसेस के बारे में वेबसाइट पर जानकारी मिल जायेगी। इन सभी डाक्यूमेंट्स को पूरा करके आप स्टार्टअप को एक कंपनी के रूप में रजिस्टर कर सकते हैं।

ज़रूरी डाक्यूमेंट्स :

Incorporation/Registration Certificate of your startup (आपके स्टार्टअप का पंजीकरण प्रमाणपत्र)
Proof of funding, if any (फंडिंग का प्रमाण, यदि कोई हो)
Authorisation letter of the authorised representative of the company, LLP or partnership firm (कंपनी, एलएलपी या साझेदारी फर्म के अधिकृत प्रतिनिधि का प्राधिकरण पत्र)
Proof of concept like pitch deck/website link/video (in case of a validation/ early traction/scaling stage startup) (पिच डेक/वेबसाइट लिंक/वीडियो का प्रमाण)
Patent and trademark details, if any (पेटेंट और ट्रेडमार्क विवरण, यदि कोई हो)
List of awards or certificates of recognition, if any (पुरस्कारों या मान्यता प्रमाणपत्रों की सूची, यदि कोई हो)
PAN Number (पैन नंबर)
स्टार्टअप इंडिया के लिए रजिस्ट्रेशन :

प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी का रजिस्ट्रेशन करवाने के बाद आपको स्टार्टअप इंडिया के लिए रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। भारत सरकार भारत में स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए कई सारी सुविधाएँ देती है। इनका लाभ आपको स्टार्टअप इंडिया की वेबसाइट https://www.startupindia.gov.in/ पर रजिस्टर करवाने से मिल जाएगा।

वर्किंग कैपिटल :

अपने बिज़नेस (सोलोप्रेन्योरशिप, पार्टनरशिप या प्राइवेट कंपनी) का रजिस्ट्रेशन और अन्य दैनिक ज़रूरतों के लिए हमें पूंजी की ज़रूरत होती है। आप किस तरह का बिज़नेस कर रही हैं, उसी से आपकी आवश्यक पूंजी निर्धारित होगी। आपको कम से कम अगले एक साल तक के खर्चों का अनुमान लगाकर पूंजी और वर्किंग कैपिटल की व्यवस्था कर लेनी चाहिए।

महिला उद्यमियों के लिए सरकारी योजनाएं

भारत में महिला उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए आज सरकार कई सारी योजनाएं चला रही हैं, जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं –

ओरिएंटल महिला विकास योजना :

इस योजना के अंतर्गत ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स उन महिलाओं को ऋण प्रदान करता है जिनका किसी बिज़नेस में 51% से ज्यादा मालिकाना हक रखती हैं। इस योजना के अंतर्गत महिला उद्यमी को बिना किसी ग्यारेंटर के 10 से 25 लाख तक का लोन दिया जाता है। महिला उद्यमी अपने इस ऋण को 7 साल में चुका सकती है और इन्हें इसके लिए 2% ब्याज की रियायत भी दी जाती है।

उद्योगिनी योजना :

इस योजना के अंतर्गत 18 से 45 साल तक की महिलाओं को 1 लाख रुपये तक का लोन दिया जाता है। ये उन महिलाओं को दिया जाता है, जो व्यापार, कृषि, रिटेल व छोटे उद्यमों में काम कर रही हैं। इसके लिए परिवार की वार्षिक आय 45 हजार से कम होना चाहिए।

अन्नपूर्णा योजना :

यह योजना उन महिला उद्यमियों को दिया जाता है, जो पैकेज्ड फूड और फूड कैटरिंग इंडस्ट्री में काम करती हैं। इसमें स्टेट बैंक ऑफ मैसूर 50 हजार तक का लोन देती है, जिसे 36 महीनों की मासिक किस्त में जमा किया जाता है। यह लोन बिज़नेस की प्राथमिक ज़रूरतों को पूरा करने के लिए दिया जाता है।

महिला उद्यम निधि योजना :

यह योजना पंजाब नेशनल बैंक द्वारा संचालित की जा रही है। इसके तहत लघु उद्योगों में शामिल महिला उद्यमियों को अधिकतम 10 लाख रुपये तक का ऋण दिया जाता है और इस लोन को 10 साल की अवधि में चुकाया जा सकता है।

आज के समय में ऐसी कई महिला उद्यमी हैं, बिज़नेस वर्ल्ड में जिनके नाम का डंका बज रहा है जैसे इंदिरा नूयी, nykaa की फाउंडर फाल्गुनी नायर। यदि आप भी अपना खुद का बिज़नेस शुरू करना चाहती हैं, तो यह आर्टिकल आपके बहुत काम आएगा।

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क्या आप जानते हैं, बिज़नेस को सफल बनाने के लिए Production Plan क्यों जरूरी है?
12/07/2023

क्या आप जानते हैं, बिज़नेस को सफल बनाने के लिए Production Plan क्यों जरूरी है?

दादा ने साइकिल से बेचा सामान, पोते ने खड़ी कर दी 1,600 करोड़ से ज्यादा की कंपनी, जानें ऋषि अग्रवाल की प्रेरक कहानीसफलता ...
14/06/2023

दादा ने साइकिल से बेचा सामान, पोते ने खड़ी कर दी 1,600 करोड़ से ज्यादा की कंपनी, जानें ऋषि अग्रवाल की प्रेरक कहानी
सफलता एक रात में नहीं मिलती इसके पीछे कई वर्षों का कठिन संघर्ष छिपा होता है। इस बात का प्रत्यक्ष उदाहरण हैं JCBL ग्रुप के चेयरमैन ऋषि अग्रवाल। जिन्होंने अपने फैमिली बिजनेस को एक नया आयाम दिया।

दरअसल ऋषि अग्रवाल 1996 में, जब अपने परिवार के छोटे बिज़नेस में शामिल हुए, तो वे केवल छोटी गाड़ियों की बॉडी बना रहे थे। उनके आने के बाद उनके बिज़नेस में एक नए युग की शुरुआत हुई। ऋषि ने कार डीलरशिप, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और बीमा के साथ-साथ छह अलग-अलग मैनुफैक्चरिंग क्षेत्रों में भी बिज़नेस का विस्तार किया है।

आज JCBL का मुख्यालय चंडीगढ़ में है, जिसमें 3000 कर्मचारी और 20 लाख वर्ग फुट में फैली पांच अत्याधुनिक मैनुफैक्चरिंग सुविधाएं हैं। लेकिन अपनी छोटी सी कंपनी को इतनी ज़्यादा सफल बनाना ऋषि के लिए आसान नहीं था। तो आइए जानते हैं उनके जीवन के प्रेरक सफर के बारे में।

ऋषि अग्रवाल के जीवन का सफर
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विरासत में मिला बिज़नेस
मूल रूप से हरियाणा के रहने वाले ऋषि का जन्म मुंबई में हुआ था। उनके पिता और दादा हरियाणा में करनाल के रहने वाले थे। उनके दादा साइकिल से सामान बेचने का काम किया करते थे जिससे पूरे घर का खर्च चलता था। अपने नौ भाई-बहनों में ऋषि के पिता राजिंदर अग्रवाल सबसे छोटे थे। 1989 में, ऋषि के पिता ने कोच बिल्डर्स के नाम से बस और ट्रक बॉडी बनाने का बिज़नेस शुरू किया। जैसे-जैसे पारिवारिक बिज़नेस बढ़ने लगा उन्होंने अपने बिज़नेस का नाम जेसीबीएल ग्रुप कर दिया।

ऋषि ने अपना शुरुआती जीवन करनाल में बिताया। उन्होंने 1987 में कक्षा आठ तक करनाल के सेंट टेरेसा कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ाई की। उसके बाद, उन्हें बिशप कॉटन स्कूल, शिमला में ट्रांसफर कर दिया गया, जहाँ उन्होंने कक्षा 10 तक की पढ़ाई पूरी की। उनके पिता चाहते थे ऋषि खुद से स्वतंत्र होना सीखें।

खुद बनाई अपनी पहचान
ऋषि अग्रवाल ने पिता की बात मानते हुए अपनी पहचान खुद बनाने की ठानी। उनके पिता ने उन्हें आम लोगों की तरह जीना सिखाया। शिमला के बाद, ऋषि मॉडर्न स्कूल, बाराखंभा रोड में पढ़ने के लिए वापस दिल्ली चले गए। यहां, उन्होंने 1991 में कॉमर्स से अपनी कक्षा 12वीं पूरी की।

स्कूल के बाद, उन्होंने 1991-94 में बी.कॉम की डिग्री हासिल करने के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय के खालसा कॉलेज में प्रवेश लिया। फिर से एक हॉस्टल में रहते हुए ऋषि करनाल तक पहुँचने के लिए ट्रेन या बस से यात्रा करते थे।

मिडिया रिपोर्ट्स की माने तो ऋषि बताते हैं, "हॉस्टल में रहकर मैंने अपने पैरों पर खड़ा होना सीखा। कॉलेज लाइफ ने मुझे रिश्तों की अहमियत और दोस्तों के लिए खड़े होने की सीख दी। कॉलेज के बाद, ऋषि ने 1996 में FORE स्कूल ऑफ मैनेजमेंट, दिल्ली से फाइनेंस में MBA पूरा किया।

परिवार के बिज़नेस को बढ़ाया आगे
एमबीए करने के बाद 23 साल की उम्र में ऋषि अपने फैमिली बिज़नेस में शामिल हो गए। पहले उनका परिवार स्वराज मज़्दा के लिए सिर्फ बॉडी बना रहा था लेकिन उन्होंने अपने बिज़नेस को बड़ा करने की ठानी। फैमिली बिज़नेस ज्वाइन करने पर कई लोगों ने उन पर सवाल भी उठाए लेकिन ऋषि ने किसी की नहीं सुनी।

आज ऋषि ने अपनी उपलब्धियों से सभी का मुंह बंद कर दिया है। JCBL समूह अब पांच मुख्य व्यवसाय क्षेत्रों में काम करता है: मैनुफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल डीलरशिप, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और बीमा, प्रत्येक को विभिन्न उप-क्षेत्रों और उद्योगों में विभाजित किया गया है। उनका अपना ब्रांड, JCBL, वाहन बनाता है और टाटा, महिंद्रा, अशोक लेलेंड, भारत बेंज़ और डाइम्लर के लिए एक प्रमुख मूल उपकरण निर्माता भी है। मैन्युफैक्चरिंग डोमेन में, JCBL लक्ज़री और यूटिलिटी वैन से लेकर विशेष रूप से डिज़ाइन की गई एंबुलेंस और सेलिब्रिटी वैनिटी वैन तक, सब कुछ प्रदान करता है।

1600 करोड़ से अधिक की है कंपनी
जेसीबीएल आर्मोरिंग सॉल्यूशंस, उनके व्यवसाय का एक अन्य खंड, बुलेटप्रूफ सैन्य वाहनों, सरकारी आधिकारिक कारों और बुलेटप्रूफ एसयूवी को डिजाइन करते हुए दो दशकों से अधिक समय से आर्मोरिंग सुविधा प्रदान कर रहा है।

2018 में जब JCBL एग्री सॉल्यूशंस अस्तित्व में आया तो सुपर सीडर्स, स्ट्रॉ रीपर और लैंड लेवलर जैसी मशीनों के साथ खेती के तरीकों में भी इन्होंने क्रांति ला दी।

1998 में स्थापित मोबिलिटी सॉल्यूशंस लिमिटेड, दिल्ली मेट्रो, लखनऊ मेट्रो और सिडनी मेट्रो जैसे उल्लेखनीय ग्राहकों के साथ ट्रेनों और मेट्रो के लिए पुर्जे बनाती है। इतना ही नहीं वे वंदे भारत एक्सप्रेस के पुर्जों पर भी काम कर रहे हैं।

MSL-Aura Industrial Systems LLP, 1997 में शुरू हुआ, जिसने दुनिया भर में 200 से अधिक ग्राहकों को सेवा प्रदान की है, माप और नियंत्रण प्रवाह वाल्व और सिस्टम के साथ-साथ OEM तापमान सेंसर का उत्पादन किया है। आज इनकी कंपनी 1600 करोड़ से भी अधिक का टर्नओवर कर रही है।

ऋषि अग्रवाल ने अपनी मेहनत और काबिलयत से सफलता की नई कहानी लिखी है। आज वे लाखों लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं।

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5 ऐसी जॉब्स जिन पर नहीं पड़ेगा AI का असरएक समय था, जब फैक्ट्रियों में हाथों से काम होता था। उसके बाद जब मशीनों की शुरुआत ...
09/06/2023

5 ऐसी जॉब्स जिन पर नहीं पड़ेगा AI का असर

एक समय था, जब फैक्ट्रियों में हाथों से काम होता था। उसके बाद जब मशीनों की शुरुआत हुई, तब इनका बड़े स्तर पर विरोध हुआ, जिसके पीछे कारण बताया गया कि इससे कई लोगों की जॉब चली जायेगी। आज फिर वही दौर शुरू हो रहा है। आज टेक्नोलॉजी ने बहुत ज्यादा तरक्की कर ली है।

आज रोबोट्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एडवांस लेवल पर पहुँच गयी है और इनका इस्तेमाल कई क्षेत्रों में हो रहा है। आज भी कई जॉब्स पर AI के कारण खतरा मंडरा रहा है, लेकिन आज भी कुछ जॉब्स ऐसी हैं, जिन पर AI का पूरी तरह से असर नहीं होगा। जानिये ये जॉब्स कौन सी हैं –

क्या है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)?
एक समय था जब मशीनों में सोचने समझने की शक्ति नहीं होती थी, उस समय किसी ने नहीं सोचा था कि मशीनें खुद से भी कोई काम कर सकती हैं। लेकिन आज मशीनें समस्याओं को एनालाइज़ करके उनका हल भी दे सकती हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के द्वारा मशीनों में कुछ हद तक सोचने समझने और सीखने की क्षमता आ गयी है और इसे समस्याओं को एनालाइज़ करके हल देने के लिए विकसित किया गया है।

जानिये ये जॉब्स कौन सी हैं जिन पर AI का पूरी तरह से असर नहीं होगा -

प्रोफेशनल एथलीट
अभी IPL चल रहा है, जिसमें हर इंसान किसी ना किसी टीम या किसी ना किसी प्लेयर को सपोर्ट कर रहा है। कैसा हो अगर भविष्य में IPL में खिलाड़ी की जगह AI जनरेटेड रोबोट्स खेल रहे हों? जहाँ तक स्पोर्ट्स में AI की बात है, इसका इस्तेमाल खिलाड़ियों की ट्रेनिंग को इम्प्रूव करने के लिए किया जा सकता है लेकिन AI कभी भी खिलाड़ियों को रिप्लेस नहीं कर सकता।

सिंगर्स
आज के समय में AI के इस्तेमाल से लिरिक्स लिखे जा सकते हैं और उसकी धुन भी बनाई जा सकती है, यहाँ तक कि इससे अलग-अलग इंस्ट्रूमेंट भी बजाए जा सकते हैं। लेकिन AI कभी भी सिंगर्स की जगह नहीं ले सकता। जब भी कोई गाना गाया जाता है, तो उसके लिए सिंगर अपने इमोशंस का इस्तेमाल करते हैं। जब आप आने फेवरेट सिंगर को सुनते हैं, तब आपके इमोशंस उसके इमोशंस से कनेक्ट होते हैं और ये जादू AI कभी नहीं कर सकता।

जजेस
हमारे देश में जजेस निर्धारित कानूनों को अपनी समझ के हिसाब से एनालाइज़ करके किसी भी केस में निर्णय देते हैं। लेकिन अगर AI रोबोट्स को कोर्ट में जज के रूप में इस्तेमाल किया गया, तो वे प्री डिफाइंड कानूनों को सिर्फ एनालाइज़ कर पाएंगे। लेकिन जजमेंट देने के लिए जजेस अपने पर्सनल एक्सपीरियंस का इस्तेमाल करते हैं, जो कि AI के लिए मुश्किल है।

साइकोलॉजिस्ट और साइकेट्रिस्ट
आज कई कम्पनियां मेन्टल हेल्थ से डील करने के लिए AI बेस्ड रोबोट्स का इस्तेमाल कर रही हैं। लेकिन जब किसी इंसान से इस बारे में बात की जाती है, तो उससे उसकी लाइफ से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातों पर चर्चा की जाती है। साइकोलॉजिस्ट और साइकेट्रिस्ट इस काम के स्पेशलिस्ट होते हैं। ये स्पेशलिस्ट अपने ज्ञान और अनुभव के आधार पर इंसान को हेल्प करने का प्रयास करते हैं, जो AI के लिए मुश्किल है।

कंप्यूटर सिस्टम एनालिस्ट
जहाँ तक AI की बात की जाती है, वो अपने आप में एक कंप्यूटर प्रोग्राम है। AI चाहे जितना भी डेवलप हो जाए, उसके मेंटेनेंस के लिए हमेशा एक सिस्टम एनालिस्ट की ज़रूरत पड़ेगी ही। इसमें AI को मेन्टेन करना, उसे समय-समय पर अपडेट करना और उसमें एरर और बग को डिटेक्ट करके उसका करेक्शन करना शामिल है। इसलिए जैसे-जैसे AI बढ़ता जाएगा, वैसे-वैसे कंप्यूटर सिस्टम एनालिस्ट की जॉब में बढ़ोतरी होती जायेगी।

AI चाहे जितना डेवलप हो जाए, कुछ सेक्टर ऐसे हैं, जिसमें इंसानों के इमोशंस, उनकी समझ और उनके अनुभव की ज़रूरत पड़ेगी ही, इसलिए ऊपर बताई गयी इन सभी जॉब्स पर कभी भी AI का खतरा नहीं होगा।

आपको हमारा यह आर्टिकल कैसा लगा, हमें कमेंट करके ज़रूर बताएं। इसके अलावा यदि आपने 12वीं पास कर ली है और आप बिलेनियर प्रोफेसरों के अनुभव और ज्ञान से सीखना चाहते हैं, तो आपको डॉ. विवेक बिंद्रा के हाल ही में लॉन्च किए गए Billionaire's Blueprint प्रोग्राम का चुनाव ज़रूर करना चाहिए। इस प्रोग्राम की मदद से आप एक उचित मूल्य पर एंटरप्रेन्योरशिप से जुड़ी पूरी जानकारी और प्रशिक्षण प्राप्त कर सफलता की ओर अपने कदम बढ़ा सकते हैं। इस प्रोग्राम के बारे में और अधिक जानने के लिए संपर्क करें।

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इन 5 एनर्जी मैनेजमेंट तकनीक से ऑफिस में बढ़ाएं अपनी प्रोडक्टिविटी|अपने आस-पास अगर ध्यान से देखें तो अधिकांश लोग हर पल हा...
07/06/2023

इन 5 एनर्जी मैनेजमेंट तकनीक से ऑफिस में बढ़ाएं अपनी प्रोडक्टिविटी|

अपने आस-पास अगर ध्यान से देखें तो अधिकांश लोग हर पल हारे-थके चिड़चिड़े से नज़र आते हैं। एक्सपर्ट्स की माने तो इसके कई कारण हो सकते हैं लेकिन आज के इस सोशल मीडिया युग में इसका सबसे प्रमुख कारण है घंटों का स्क्रीन वॉच टाईम होना। इसी के चलते ऑफिस में सुबह से लेकर शाम तक एक अलग सी सुस्ती देखने को मिलती है जिसके कारण लोग अपने काम पर फोकस नहीं कर पाते, साथ ही ऐसा लगता है जैसे की वो नींद में हैं।

इसका असर प्रोडक्टिविटी में साफतौर पर देखने को मिलता है। ऐसे में अगर आप भी अपने आप में कुछ बदलाव महसूस कर रहे हैं तो आज का यह लेख आपके लिए ही है। आज हम आपको 5 एनर्जी मैनेजमेंट तकनीक बताएंगे जिनकी मदद से आप अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाकर ऑफिस में अपनी एक अलग छाप छोड़ सकते हैं।

तो आइए जानते हैं क्या हैं एनर्जी मैनेजमेंट के वह टिप्स।

पर्याप्त नींद लें
एक्सपर्ट्स की माने तो आज के समय में सुस्ती का सबसे बड़ा कारण है देर रात तक मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना। आज के समय में रील्स और शॉर्ट वीडियो देखते वक्त कब तक हम जगे रहते हैं, यह हमें पता ही नहीं चलता जिसके कारण देर रात तक लोग जगे रहते हैं और सुबह ऑफिस में देरी के कारण जल्दी में उठते हैं। नींद पूरी नहीं होती है और परिणामस्वरूप व्यक्ति के स्वभाव में चिड़चिड़े होने के लक्षण दिखने लगते हैं। इससे बचने के लिए सुनिश्चित करें की 7 से 9 घंटे की नींद जरूर लें जिससे नए दिन की शुरूआत अच्छे से हो।

एक अनुकूल वर्क स्पेस बनाएं
अपनी प्रोडक्टिविटी को बढ़ाने के लिए अपने वर्कस्पेस को कुछ इस तरह डिजाइन करें जहां उचित प्रकाश हो, बैठने के लिए आरामदायक कुर्सी हो और आस-पास खुशनुमा माहौल हो। इससे आप पूरे फोकस के साथ अपना काम बिना किसी अवरोध के आसानी से पूरा कर सकें।

नियमित ब्रेक लें
लगातार लंबे समय तक काम करने से मानव शरीर थक जाता है जिससे बचने के लिए एक अंतराल के बाद ब्रेक लेना चाहिए। थकान को दूर करने और ब्लड फ्लो बढ़ाने के लिए खड़े हो कर अपने शरीर को स्ट्रेच कर सकते हैं थोड़ा सा घूम सकते ।हैं इससे शरीर में एक नई उर्जा का संचार होता है। यहां एक बात का ध्यान रखें कि यह ब्रेक लंच ब्रेक या टी ब्रेक जैसे लंबे ना होने लगे।

संतुलित भोजन करें
एक अच्छा भोजन ऊर्जा के स्तर के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लंच के दौरान भारी भोजन करने से सुस्ती फैलती है और नींद भी आती है जिससे बार-बार उबासी आना भी स्वभाविक है। इससे बचने के लिए भारी भोजन के बजाय हल्का भोजन करें। साथ ही इस बात का ध्यान रखें कि भोजन में सभी जरूरी पोशक तत्व हों। इसके लिए किसी डायटीशियन से संपर्क करना काफी मददगार होगा। इसके साथ ही सही मात्रा में नियमित रूप से पानी भी पीते रहें जिससे शरीर हाइड्रेट रहे।

जरूरी कामों की लिस्ट बनाएं और टाईम मैनेज करें
अपने ऑफिस के जरूरी प्रोजेक्ट्स की एक लिस्ट बनाएं और जरूरत के हिसाब से उस काम को खत्म करने की समय सीमा तय करें और उस काम को प्राथमिकता दें। इससे आप अपने काम के प्रति ज्यादा फोकस कर पाएंगे। टाईम मैनेजमेंट तकनीकों का इस्तेमाल करें जिससे सही समय पर काम खत्म भी हो और बीच-बीच में आप ब्रेक भी ले सकें। साथ ही साथ एक बार ज्यादा प्रोजेक्ट्स पर एक साथ काम ना करें इससे प्रोडक्टिविटी पर काफी नकारात्मक असर पड़ सकता है।

इन 5 बातों का ध्यान रखकर आप एनर्जी मैनेजमेंट करते हुए अपनी प्रोडक्टिविटी को बढ़ा सकते हैं और अपनी एक अलग पहचान बना सकते हैं। लेख के बारे में आप अपनी राय कमेंट सेक्शन में दर्ज करा सकते हैं।

इसके अलावा अगर आप स्टूडेंट हैं, खुद का कोई बिजनेस शुरू करना चाहते हैं या बिजनेस कर रहे हैं या आप किसी भी प्रकार से कमाई करना चाहते हैं, तो आपको बिज़नेस कोच डॉ विवेक बिंद्रा के Free "Anybody Can Earn" वेबिनार का हिस्सा ज़रूर बनना चाहिए।

चाहते हैं अपनी पर्सनल ग्रोथ, ये 5 टेक्निक आएँगी आपके कामप्रेरणा और मन पर नियंत्रण चाहते हैं अपनी पर्सनल ग्रोथ, ये 5 टेक्...
06/06/2023

चाहते हैं अपनी पर्सनल ग्रोथ, ये 5 टेक्निक आएँगी आपके काम
प्रेरणा और मन पर नियंत्रण
चाहते हैं अपनी पर्सनल ग्रोथ, ये 5 टेक्निक आएँगी आपके काम
हम जीवन में कामयाब होने के लिए दिन रात एक कर देते हैं। हमारी हर समय यही कोशिश होती है कि हमारी ग्रोथ लगातार होती रहे और हम लगातार सफलता की सीढ़ियां चढ़ते रहें। हर इंसान इसके लिए अपने स्तर पर कोई ना कोई प्रयास करता रहता है। कई लोग सफल हो भी जाते हैं, लेकिन कई लोगों के हाथों से सफलता रेत की तरह फिसल जाती है।

अद्भुत व्यक्तिगत विकास के लिए 5 आदतें
सफल होने के लिए पर्सनल ग्रोथ होना ज़रूरी है। कुछ ऐसी टेक्निक्स होती हैं, जिन्हें अपना लिया जाए तो हम सफलता की सीढ़ियां चढ़ते जाएंगे। जानिये ऐसी ही कुछ 5 टेक्निक्स के बारे में

सही गोल निर्धारित करना :
हम जितने भी सफल लोगों को देखते हैं, वे हमेशा एक गोल तय करके उसके हिसाब से ही काम करते हैं। आप जब भी अपने लिए कोई गोल तय करें, उसे कुछ कसौटियों पर परखना ज़रूरी है। हमारा गोल ऐसा होना चाहिए, जिसकी सफलता को हम समय-समय पर माप सकें। यह गोल रिलेवेंट भी होना चाहिए, जैसे हम किसी और को देखकर अपना गोल सेट ना करें। बाद में इस गोल की समीक्षा भी करनी चाहिए कि क्या हम सही गोल की तरफ हैं या इसे पूरे करने के लिए हम सही तरीके अपना रहे हैं या नहीं।

खुद को एनालाइज़ करना :
हमें हमेशा खुद को एनालाइज़ करते रहना चाहिए। इसके लिए आप खुद से सवाल करिये जैसे आप जो कर रहे हैं वो क्यों कर रहे हैं, क्या आपको उससे ख़ुशी मिल रही है, आप आगे क्या करना चाहते है, क्या उसके लिए कुछ नई स्किल्स सीखने की ज़रूरत है? जब आप इन सवालों का जवाब ढूंढ लेते हैं, तो आप अपने जीवन में बहुत बेहतर बन सकते हैं।

नई स्किल डेवलप करना :
किसी भी इंसान की ग्रोथ तभी हो सकती है, जब वो हमेशा कुछ नया सीखता रहे और कोई नई स्किल डेवलप करता रहे। आज का युग ज्ञान का युग है। आपके पास जितनी ज्यादा स्किल्स होंगी, उतना ज्यादा आपकी डिमांड बढ़ेगी और कामयाब होने के आपके चान्सेस बढ़ते जाएंगे।

आज आपके पास नई स्किल सीखने के लिए कई सारे सोर्सेस मौजूद हैं। यदि आपने 12वीं पास कर ली है और आप Entrepreneurship Course करना चाहते हैं, तो आपको Billionaire's Blueprint प्रोग्राम का चुनाव ज़रूर करना चाहिए। इसमें आप उचित मूल्य पर एंटरप्रेन्योरशिप से जुड़ी पूरी जानकारी और प्रशिक्षण प्राप्त कर GLA University से मान्यता प्राप्त डिप्लोमा सर्टिफिकेट प्राप्त कर सकते हैं।

गैर ज़रूरी आदतों को छोड़ना :
जब हम अपने जीवन में कामयाब होने के लिए कोई गोल तय कर लेते हैं, तो उसके लिए हमें कुछ नई आदतें अपनानी पड़ती हैं और कुछ पुरानी आदतों को छोड़ना पड़ता है। लेकिन अक्सर इस प्रोसेस में प्रॉब्लम आती है, इसका तरीका जेम्स क्लियर ने अपनी बुक ‘द एटॉमिक हैबिट’ में बताया है। इसके लिए आप अपनी बड़ी आदत को हिस्सों में बाँट लीजिये और उन छोटे-छोटे हिस्सों को अपनाना या छोड़ना शुरू कीजिये। कुछ दिनों बाद आप देखेंगे कि आप अपनी आदतों को पूरी तरह से बदल चुके होंगे।

पॉजिटिव एटीट्यूड अपनाना :
किसी भी इंसान की कामयाबी या नाकामयाबी के लिए उसका एटीट्यूड बहुत ज़रूरी होता है। यदि आप कामयाब होना चाहते हैं, तो आपको अपना पॉजिटिव एटीट्यूड रखना होगा। इसके लिए पहले आपको अच्छे लोगों को सुनना और पढ़ना होगा। कहा भी जाता है कि आप जैसे लोगों की संगत करते हैं, आप वैसे ही बन जाते हैं।

यदि आप ग्रोथ करना चाहते हैं और जीवन में सफलता की सीढ़ियां चढ़ना चाहते हैं, तो ये 5 टेक्निक आपके बड़े काम आ सकती हैं।

आपको हमारा यह आर्टिकल कैसा लगा और आप इनमें से कौन सी टेक्निक तुरंत अपनाने वाले हैं, हमें कमेंट करके ज़रूर बताएं। इसके अलावा अगर आप स्टूडेंट हैं, खुद का कोई बिजनेस शुरू करना चाहते हैं या बिजनेस कर रहे हैं या आप किसी भी प्रकार से कमाई करना चाहते हैं, तो आपको बिज़नेस कोच डॉ विवेक बिंद्रा के Free "Anybody Can Earn" वेबिनार का हिस्सा ज़रूर बनना चाहिए।

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सुहास गोपीनाथ, 14 साल की उम्र में कंपनी बनाने वाले सबसे कम उम्र के सीईओ की प्रेरणात्मक कहानीप्रेरक सुहास गोपीनाथ, 14 साल...
05/06/2023

सुहास गोपीनाथ, 14 साल की उम्र में कंपनी बनाने वाले सबसे कम उम्र के सीईओ की प्रेरणात्मक कहानी
प्रेरक
सुहास गोपीनाथ, 14 साल की उम्र में कंपनी बनाने वाले सबसे कम उम्र के सीईओ की प्रेरणात्मक कहानी

कहते हैं कि पूत के पाँव पालने में ही दिख जाते हैं, ऐसी ही कहानी है बैंगलोर के सुहास गोपीनाथ की।

सुहास को अपने स्कूल टाइम से ही कंप्यूटर में रूचि जगी। कंप्यूटर ना होने की वजह से वे कंप्यूटर नहीं सीख पा रहे थे, तब उन्होंने इसका भी रास्ता निकाल लिया और कंप्यूटर सीख गए। जब वे 13 साल के हुए, तो अपनी कंपनी स्टार्ट करना चाहते थे, लेकिन वे 18 साल के नहीं हुए थे, इसलिए भारत का कानून उन्हें कंपनी शुरू करने की इजाजत नहीं दे रहा था, तब उन्होंने अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया में ग्लोबल इनकॉर्पोरेशन की स्थापना की और वे सबसे कम उम्र के सीईओ बन गए।

जानिये सुहास गोपीनाथ की संघर्ष से सफलता तक की कहानी
नाम: सुहास गोपीनाथ
जन्म: 4 नवंबर 1986, बैंगलोर
पिता: एमआर गोपीनाथ, रक्षा वैज्ञानिक
माता: कला गोपीनाथ
शिक्षा: रमैया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, बैंगलोर से इंजीनियरिंग
कंपनी: ग्लोबल इनकॉर्पोरेशन
स्थापित: 1 अगस्त 2000, कैलिफोर्निया
कौन है सुहास गोपीनाथ?
सुहास का जन्म 4 नवंबर 1986 को बैंगलोर में हुआ था। उनके पिता एमआर गोपीनाथ भारतीय सेना में रक्षा वैज्ञानिक हैं और उनकी माता कला गोपीनाथ एक गृहिणी हैं। सुहास की स्कूली शिक्षा बैंगलोर के वायु सेना स्कूल से हुई। उन्हें बचपन में जीव जंतु और वेटरनरी साइंस में इंटरेस्ट था। उस समय भारत में कंप्यूटर का चलन शुरू ही हुआ था। स्कूल में सुहास के दोस्त कंप्यूटर की बात किया करते थे, तब उनके मन में कंप्यूटर को लेकर जिज्ञासा उत्पन्न हुई। उनके घर पर कंप्यूटर नहीं था, तब उन्होंने कैफ़े जाकर कंप्यूटर सीखा।

ऐसे हुई कंपनी की स्थापना
जब वे कैफ़े पर जाने लगे, तो उनके पास इसके लिए पैसे नहीं थे, तब उन्होंने कैफ़े से एक डील की। उन्होंने कंप्यूटर सीखने के बदले रोज़ाना 1 बजे से 4 बजे तक कैफ़े खोलने और चलाने की जिम्मेदारी ली। अब सुहास कैफ़े पर मन लगाकर कंप्यूटर और वेबसाइट बनाना सीखने लगे, वे धीरे-धीरे कामयाब भी होने लगे। उन्होंने वेब डिज़ाइनर के रूप में अपना रजिस्ट्रेशन करवाया। जब वे वेबसाइट बनाना सीख गए, तब उनके पास कोई रेफरन्स नहीं था इसलिए उन्होंने क्लाइंट के लिए पहली वेबसाइट फ्री में बनाई।

उसके बाद उनके पास और भी क्लाइंट्स की वेबसाइट्स बनाने का काम आने लगा, जिससे उनके पास 100 डॉलर जमा हो गए। जब वे नौवीं कक्षा में थे, तब उन्होंने अपनी कमाई से कंप्यूटर और इंटरनेट कनेक्शन लिया। जल्द ही उनके काम की तारीफ सब जगह होने लगी। वर्ष 2000 में जब वे 13 साल के थे, तब उन्होंने खुद की कंपनी स्थापित करने का फैसला लिया। क्योंकि उनकी उम्र 18 साल से कम थी, इसलिए वे भारत में कम्पनी स्थापित नहीं कर सकते थे। तब उन्होंने अगस्त 2000 में अमेरिका के कलिफोर्निया में अपने एक अमेरिकी दोस्त के साथ मिलकर ग्लोबल इनकॉर्पोरेशन की स्थापना की।

कैसा रहा ग्लोबल इनकॉर्पोरेशन का सफर?
अमेरिका में कंपनी रजिस्ट्रेशन के लिए मात्र 15 मिनट लगते हैं और वहां उम्र का कोई बंधन नहीं है इसलिए सुहास ने अमेरिका में ग्लोबल इनकॉर्पोरेशन को रजिस्टर किया। इसी के साथ वे सबसे कम उम्र के सीईओ बन गए। इनकी कंपनी वेब और मोबाइल सॉल्यूशन और उससे जुड़ी रिसर्च करके डाटा उपलब्ध करवाती है। पहले साल में कंपनी का टर्नओवर 1 लाख और दूसरे साल में 5 लाख का रहा। 2005 में जब सुहास 18 साल के हो गए, तब उन्होंने दिसंबर 2005 में बैंगलोर में कंपनी का रजिस्ट्रेशन करवाया। आज इस कंपनी की ब्रांचेस ब्रिटेन, स्पेन, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया जैसे कई देशों में हैं और सुहास के नेतृत्व में यह कंपनी एक मल्टी नेशनल कंपनी बन गयी है।

पुरस्कार और पद
2007 में सुहास को यूरोपियन पार्लियामेंट ने यंग अचीवर अवार्ड से सम्मानित किया। 2008 में जब वे अपनी इंजीनियरिंग के पांचवे सेमेस्टर में थे, तब उन्हें वर्ल्ड बैंक ने अपनी बोर्ड मीटिंग में आमंत्रित किया था। 2008-09 में ही वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम ने सुहास को यंग ग्लोबल लीडर पुरस्कार से सम्मानित किया।

सुहास ने अपनी कड़ी मेहनत से ना सिर्फ वेब डिजाइनिंग जैसी नई स्किल को सीखा, बल्कि इसमें अपनी मल्टी नेशनल कंपनी भी स्थापित की। आज सुहास हर उस युवा के लिए प्रेरणा बन चुके हैं जो अपना खुद का बिज़नेस शुरू करना चाहते हैं। ऐसे युवाओं को सुहास से सीखना चाहिए कि हमारे मन में यदि कुछ बड़ा करने का सपना हो तो हम किसी भी परेशानी को अपने अवसर में बदल सकते हैं।

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