Astrology and Vastu by T N Jain

Astrology and Vastu by T N Jain हम ज्योतिष वास्तु, तंत्र एंव अनुष्ठान की सेवाए उपलब्ध कराते है

12/04/2021

वर्तमान में जो ये कोरोना की द्वित्तीय लहर का कहर है इसकी दिनाक 18 04 2021 तक तीव्रता अधिक रहेगी उसके बाद इसकी तीव्रता कम होती जाएगी रक्त से सम्बंध बना कर इस बीमारी के इलाज में गति बढ़ेगी,,13/14 मई के बाद इसकी तीव्रता में ओर अधिक कमी हो जावेगी मई माह के मध्य से लेकर अंत बहुत कुछ पॉजिटिव रिलीफ होनेके योग है,,,,परन्तु ये बीमारी अभी पुर्णतया समाप्त नही होगी अतः सावधानी बनाये रखिये,,,,

13/09/2020

14,09,2020 से एक सप्ताह में कोरोना के उपचार हेतु कोई उत्तम remedy, vaccine, दवा,आदो आने के योग बनने की प्रबल संभावना, ग्रह स्थिति के कारण बनती है

13/09/2020

सारे ग्रह उत्तम राशियों में आने के कारण एवं स्व क्षेत्रीय होने के कारण से तथा गुरु ग्रह मार्गी होने से भारत का वर्चस्व दुनिया मे बढ़ने के योग बनेंगे ,,,चीन बैकफूट पर जाएगा हमारी छीनी हुई सीमाएं हम फिर से पा लेंगे भगवान आदिनाथ का आशीर्वाद भारत को पुनः मिलेगा

23/08/2020

https://www.rajbharti-astro-vaastu-solutions.org ,,,,,ज्योतिष तथा वास्तु के सटीक परामर्श हेतु यह वेबसाइट विजिट करिए,,,👏🏻👏🏻

16/06/2020

सौर्य मंडल में सूर्य का गोचर राहु की ओर होने से तथा राहु में नक्षत्र की तरफ जाने से विभिन्न क्षेत्रों के चमकते हुए बड़े ,प्रभावशाली नेता ,धर्माधिकारी ,शिक्षाविद वैज्ञानिक एवं कलाकारों के लिए कष्ट कारक एवं घातक समय 1 जुलाई तक रहने की संभावना है तथा ,,राष्ट्रों के बीच मे विवादास्पद स्तिथियाँ बनने का योग भी रहेगा ,,,,21 तथा 22 जून को इस तरह की घटनाओं की तीव्रता अधिक होने के संभावना है,,,कुछ प्राकृतिक आपदाएं भी, बढ़ सकती है,,,,,,

29/03/2020

कोरोना वायरस तथा वर्तमान महामारी की ज्योतिषी विवेचना.....
वर्तमान में राहु के स्व नाक्षत्रिय तथा शनि के स्वग्रही होकर सूर्य के नक्षत्र में होने से तथा सभी ग्रह राहु केतु के एक ओर होने अर्थात काल सर्प योग चलने के कारण इस महामारी का इतना विकराल रूप देखने को मिल रहा है,,, इस तारतम्य में हम देखेंगे कि अभी शनि तथा सूर्य का नक्षत्र इंटरचेंज है जो कि 30 मार्च को सूर्य के रेवती नक्षत्र में जाने से समाप्त होगा,,इसी प्रकार अब दिनांक 2अप्रैल को चंद्रमा इस कालसर्प से दोष मुक्त हो जाएगा,तब कोई कारगर उपाय या दवा इस के निवारण हेतु चिकित्सको के पास में आ जाने की योग है,तथा मंगल भी अंशो में शनि के बराबर 1 अप्रैल को हो जाएगा जिसके कारण इस बीमारी की तीव्रता 2 अप्रैल के बाद कम होना शुरू हो जायेगी ,,तथा बीमारों की संख्या में अनुपातिक वृद्धि में कमी आने लगेगी,,,शनि मंगल की युति के कारण कई मित्र राष्ट्र मिल कर इस समस्या से निजात पाने के कोई सफल प्रयास कर लेंगे ऐसा योग बनता है,, पर इसी युति के कारण प्रतिस्पर्धा रखने वाले राष्ट्रों में तनाव बढेगा,,इसी प्रकार 6 तथा 7 अप्रैल को उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र आने के बाद इस समस्या से बहुत कुछ निजात मिलने लगेगी,,,, इसी प्रकार 14 ,04 को सूर्य के मेष राशि मे प्रवेश तथा अश्विनी नक्षत्र में गोचर से ओर अधिक निजात मिलेगी ,ततः पश्चात 24 अप्रैल2020, को राहु मंगल के नक्षत्र में जाने से , तथा 12 मई को शनि वक्रीय होने से इस समस्या का लगभग सम्पूर्ण समाधान होने का योग बन जायेगा,,, अतः अगले सप्ताह इस समस्या के निवारण में बहुत गति मिल जावेगी,,,,चुकी यह बीमारी राहु शनि जनित है अतः दवाओं के साथ श्रद्धा पूर्वक हनुमानजी का बजरंग बाण तथा बीज मंत्र सूर्य का बीज मंत्र,ओर सरस्वती के बीज मंत्र पड़ने से तथा रक्तबीज नाशक महाकाली के स्त्रोत पड़ने से व्यक्तिगत तथा वैश्विक शांति मिलेगी,,, वर्तमान में ,(मृत )तथा तामसिक आहार व्यवहार कतई नही करना चाहिए ,,,अर्थात मांस मदिरा सिगरेट चमड़े की वस्तु काले नीले वस्त्र व्यवहार में ना लेवे,,, सात्विक फलहारी भोजन करे सभी जीवो पर करुणा भाव रखें शांत स्थानों पर एकांत आदि में श्रद्धा पूर्वक इष्ट का स्मरण करें,,,

23/06/2018

वास्तु एवम आंतरिक साज-सज्जा
विश्व की समस्त संस्कृतियो ने ये माना है कि आंतरिक सज्जा एवम रंग रोगन का प्रभाव मानव मन मस्तिष्क पर बहुत गहराई से पड़ता हैं. हम ये देखते है कि अलग-अलग व्यक्ति को भिन्न भिन्न रंगों के नग वस्त्र,कलर थेरेपी,कलर बाथ,विभिन्न प्रभाव डालते है इसी प्रकार अलग-अलग प्रकार के चित्र जानवरों कि मुर्तिया एवम पोस्टर हर दुसरे व्यक्ति पर आपना प्रभाव अलग रखती है क्युकी हर अलग प्रकार की वस्तु,जानवर,चित्र,रंग,नग,अलग-अलग ग्रह का प्रतिनिधित्व करती है अत अगर हम किसी की जन्म पात्रिका कि सूक्ष्म विवेचना करे तो हम ये जान सकते है की जातक के कोंन से ग्रह उसे उतम परिणाम देते है तथा कोन से ग्रह उसके लिए दुष्प्रभावी है इस प्रकार हम ज्योतिष का प्रयोग वास्तु के सुधार हेतु भी कर सकते है.
हम इसे इस प्रकार समझ सकते है की माना कि किसी जातक का लग्न सिंह है तो इसकी पात्रिका में सूर्य,शुक्र तथा बुध कारक ग्रह कि भूमिका में रहेंगे अत हम उसके वास्तु में गुलाबी,हरा,लाल,गोल्डन रंग करके तथा सूर्य का प्रतिनिधित्व करने वाले शेर या बुध हेतु बकरी या शुक्र हेतु गाय या बैल की मूर्ति या चित्र लगाकर उसके वास्तु का प्रभाव उस व्यक्ति हेतु उतम कर सकते है इसी प्रकार उसकी पात्रिका में मंगल बाधक ग्रह की भूमिका में होता है अत सिंदूरी एवम ताम्ब्र रंग का उपयोग नहीं करना चाहिए तथा ऊंट की मूर्ति चित्र आदि नही लगाना चाहिए
इसी प्रकार हम सभी लग्नो के लिए एवम भिन्न-भिन्न जन्म कुंडलियो के लिये हम बाधक तथा कारक ग्रह निकाल कर जातक को बहुत लाभकारी परिणाम वास्तु द्वारा दिलवा सकते है परन्तु इसके लिए आवश्यक है की उस वास्तुशाष्त्री को ज्योतिष्य का उतम ज्ञान होना चाहिये.इसी प्रकार सूक्ष्म विवेचना करके किसी भी आफिस या मकान में इस प्रकार का वास्तु संयोजन कर सकते है कि उसमे प्रवेश करने वाला कोइ भी ग्राहक या आतिथि पूर्णत भूमिस्वामी,दुकान मालिक के आधीन,या बस में या कब्जे में रहेगा.इसी तरह विशेष फलो के लिये,एक ही वास्तु,परिसर में निवास करने वाले जातको को,उन्ह्की जन्म पत्रिका के अनुसार,उनके कक्षों में भिन्न भिन्न ग्रहों के बल वास्तु उपचार द्वारा कम या ज्यादा करके उनके अभीष्ट को सिध्द किया जा सकता है.इस प्रकार वास्तु एक महत्व पुर्ण विद्या होकर आज के भोतिक संसार हेतु समस्त कामनाए सिध्द करती है...त्रिशला नंदन जैन-9425991420

27/01/2018

अनुष्ठानो का महत्व
हिन्दू संस्कृति मूलत कर्म प्रधान हैं एवम लगभग सभी पुराण,ग्रंथो में यह उल्लेख है की हम जो भी कर्म करेंगे वैसा ही परिणाम में आज नही तो कल यह फिर किसी अन्य जन्म में लौटकर मिलेगा जरुर,इसलिए सदेव ही सत्कर्मो को करते रहेने का आदेश हमारी संस्कृति देती हैं,इसी धर्म बंधन के कारण हमारी संस्कृति को महानतम माना जाता है.
व्यावाहरिक जीवन में यह हम देखते है की मानव अधिक से अधिक उन्नति तथा सुख कम से कम प्रयासों में चाहता है वह सदेव ही स्वयम को प्रसन्न एवम स्वस्थ्य रखना चाहता है तथा स्वयम की प्रगति के लिय लालयीत रहता है वह कभी भी अपनी हानि के लिय पुरुषार्थ नहीं करता फिर भी हम ये देखते है की संसार में असंख्यात लोग,अस्वस्थ्य,अभावग्रस्त,निराश एवम दुखी हैं कई ऐसे भी लोग हैं जिनको कोई कमी नहीं हैं फिर भी वे लोग डिप्रेशन के शिकार हैं हमारी संस्कृति एवम धर्म इस तरह की दुरावस्था को पाप कर्म का उदयकालीन समय कहा गया है तथा पूर्व जन्म में संचित दुष्कर्मो के परिणाम मिलने का समय कहा जाता हैं
हमारे धर्म में इस प्रकार के दुर्समय की पीड़ा समाप्त करने के लिए तथा मनोवांछित परिणाम प्राप्त करने हेतु कई प्रकार की ऐसी व्यवस्था बताई है जिनका पालन करने से हमारा जीवन सरल एवं सुखी हो सके तथा संचित पाप कर्मो के परिणाम कम से कम हो जावे.हमारी संस्कृति सर्वप्रथम तो जातक को अपने दुष्कर्मो की क्षमा पीड़ित से तथा ब्रहमाण से क्षमा मांगने तथा उस दुष्कर्म की पुनरावृत्ति न करने की सलाह देती है तत्पश्चात उस पाप कर्म के शमन हेतु यथा संभव दान करने का प्रावधान बताती है.इस पर भी अगर संचित पाप कर्म समाप्त न हो तो विशेष अनुष्ठान एवं कर्म कांड करने के प्रावधान अपनाए जाते है.
अनुष्ठान तथा कर्मकांड सिर्फ उदय में आने वाले पाप कर्म का ही शमन नहीं करते बल्कि हमारी अभिष्ट इच्छाओ की पूर्ति भी करते है इसे यू समझीये की इसी व्यक्ति को अपने कर्मो के हिसाब से अपने जीवन के अस्सीवे वर्ष की आयु में अकूत सम्पति मिलने का योग है तथा बाकि अस्सी वर्षो तक दरिद्र रहने का योग है तो वह जीवन के अंत समय में सम्पति सुख साधन का क्या लाभ ले पाएगा परन्तु हिन्दू मनीषियों ने अनुष्ठान कर्म,कांड,तंत्र,आदि में ऐसी व्यवस्था की हैं की जातक अपने संचित पुण्यो का फल समय से पहले उदय में ला सकता हैं या जीवन में आगे आने वाले अच्छे परिणाम आज ही उदय में लाकर उतम फल भोग सकता है. इस प्रकार की व्यवस्था या पुरुषार्थ को उदीरणा कहा जाता है. इसी प्रकार आज जो कष्ट पूर्ण परिणाम पाप कर्मो के उदय के कारण अभी मिल रहे हैं उन्हें अनुष्ठान द्वारा भविष्य की और या अगले जन्मो में उदय आने के लिए धकेला जा सकता हैं या पूर्णत समाप्त भी किया जा सकता हैं इस प्रकार इससे यह स्पष्ट होता है की कर्म कांड या अनुष्ठान कर्म के सिध्दांत को नाकारते नहीं है बल्कि सिर्फ उसे आगे पीछे अपनी इच्छानुसार उदय में लाने या शमन करने का मार्ग बतलाते है.
इस प्रकार उपरोक्त लेख से स्पष्ट होता है की अनुष्ठानो द्वारा मानव जीवन को सरल बनाने हेतु हिन्दू ऋषियों द्वारा सुझाए गए सर्वोतम मार्गो में से एक हैं परन्तु यह मार्ग हमे किसी योग्य ज्योतिषी से पूछ कर ही अपनाना चाहिए क्योंकी हमें किस प्रकार का कर्म कांड करना है उसका मूल आधार जन्म पत्रिका देख कर ही निकला जा सकता है.....त्रिशला नंदन जैन 94259 -91420

19/01/2018

ज्योतिष एवम अंक ज्योतिष
ज्योतिष एवं सामुद्रिक शास्त्र के द्वारा हमारे ऋषि मुनियों ने मानव जीवन को भविष्य में झाँकने के लिए नेत्र प्रदान किए हैं जिसके द्वारा मानव ने आपने जीवन को बहेद सरल एवं उन्नति शील बना लिया हैं,इन्ही शास्त्रों पर और अधिक अनुसंधान करके मानव ने कई और शाखाए भविष्य में झांकने तथा भविष्य को सुखी एवं समृद्ध करने हेतु विकसित की हैं,इन्ही अनुसंधानो में एक अनुसंधान मानव जीवन पर अंको के प्रभाव को लेकर किया गया हैं जिसे जन मानस अंक ज्योतिष के रूप में जानते हैं.
अनुसधानो से यह पाया गया हैं की अंक देवीय शक्ति से परिपूर्ण होते हैं तथा यंत्र,मंत्र और उपासना एवं हमारे जीवन में गहरा प्रभाव डालते हैं.ये भी पाया गया अलग अलग ग्रह अलग अलग अंको के स्वामी होते है जैसे-सूर्य १ अंक का,चन्द्र २ अंक का,शानि ८ अंक का स्वामी होता है.इसी प्रकार सभी ग्रहों के प्रभाव में एक कोई भी अंक होता है .इसी प्रकार हमारे मनीषीयो ने अनुसंधान करके यह पाया कि अक्षर जो हम भाषा में उपयोग में लाते हैं उन अक्षरों का भी अंको से गहरा सम्बन्ध होता हैं आर्थात हर अक्षर को एक अंक से सम्बंधित माना जाता हैं ,
देवेग्य तथा अंक ज्योतिष शास्त्री का ये कर्तव्य होता हैं की वे जातक की जन्म पत्रिका देख कर पहिले तो यह निर्णय करे कि जातक को सर्वाधिक लाभ देने वाले ग्रह कोन कोंन से है तदुपरांत वे उसकी जन्म तारीख देख कर उसका मूलांक निकाले एवं देखे की उस मूलांक का स्वामी ग्रह क्या हैं,उसके बाद वे उसके नाम में उपयोग किए हुए अक्षरों को समायोजित कर उन अक्षरों का अंकगणितीय मूल निकाले तथा इसका भी स्वामी ग्रह निकाल ले, इन सब के बाद बारीकी से जाच कर जातक के नाम में उपयोग किए गए अक्षरों में ऐसा बदलाव करे की उन अक्षरों का अंक गणितीय मूलांक वही ग्रह बन जावे जो जातक की जन्म पात्रिका में लाभ,धन,पद,मान,प्रतिष्ठा का स्वामी ग्रह होवे ऐसा करने से जब जब भी उस जातक का नाम पुकारा या लिखा जावेगा तब तब वहा मूलांक एवं मूलांक का स्वामी ग्रह स्पंदित होगा जिससे जातक को बहेद समृद्धशाली परिणाम मिलेंगे इसे हम अंग्रेजी में कहे सकते हैं की ., CHANGE YOUR NAME SPELLING TO IMPROVE YOUR LUCK ,,परन्तु यह कार्य अत्यंत जटिल हैं तथा इसे बहेद सावधानी पूर्वक किया जाना चाहिए इसे करने वाले ज्योतिष को ज्योतिष शास्त्र,अंक ज्योतिष शास्त्र,वास्तु शास्त्र के ज्ञान पर अधिकार होना चाहिए अन्यथा केवल एक शास्त्र के जानकार इस प्रकार के कार्य को कभी भी सही नही कर सकेंगे..आगे भी हम इन्ही विषयो पर आपकी अभिरुचि अनुसार चर्चा करते रहेंगे..आपकी अनुकूलता अनुसार आप हमे सम्पर्क भी कर सकते हैं,,,त्रिशला नंदन जैन ९४२५९९१४२०

16/01/2018

ज्योतिष शास्त्र में देश काल के हुए परिवर्तन के कारण
जैसे की हमने पहिले चर्चा की थी,ज्योतिष शास्त्र की रचना के समय से अब तक हुए काल परिवर्तन के कारण कई प्रकार के बदलाव हुए जिससे भविष्य कथन में भी परिवर्तन आ गए हैं,जैसे की जब ज्योतिष लिखा गया था उस समय नाट्य,संगीत सुनना दुर्लभ था और नाट्य करने वाली स्त्रियों को या अभिनेता आदि को भांड कहा जाता था,तथा समाज में बहुत उत्तम दर्जा प्राप्त नहीं था इसी प्रकार पुरोहित ऋषि मुनि आदि अति सम्मानीय थे परन्तु आज काल परिवर्तन के कारण हम ये देखते हैं कि आज अगर किसी शहर में अभिनेता-अभिनेत्री नर्तकी नौटंकी या फिल्मी कायर्क्रम होता हैं तो लोग भारी भीड़ लगा उनका सम्मान करने, देखने जाते हैं तथा कई बार इतनी अधिक मात्रा में जन मानस नर्तकियों को देखने पहुच जाता हैं की पुलिस बल को लाठी चर्ज करना पड़ता हैं,यहाँ हम देखते है की लोग पुलिस की लाठी खाकर भी नर्तकियो के साथ सेल्फी लेने की कोशिश करते है.वही दुसरी ओर इन्ही लोगो के पास शहर में किसी बड़े सिद्ध पुरुष के पधारने पर आशीर्वाद लेने भी नहीं जाते हैं,न हीं कोई उनके प्रवचन सुनने के लिए समय निकालते है.इसी तरह काल परिवर्तन के कारण ये भी देखा गया है की जन मानस सिर्फ एक शाम को रंगीन बनाने के लिए हजारो,लाखो रुपय खर्च करने को तत्पर रहते है वही दूसरी ओर वे ही लोग किसी देवेज्ञ,ज्योतिष,वास्तुशास्त्री को उनकी फीस देने में कंजूसी करते है आनाकानी करते हें जबकि वे देवेज्ञ या वास्तुशास्त्री उस जातक का पूरा जीवन सुखमय बनाने का प्रयास करता है इस प्रकार कई सारी विसंगतिया काल परिवर्तन के कारण ही है
इस कारण से जिस केरिएर को ज्योतिष रचना के समय उतम माना गया था वे अब उतने सम्मानीय नही रह गए और जिन केर्रिएर को दोयम दर्जे का माना जाता था वे अब आति प्रभावशाली प्रतीत होते है, अत भविष्य कथन में यह काल परिवर्तन ध्यान में रख कर ही ज्योतिष को अपने निर्णय देना चाहिए,,
इसी प्रकार की चर्चाए हम अपनी आगमी लेखो में भी करते रहंगे.....त्रिशला नंदन जैन(9425991420)

08/01/2018

ज्योतिष शास्त्र में देश काल परिस्थिति का महत्व
ज्योतिष एक अत्यंत ही तर्क शील विषय है.इसमें लिखी हुए ज्ञान को बेहद तर्क पूर्ण तरीके से समझना पड़ता है.इसे समझने के लिए बहुत ही विस्तृत नजरिया चाहिए होता है.ज्योतिष में लिखे अनुभव देश काल परिस्थिति के वशीभूत होते है.इन्हें हम निम्न उदाहरण और तर्कों से समझ सकते है
ज्योतिष शास्त्र में छटवा भाव कर्ज एवं रोग को इंगित करता है,ऐसा शास्त्र में उल्लेख है.एवं यहे भी लिखा है की जिस व्यक्ति को छटवे भाव की प्रबल दशा चलती है वहां दुर्भाग्य में डूब कर कर्ज दार हो जाता है.इसे विस्तृत नजरिये से हम आज के काल में समझे तो हम ये पाएँगे जिस काल में ज्योतिष शास्त्र लिखा गया था उस काल में कर्ज लेना,कर्ज मिलना दुर्भाग्य पुर्ण माना जाता था परन्तु हम आज देखते है की ऋण लेने के लिए एक व्यक्ति को ये बतना पड़ता है की उसकी साख कितनी ज्यादा है तथा आयकर की दस्तावेज कितने मजबूत है अर्थात जो जितना बड़ा भाग्यशाली आदमी है वहां उतना ही ज्यादा ऋण प्राप्त कर सकता है इस तरह आज के काल में वहां दुर्भाग्य शाली कैसे हुआ इसी प्रकार हम ये देखते है की करोडो रुपयों का ऋण लिए हुए व्यक्तिओ के यहाँ वे लोग नोकरी करते हुए पाए जाते है जिन पर एक भी रुपय का ऋण नही है इसी प्रकार आप सभी एसे कई घरानो को जानते होंगे जो पीढियों से ऋण लेते जा रहे है और उसे अदा करने की जगह ऋण का भार बढ़ाते ही जा रहे है एवं बेहद आलिशान भरा जीवन पीढियों से व्यतीत कर रहे है तथा कई एसे लोग उनके यहाँ नोकर हैं जिन पर एक भी रूपए का लोन नही है उदाहरण के लिए देश के लगभग सभी उद्योग घरानों को देख लीजिए सभी बड़े उद्योग घराने पीढियों से ऋणीं है तथा सर्वोतम जीवन व्यतीत कर रहे है फिर वे दुर्भाग्य शाली कहाँ हुए, यहाँ काल परिवर्तन के कारण देखा जा रहा हैं कि जो जितना बड़ा कर्ज दार है वे उतना ही बड़ा आदमी माना जाता है उदाहरण के लिए विजय माल्या को ही लीजिए अत हम काल परिवर्तन के कारण ये पाते है की ज्योतिष शास्त्र कि ऋचाओ को इस काल में समझने के लिए बहूत ही विस्तृत सोच चाहिए इसी प्रकार कल हम फिर इसी विषय पर अन्य उदहारण के साथ चर्चा करंगे
त्रिशला नंदन जैन ९४२५९९१४२०

06/01/2018

ज्योतिष में जन्म समय निर्णय का महत्व
एक अत्यंत ही रहस्यमय विषय है,ज्योतिष के द्वारा हम भविष्य में आने वाली घटनाओ का पहिले से पता कर सकते है तथा उन्हें आपने अनुकूल बनाने का प्रयास कर सकते है,इसी तरह हम देखते अच्छे समय या मुहर्त में किये गए कार्य उतम परिणाम देते है,हम इस बात को दुसरे पहलू से समझे तो हम ये पाएंगे के अच्छे समय या मुहर्त में जन्म लेने वाले बालक का सम्पुर्ण जीवन काररीएर,स्वास्थ्य तथा धन,आदि के परिपेक्ष्य में आति उतम होता है.कुछ वर्षो पहेले तक प्रसुती का समय मानव के अधिकार क्षेत्र में नहीं था,क्युकि ओप्रेशन से प्रासुतीया कम होती थी,परन्तु आज के समय में जहाँ ओपरेशन से अधिकांश प्रसुतीया होती है तो हम किसी योग्य ज्योतिष से सर्वोतम जन्म समय निकालवा कर प्रसुती चिकित्सक से उस समय प्रसुती करवाने का अनुरोध कर सकते हैं.ऐसा करने से जातक का जन्म उतम समय पर होगा जिसके कारण उसकी जन्म कुण्डली बहूत उतम होगी तथा उसका पूरा जीवन ईश्वरीय वरदान जैसा व्यतीत होगा तथा जीवन के हर क्षेत्र में आशातीत सफलता प्राप्त करेगा इसी प्रकार प्रसुती के जन्म समय को हम इस तरह भी मेंनेज कर सकते है कि जन्म लेने वाली संतान का कार्रिएर हमारे इच्छा के अनुरूप हो.....उदाहरण के लिए अगर कोई भी आभिभावक चाहते है कि उनकी सन्तान राज्य सरकार में उच्च पद पर कार्य करे तो उन्हें ज्योतिष से ऐसा जन्म समय निकलवाना चाहिए जिसमे अधिकांश ग्रह जन्म पात्रिका में दशम,ग्याहरवे तथा छटवे स्थान पर स्थित हो तथा दशम भाव का उप स्वामी दशवे, ग्याहरवे का सुचक हो.इसी प्रकार हम अलग-अलग काररीएर जैसे-खेल,शिक्षा, अभिनय,चिकित्सा या अन्य कोई भी काररीएर अलग अलग समय निकाल कर आने वाली संतान का उस प्रकार के काररीएर में सरलता से उच्च पद प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त कर सकते है इस हेतु हमे किसी योग्य ज्योतिष से सलाह लेना चाहिए तथा अपनी संतान के लिए उसके जन्म से पहले ही एक सरल एवं सफल जीवन की रूप रेखा तैयार करनी चाहिए इस प्रकार का हमारा पुरुषार्थ हमारा सर्वोतम. उपहार होगा आने वाली संतति के लिए,,,,,, त्रिशला नंदन जैन, 9425991420 ,

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