29/03/2020
कोरोना वायरस तथा वर्तमान महामारी की ज्योतिषी विवेचना.....
वर्तमान में राहु के स्व नाक्षत्रिय तथा शनि के स्वग्रही होकर सूर्य के नक्षत्र में होने से तथा सभी ग्रह राहु केतु के एक ओर होने अर्थात काल सर्प योग चलने के कारण इस महामारी का इतना विकराल रूप देखने को मिल रहा है,,, इस तारतम्य में हम देखेंगे कि अभी शनि तथा सूर्य का नक्षत्र इंटरचेंज है जो कि 30 मार्च को सूर्य के रेवती नक्षत्र में जाने से समाप्त होगा,,इसी प्रकार अब दिनांक 2अप्रैल को चंद्रमा इस कालसर्प से दोष मुक्त हो जाएगा,तब कोई कारगर उपाय या दवा इस के निवारण हेतु चिकित्सको के पास में आ जाने की योग है,तथा मंगल भी अंशो में शनि के बराबर 1 अप्रैल को हो जाएगा जिसके कारण इस बीमारी की तीव्रता 2 अप्रैल के बाद कम होना शुरू हो जायेगी ,,तथा बीमारों की संख्या में अनुपातिक वृद्धि में कमी आने लगेगी,,,शनि मंगल की युति के कारण कई मित्र राष्ट्र मिल कर इस समस्या से निजात पाने के कोई सफल प्रयास कर लेंगे ऐसा योग बनता है,, पर इसी युति के कारण प्रतिस्पर्धा रखने वाले राष्ट्रों में तनाव बढेगा,,इसी प्रकार 6 तथा 7 अप्रैल को उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र आने के बाद इस समस्या से बहुत कुछ निजात मिलने लगेगी,,,, इसी प्रकार 14 ,04 को सूर्य के मेष राशि मे प्रवेश तथा अश्विनी नक्षत्र में गोचर से ओर अधिक निजात मिलेगी ,ततः पश्चात 24 अप्रैल2020, को राहु मंगल के नक्षत्र में जाने से , तथा 12 मई को शनि वक्रीय होने से इस समस्या का लगभग सम्पूर्ण समाधान होने का योग बन जायेगा,,, अतः अगले सप्ताह इस समस्या के निवारण में बहुत गति मिल जावेगी,,,,चुकी यह बीमारी राहु शनि जनित है अतः दवाओं के साथ श्रद्धा पूर्वक हनुमानजी का बजरंग बाण तथा बीज मंत्र सूर्य का बीज मंत्र,ओर सरस्वती के बीज मंत्र पड़ने से तथा रक्तबीज नाशक महाकाली के स्त्रोत पड़ने से व्यक्तिगत तथा वैश्विक शांति मिलेगी,,, वर्तमान में ,(मृत )तथा तामसिक आहार व्यवहार कतई नही करना चाहिए ,,,अर्थात मांस मदिरा सिगरेट चमड़े की वस्तु काले नीले वस्त्र व्यवहार में ना लेवे,,, सात्विक फलहारी भोजन करे सभी जीवो पर करुणा भाव रखें शांत स्थानों पर एकांत आदि में श्रद्धा पूर्वक इष्ट का स्मरण करें,,,