01/06/2012
वित्त वर्ष 2011-12 में देश की आर्थिक विकास दर घटकर 6.5 फीसदी रह गई, जो पिछले 9 साल में सबसे कम है। यह आंकड़ा सरकार के अग्रिम अनुमान 6.9 फीसदी से कम है। चिंता की बात यह है कि वैश्विक मंदी के दौरान भी यह आंकड़ा 6.7 फीसदी था। वित्त वर्ष 2003-04 के बाद यह सबसे कम है। आर्थिक विकास दर में आई गिरावट के लिए विनिर्माण क्षेत्र और उच्च ब्याज दरों से परेशान सेवा क्षेत्र के खराब प्रदर्शन, पर्यावरण संबंधी विवाद, भूमि अधिग्रहण समस्याएं और वैश्विक अर्थव्यवस्था के अनिश्चित हालात जिम्मेदार हैं।
पिछले वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की विकास दर पिछली 32 तिमाहियों के निम्नतम स्तर 5.3 फीसदी पर लुढ़क गई। जनवरी-मार्च तिमाही में खनन क्षेत्र ने 4.3 फीसदी दर से विकास किया जबकि पिछली तीन तिमाहियों से यह घट रही थी। इस दौरान विनिर्माण क्षेत्र की विकास दर महज 0.3 फीसदी रही, जो तीसरी तिमाही में 0.6 फीसदी थी। भूमि अधिग्रहण और उच्च ब्याज दरों के कारण निर्माण क्षेत्र की विकास दर भी तिमाही आधार पर घटकर 4.8 फीसदी रह गई, जो तीसरी तिमाही में 6.6 फीसदी थी। चौथी तिमाही में व्यापार, होटल, परिवहन और संचार क्षेत्र की विकास रफ्तार भी घटकर 7 फीसदी रही, जो तीसरी तिमाही में 10 फीसदी दर्ज की गई थी। कृषि क्षेत्र की विकास दर घटकर 1.4 फीसदी रही, जो पिछले वित्त वर्ष की तिमाहियों में निम्नतम है। वित्त वर्ष 2009-10 और 2010-11 में अर्थव्यवस्था ने 8.4 फीसदी की दर से विकास किया था। लेकिन इन बुरी खबरों के बीच कुछ अच्छे संकेत भी हैं। मसलन निवेश में बढ़ोतरी। चौथी तिमाही में सकल स्थायी पूंजी निर्माण की विकास दर 3.6 फीसदी रही, जो तीसरी तिमाही में 0.32 फीसदी थी। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा सालाना मौद्रिक नीति में रीपो दर में 50 आधार अंक की कटौती से वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी को उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष में आर्थिक विकास दर पटरी पर लौट आएगी। चालू वित्त वर्ष में मॉनसून सामान्य रहने का अनुमान जताया गया है। वित्त मंत्री ने कहा, 'इन सभी बातों को देखते हुए मुझे लगता है कि विकास में तेजी आएगी।'
इस दौरान अप्रैल के लिए आठ प्रमुख उद्योगों के आंकड़े जारी हुए। इन उद्योगों ने अप्रैल में महज 2.2 फीसदी की दर से विकास किया जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 4.2 फीसदी था। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन सी रंगराजन ने कहा, 'शुरुआत में आर्थिक विकास दर 6.5 से 7 फीसदी रह सकती है।' विकास दर में गिरावट देखकर उद्योग चैंबरों और कुछ अर्थशास्त्रियों ने रिजर्व बैंक से रीपो दर व नकद आरक्षी अनुपात (सीआरआर) में कटौती की मांग की है। यस बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री शुभदा राव ने कहा, 'हमें उम्मीद है कि रिजर्व बैंक रीपो दर में 50 से 75 आधार अंकों की कटौती और करेगा। इसके साथ ही सीआरआर में 100 आधार अंक कटौती की आस है।'