21/09/2020
परंपरागत रुप से अधिकांश लोग सोना, रियल एस्टेट और बैंकों के एफडीआई में निवेश करते हैं लेकिन बढ़ती वित्तीय जागरुकता के साथ अब ज्यादा से ज्यादा लोग इक्विटी, बॉन्ड और म्यूचुअल फंडों को निवेश विकल्प के रूप में चुनने लगे हैं।
इक्विटी मार्केट की तरफ बढ़ते रुझान का एक बड़ा कारण वेल्थ क्रिएट करना है लेकिन निवेशकों को निवेश करते वक्त इस चीज पर भी फोकस करना चाहिए कि स्थितियां खराब होने पर उनकी पूंजी की सुरक्षा कैसे हो सकती है।
COVID-19 महामारी संकट काल जैसी स्थितियों में पोर्टफोलियों का डाईवर्सिफिकेशन पूंजी सुरक्षा के लिए काफी अहम हो जाता है। इक्विटी मार्केट के उतार-चढ़ाव से होने वाले नुकसान से बचने के लिए हमें अपने पैसे का कुछ हिस्सा फिक्स इनकम इस्ट्रूमेंट्स में डालना चाहिए।
हालांकि हमें इक्विटी मार्केट से ज्यादा से ज्यादा वेल्थ क्रिएशन के लिए जितना जल्दी हो सके उतना जल्दी निवेश शुरू करना चाहिए लेकिन हम यहां उन निवेशकों पर फोकस कर रहे हैं जो 30 से 35 साल के आयुवर्ग के है और जिनके पास निवेश करने के लिए 5 लाख रुपये हैं, तो आइए हम देखते हैं कि इस आयुवर्ग का कोई निवेशक 1 से ज्यादा निवेश प्रोडक्ट के साथ 5 लाख रुपये में कैसे एक बेहतर पोर्टफोलियों बना सकता है।
जानकारों का कहना है कि फाइनेंशियल मार्केट में किसी प्रोडक्ट में पैसे लगाने के पहले किसी निवेशक को अपने जोखिम उठाने की क्षमता की जांच कर लेनी चाहिए। इस जांच में कई प्रश्न शामिल होते हैं जैसे आपकी सालाना कमाई कितनी है, आपके परिवार में आपके ऊपर कितने लोग निर्भर हैं और आपका निवेश लक्ष्य क्या है?
किसी 35 साल के निवेशक को ध्यान में रखते हुए टाटा कैपिटल के हेड ऑफ वेल्थ मैनजमेंट सौरभ बसू (Saurav Basu) की राय है कि ऐसे निवेशक को मीडियम रिस्क पोर्टफोलियो पर फोकस करना चाहिए जहां उसको अपनी लगभग 40 फीसदी पूंजी फिक्सड इनकम देनी वाली सिक्योर�