16/08/2024
हम सभी को अपने गुरु के उपदेश के अनुसार ही अपना जीवन यापन करना चाहिए,
आज इंसान की हालत ऐसी हो गई है कि वह सिर्फ और सिर्फ अपने बारे में सोचता है, जब मंदिर जाता है तो वो भगवान के दर्शन करने नहीं जाता बल्कि अपनी लंबी चौड़ी लिस्ट को पूरा करने के लिए गिड़गिड़ाता है ये भी चाहिए वो भी चाहिए, आज का इंसान कभी की मंदिर जाकर भगवान से उसकी भक्ति नहीं मांगता, उसे बीबी बचे गाड़ी बंगला चाहिए बस !
इसीलिए गुरु नानक साहिब जी महाराज कहते थे
"तेनु मन्गण दी भी लोड़ नहीं तू बस नींवा हो जा" ,
अर्थात वो समझते है कि मनुष्य को चाहिए कि वो फलदार पेड़ की भांति झुका हुआ रहे अपने व्यवहार से आचरण से, ओर सादगी से, कभी किसी धन दौलत का घमंड न करे सबसे प्रेम करे
आगे साहिब फरमाते हैं
"नानक नन्हें हो रहो जैसे नन्ही दूब
और घास जल जाएगी दूब खूब की खूब "
जैसे हम लोग अपनी घासनी में आग लगाते है या सर्दियों में लोग जंगलों में आग लगाते है तो जो भी लंबी घास होती है वो सब जलकर राख हो जाती है लेकिन जो दूब जिसको हम पहाड़ी में जूब बोलते है वो वैसे ही रह जाती है
मतलब बोलने का ये है कि छोटे बनकर रहने से हमारा फायदा ही है इसमें कोई नुकसान नहीं है अगर हमें कुछ आता भी है तो भी औरों से और नया जानना पूछना सीखना चाहिए!
इस पर हमारे सद्गुरु साहिब वक्त गुरु महाराज जी फरमाते है
"पानी ऊंचे न टीके नीचे ही ठहराए
नीचा पानी भर पिए ऊंचा प्यासा जाए "
इसलिए सभी को अपने अंदर के मैं को त्याग कर गुरु की शरण कबूल करनी चाहिए वो ही हमें समझा सकते है कि हमारा आने का असली मकसद क्या है और हमें क्या करना चाहिए 🙏