Mukesh Saxena

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हम सभी को अपने गुरु के उपदेश के अनुसार ही अपना जीवन यापन करना चाहिए, आज इंसान की हालत ऐसी हो गई है कि वह सिर्फ और सिर्फ ...
16/08/2024

हम सभी को अपने गुरु के उपदेश के अनुसार ही अपना जीवन यापन करना चाहिए,
आज इंसान की हालत ऐसी हो गई है कि वह सिर्फ और सिर्फ अपने बारे में सोचता है, जब मंदिर जाता है तो वो भगवान के दर्शन करने नहीं जाता बल्कि अपनी लंबी चौड़ी लिस्ट को पूरा करने के लिए गिड़गिड़ाता है ये भी चाहिए वो भी चाहिए, आज का इंसान कभी की मंदिर जाकर भगवान से उसकी भक्ति नहीं मांगता, उसे बीबी बचे गाड़ी बंगला चाहिए बस !
इसीलिए गुरु नानक साहिब जी महाराज कहते थे
"तेनु मन्गण दी भी लोड़ नहीं तू बस नींवा हो जा" ,
अर्थात वो समझते है कि मनुष्य को चाहिए कि वो फलदार पेड़ की भांति झुका हुआ रहे अपने व्यवहार से आचरण से, ओर सादगी से, कभी किसी धन दौलत का घमंड न करे सबसे प्रेम करे
आगे साहिब फरमाते हैं
"नानक नन्हें हो रहो जैसे नन्ही दूब
और घास जल जाएगी दूब खूब की खूब "
जैसे हम लोग अपनी घासनी में आग लगाते है या सर्दियों में लोग जंगलों में आग लगाते है तो जो भी लंबी घास होती है वो सब जलकर राख हो जाती है लेकिन जो दूब जिसको हम पहाड़ी में जूब बोलते है वो वैसे ही रह जाती है
मतलब बोलने का ये है कि छोटे बनकर रहने से हमारा फायदा ही है इसमें कोई नुकसान नहीं है अगर हमें कुछ आता भी है तो भी औरों से और नया जानना पूछना सीखना चाहिए!
इस पर हमारे सद्गुरु साहिब वक्त गुरु महाराज जी फरमाते है
"पानी ऊंचे न टीके नीचे ही ठहराए
नीचा पानी भर पिए ऊंचा प्यासा जाए "

इसलिए सभी को अपने अंदर के मैं को त्याग कर गुरु की शरण कबूल करनी चाहिए वो ही हमें समझा सकते है कि हमारा आने का असली मकसद क्या है और हमें क्या करना चाहिए 🙏

समाज में अवधारणा है कि सिर्फ औलाद ही कपूत होती  है कुछ मां बाप भी  एक बच्चे के मोह में आके दूसरे बच्चे के लिए धृतराष्ट्र...
22/07/2024

समाज में अवधारणा है कि सिर्फ औलाद ही कपूत होती है
कुछ मां बाप भी एक बच्चे के मोह में आके दूसरे बच्चे के लिए धृतराष्ट्र की तरह अंधे हो जाते है !!
(कड़वा है पर सत्य है)

🪷🪷🪷 *अनुभव* 🪷🪷🪷एक विशाल जहाज का इंजन खराब हो गया। लाख कोशिशों के बावजूद कोई इंजीनियर उसे ठीक नहीं कर सका। फिर किसी ने एक...
30/06/2024

🪷🪷🪷 *अनुभव* 🪷🪷🪷
एक विशाल जहाज का इंजन खराब हो गया। लाख कोशिशों के बावजूद कोई इंजीनियर उसे ठीक नहीं कर सका। फिर किसी ने एक मैकेनिकल इंजीनियर का नाम सुझाया जिसे इस तरह के काम का 30 से अधिक वर्षों का अनुभव था। उसे बुलाया गया। इंजीनियर ने वहां पहुंचकर इंजन का ऊपर से नीचे तक बहुत ध्यान से निरीक्षण किया। सब कुछ देखने के बाद इंजीनियर ने अपना बैग उतारा और उसमें से एक छोटा सा हथौड़ा निकाला। फिर उसने इंजन पर एक जगह हथोड़े से धीरे से खटखटाया। और कहा कि अब इंजन चालू करके देखें। और सब हैरान रह गए जब इंजन फिर से चालू हो गया। इंजन ठीक करके इंजीनियर चला गया। जहाज के मालिक ने जब इंजीनियर से जहाज की मरम्मत करने की फीस पूछी, तो इंजीनियर ने कहा- 20,000 डॉलर।

क्या?! मालिक चौंका। "आपने लगभग कुछ नहीं किया। मेरे आदमियों ने मुझे बताया था कि तुमने एक हथोड़े से इंजन पर सिर्फ थोड़ा सा खटखटाया था। इतने छोटे काम के लिए इतनी फीस? आप हमें एक विस्तृत बिल बनाकर दें।"

इंजीनियर ने बिल बनाकर दे दिया। उसमें लिखा था:
हथौड़े से खटखटाया: $2

कहां और कितना खटखटाना है: $19,998

फिर इंजीनियर ने जहाज के मालिक से कहा - अगर मैं किसी काम को 30 मिनट में कर देता हूं तो इसलिए कि मैंने 30 साल यह सीखने में लगा दिए कि उसे 30 मिनट में कैसे किया जाता है।
मैंने आपको 30 मिनट नहीं दिए, इतने समय में मेरे 30 वर्षों का अनुभव दिया है। फीस कितना समय लगा उसकी नहीं मेरे अनुभव की है। जहाज का मालिक बहुत शर्मिंदा हुआ और उसने ख़ुशी ख़ुशी इंजीनियर को उसकी फीस दे दी।

तो किसी की विशेषज्ञता और अनुभव की सराहना करें... क्योंकि ये उनके वर्षों के संघर्ष, प्रयोग, मेहनत और आंसुओं का परिणाम हैं !
हम अपनी दिनचर्या में ऐसा वाक्या कभी कबीर देख लिया करते हैं जब लोग पैसा देने से पहले आनाकानी करते हैं ! ये कहानी उन्हें ज़रूर पढ़नी चाहिए!

21/04/2024

अपने ही जानते है रग कौन सी दबानी है
वरना ग़ैरो को क्या पता है दर्द कहाँ से उभरेंगा !

…..✍🏻मुकेश सक्सेना🙏🏻

मेरे दो अनमोल रतन 🤩
21/04/2024

मेरे दो अनमोल रतन 🤩

18/04/2024
18/04/2024

"इतना भी नहीं कि खुद के वफादार होने की शेखी मारता फिरूँ !
मुझे यकीन है जो खोएगा वो ढूंढता फिरेगा !!"

✍️मुकेश सक्सेना 🙏

वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि चींटियाँ सर्दियों के लिए आवश्यक अनाज और बीज इकट्ठा करने के बाद उन बीजों को अपने घोंसलों म...
12/04/2024

वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि चींटियाँ सर्दियों के लिए आवश्यक अनाज और बीज इकट्ठा करने के बाद उन बीजों को अपने घोंसलों में जमा करने से पहले आधा कर देती हैं क्योंकि आधा तोड़ने से वे बारिश और सबसे सही अंकुरण स्थितियों के बावजूद अंकुरित नहीं हो पाते हैं। लेकिन वैज्ञानिक तब दंग रह गए जब उन्होंने पाया कि चींटियों के घोंसलों में रखे धनिया के बीज 2 टुकड़ों की बजाय 4 टुकड़ों में टूट गए थे! प्रयोगशाला अनुसंधान के बाद, वैज्ञानिकों ने पाया कि धनिया का बीज दो भागों में विभाजित होने के बाद भी अंकुरित हो जाता है, लेकिन चार भागों में विभाजित होने के बाद यह अंकुरित नहीं होगा! तो ये छोटे छोटे जीव यह सब कैसे जानते हैं?
मनुष्य बहुत कम जानता है, दूसरे जीवों से सीखने के लिए बहुत कुछ है✍️✍️
हे प्रभु ! तेरी रची माया तू ही जाने !

12/03/2024

“तिस को राखे अपने पास!
जिस को भावे कुटुंब विनास !!”

यहाँ कवि परमात्मा से प्रार्थना करता हुआ कहता है कि जिस मनुष्य को अपने कुल परिवार से ही वैर पैदा हो जाए उस मनुष्य को अपने पास ही रखना ! अर्थात् जो अपने ही खुन के रिश्तों के खुन का प्यासा बन जाए उस मनुष्य की विशेष देखरेख करें ! क्योंकि ऐसा मनुष्य मनोरोगी होता है जिस कारण उसे सही ग़लत में अन्तर नहीं जान पड़ता ऐसे लोगों को ही आपकी कृपा की ज़्यादा ज़रूरत होती है यहाँ अपने पास रखने से यही तात्पर्य था !
✍🏻 मुकेश सक्सेना 🙏🏻

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