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रमणरेती वृन्दावन धाम.... राधे राधे जी
10/03/2020

रमणरेती वृन्दावन धाम.... राधे राधे जी

12/12/2019

मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन व्रत एवं पूजन करने सभी सुखों की प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। इस दिन मन को पवित्र करके स्नान करें और सफेद रंग के वस्त्र धारण करें। इसके बाद विधि-विधान के साथ भगवान विष्णु की पूजा करें। हो सके तो इस दिन किसी योग पंडित से पूजा कराएं।

इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने का विधान है। इस दिन सत्यनारायण की कथा सुनना और पढ़ना बहुत शुभ माना गया है। इस दिन भगवान नारायण की पूजा धूप, दीप आदि से करें। इसके बाद चूरमा का भोग लगाएं। यह इन्हें अतिप्रिय है। बाद में चूरमा को प्रसाद के रुप में बांट दें।कहते हैं जीवन संघर्षों से भरा हुआ है। ऐसे में प्रभु भक्ति करके लोग मोक्ष प्राप्ति करना चाहते हैं। पौराणिक कहानी के अनुसार माना जाता है कि मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन सच्चे मन से पूजा करने से इसी जन्म में उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। वहीं, पौराणिक धर्म ग्रंथो के अनुसार इस दिन सतयुग काल की शुरुआत हुई थी।मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की उदया तिथि चतुर्दशी सुबह 10 बजकर 59 मिनट तक ही रहेगी, उसके बाद पूर्णिमा शुरू हो जाएगी जोकि गुरुवार को सुबह 10 बजकर 42 मिनट तक रहेगी और पूर्णिमा तिथि के दौरान पूर्ण चांद रात को ही दिखेगा। चंद्रोदय का समय है शाम 4 बजकर 35 मिनट तक है। लिहाजा व्रतादि की पूर्णिमा मनायी जाएगी और सूर्योदय के समय पूर्णिमा का स्नान-दान किया जायेगा। मार्गशीर्ष माह की इस पूर्णिमा को अगहन पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इसे मार्गशीर्ष पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि किसी भी महीने की पूर्णिमा के दिन जो नक्षत्र पड़ता है, उसी के आधार पर पूर्णिमा का नाम भी रखा जाता है। चूंकि पूर्णिमा तिथि गुरुवार तक रहेगी और इस दिन मृगशीर्ष या मृगशिरा नक्षत्र है, इसलिए इस पूर्णिमा को मार्गशीर्ष पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। इस पूर्णिमा का बहुत अधिक महत्व होता है।

शास्त्रों के अनुसार इस माह को श्री कृष्ण का माह माना जाता है। इस बारे में उन्होंने खुद कहा है कि ''मैं मार्गशीर्ष माह हूं तथा सत युग में देवों ने मार्ग-शीर्ष मास की प्रथम तिथि को ही साल का प्रारम्भ किया था।' सनातन धर्म के अनुसार माना जाता है कि इस माह से ही सतयुग काल का आरंभ हुआ था। इस दिन स्नान, दान करने से कई गुना फल अधिक मिलता है। जानिए पूर्णिमा की पूजा विधि और महत्व के बारे में

31/10/2019

☀सुप्रभात🇮🇳 सप्रेम वन्दे☀
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🚩🚩🚩🚩🚩🚩
*विक्रम संवत*- २०७६
*सूर्य* दक्षिणायन
*संवत्सर* परिधावी
*शरद* ऋतु
*कार्तिक* मास
*शुक्ल* पक्ष
*तिथि* चतुर्थी
*गुरुवार*
*नक्षत्र* ज्येष्ठा
*योग* शोभन
*सूर्य राशि* तुला
*चन्द्र राशि* वृश्चिक
*गुरु राशि* वृश्चिक
*३१अक्टूबर २०१९*

*विशेष* वैनायकी श्रीगणेश ४ व्रत,नागचतुर्थी,श्रीसूर्यषष्ठी व्रत आरम्भ ।

आज की 🔑आपके शुभ दिन के लिए :-
🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔
*हमेशा याद रखें* संस्कारों से परिमार्जित व्यक्ति ही सभी प्रकार के सिद्धियों को प्राप्त कर सकता हैं ।
🕉आपका दिन शुभ हो🕉
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 🙏
पंडित प्यारी लाल भारद्वाज
94 182 69 647
701 8888 395

27/08/2019

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