Ojaswini - Be Enlightened Enlighten Others

Ojaswini - Be Enlightened Enlighten Others महिला सशक्तिकरण(Women Empowerment), सामाजिक सुरक?

साथियों,
आज आजादी के ६७ वर्षो के बाद हम फेसबुक और व्हाटसप क्रांति के युग में प्रवेश कर चुके है । परन्तु वास्तविक मायनो में यह आज़ादी हमें व विशेषकर हमारी आधी आबादी (महिलाओ) को कितना मिली है वह सबके सामने है।
घरेलू हिंसा , ऑफिस में यौन प्रताड़ना,सार्वजानिक वाहनो में धक्कामुक्की व राह में पैदल चलते छीटाकसीं जैसी कितने प्रकार की प्रताड़नाये झेलती हुए ये आज की नारी अपने अस्तित्व, सम्मान व गरिमा को बनाये

रखने के लिए जिस शिद्दत के साथ अवनरत संघर्षरत है। उसके लिए इस असीम शक्तिपुंज को हमारी और से सलाम है।
यदि हम महिलाओ के शोषण की जड़ में जाये तो आर्थिक रूप से स्वाबलंबी न हो पाना व चेतना का अभाव ही इस उत्पीड़न का मुख्य कारण है।
अतः महिलाओ के सशक्तिकरण व संवेदनशील स्वाबलंबन के लिए एक मजबूत तंत्र की सख़्त आवश्कता है। जो एक मज़बूत संगठन बनाकर इस कार्य को सुचारू रूप से अंजाम दे सकता है

साथियो पेश है हमारे कारवां थिएटर ग्रुप (नव सृजन) के "कारवां फिल्म प्रोडक्शन" में बनी पहली शार्ट फिल्म "गुड़िया"I https://...
08/03/2016

साथियो पेश है हमारे कारवां थिएटर ग्रुप (नव सृजन) के "कारवां फिल्म प्रोडक्शन" में बनी पहली शार्ट फिल्म "गुड़िया"I https://www.youtube.com/watch?v=AVlxi8yRjV8
आप यह लिंक को जरूर देखे/ साँझा करे/ सुझाव दे I
आभार I

Directed by_Satish Yadav Edited by_ kumar Saurabh Camera & DOP_ Suraj Sagar, Apoorav Saurabh Scripted By_Madan Kesari Cast_Sushmita Aggarwal, Avni,Satish Yad...

EXPERIENCE THEATRE WITH US
22/01/2016

EXPERIENCE THEATRE WITH US

Think you can do something new and innovative for the society then here is your chance to gain experience. Karvaan Theatre Group is conducting a 2 day Free Theatre workshop on 23rd and 24th January. Come forward and register yourself by filling the form-http://tinyurl.com/karvaanform.
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मनुष्यता को खारिज करते हुए हम अबस्त्री और पुरुष बनना चाहते हैंकभी स्त्री-पुरुष को खारिज करकेबने थे मनुष्य भीहम ऐसे मनुष्...
09/11/2015

मनुष्यता को खारिज करते हुए हम अब
स्त्री और पुरुष बनना चाहते हैं
कभी स्त्री-पुरुष को खारिज करके
बने थे मनुष्य भी
हम ऐसे मनुष्य नहीं बन सकते जो स्त्री हो न पुरुष

तो मनुष्यों में ही होते हैं स्त्री-पुरुष
कहते हैं एक कोमल है दूसरा कठोर
कहते हैं एक दयालु है दूसरा दम्भी
कहते हैं एक ममतालु है दूसरा निर्मोही

हम जानते हैं
जो कहने की बातें हैं
तो हम मिलकर असलियत सिद्ध क्यों नहीं करते।

_____________________/ शुभा

नव सृजन परिचय सत्र (I)
06/11/2015

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