27/08/2026
*प्रकृति से छेड़छाड़ मतलब...*
प्रकृति से छेड़छाड़ मतलब अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारना।
जब हम पेड़ काटते हैं, तो हम सिर्फ लकड़ी नहीं काटते,
हम आने वाली पीढ़ी की सांसें काटते हैं।
जब हम पहाड़ तोड़ते हैं, नदियों का रास्ता रोकते हैं,
तो प्रकृति चुप रहती है... पर भूलती नहीं है।
फिर वही बाढ़ बनकर, भूकंप बनकर, गर्मी बनकर हिसाब लेती है।
आज AC में बैठकर हमें गर्मी का एहसास नहीं होता,
पर सच ये है कि बाहर धरती जल रही है, और वो हमारी ही लगाई हुई आग है।
प्रकृति माँ है, उसे लूटो मत, पूजो।
एक पेड़ लगाओ, कचरा मत फैलाओ, पानी बचाओ।@
क्योंकि अगर प्रकृति रूठ गई, तो इंसान का कोई वजूद नहीं। Shubhankar Mishra Kishna Ram Vishnoi hightlight PMO Nepal PM Narendra Modi