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07/05/2015
Bal Diksha...
09/04/2015

Bal Diksha...

વડોદરામાં એક જ પરિવારના બે ..12 વર્ષીય આગમ અલ્પેશ શાહ અને 14 વર્ષીય શૈલ આશિષ શાહપ્રવચન પ્રભાવક પૂ.યુવાચાર્ય નરરત્નસૂરીશ્...
07/04/2015

વડોદરામાં એક જ પરિવારના બે ..12 વર્ષીય આગમ અલ્પેશ શાહ અને 14 વર્ષીય શૈલ આશિષ શાહ
પ્રવચન પ્રભાવક પૂ.યુવાચાર્ય નરરત્નસૂરીશ્વરજી મહારાજાના હસ્તે તા.25 એપ્રિલે દીક્ષા અંગીકાર
કરી સાંસારિક જીવનનો ત્યાગ કરી તપસ્યાના માર્ગે પ્રસ્થાન કરશે......
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જૈન ધર્મમાં દીક્ષા એટલે શ્રમણ ધર્મ ઉપરાંત પરમાત્માની આજ્ઞાનું પાલન ગુરુઆજ્ઞા દ્વારા કરવાનો માર્ગ કહેવાય
છે. શ્રમણ ભગવાન મહાવીરની ઉજ્જ્વળ શ્રમણ પરંપરામાં વડોદરા શહેરના એક જ પરિવારના બાળકો જોડાવા
માટે ઉત્સુક બન્યા છે. જેને લઇ વડોદરામાં એક જ પરિવારના બે બાળમુમુક્ષો દીક્ષા અંગીકાર કરવાની
પ્રથમ ઘટના આગામી તા.25 એપ્રિલે બનશે. બાળમુમુક્ષુ 12 વર્ષીય આગમ અલ્પેશ શાહ અને 14
વર્ષીય શૈલ આશિષ શાહ માતા-પિતા-ભાઇ-બહેનથી હર્યાભર્યા સંસારિક જીવનનો ત્યાગ કરી
પ્રવચન પ્રભાવક પૂ.યુવાચાર્ય નરરત્નસૂરીશ્વરજી મહારાજાના હસ્તે દીક્ષા અંગીકાર કરી
સંયમજીવન અને તપસ્યાના માર્ગે પ્રસ્થાન કરશે.
- 12 વર્ષીય આગમ અલ્પેશ શાહ અને 14 વર્ષીય શૈલ આશિષ શાહ સાંસારિક જીવનનો ત્યાગ
કરી તપસ્યાના માર્ગે પ્રસ્થાન કરશે
વડોદરાની ધરતી પર જૈન સમુદાયમાં દીક્ષાના અનેક પ્રસંગો અગાઉ થયા છે. પરંતુ નાનીવયે
બે બાળકો દીક્ષા અંગીકાર કરતા હોવાનો પ્રસંગ તા.25 એપ્રિલે આવી રહ્યો હોઇ જૈન
સમુદાય ભાવવિભોર બન્યો છે. શહેરના સુભાનપુરા વિસ્તારમાં મંડપ ડેકોરેટર્સ-ફરાસખાના વ્યવસાય સાથે સંકળાયેલા અલ્પેશ
મહેન્દ્ર શાહ અને આશિષ મહેન્દ્ર શાહના બે-બે સંતાનો પૈકી એક-એક પુત્ર સંતાનોએ પાપમય સંસાર
છોડી શ્રમણ હું ક્યારે બનું ω એવા ભાવ સાથે દીક્ષા લેવાનો સંકલ્પ કર્યો છે.
હેતલબહેન-અલ્પેશ શાહના પુત્ર આગમકુંવરે(ઉં.12) ધો.5 સુધી જ્યારે સેજલબહેન-આશિષ શાહના પુત્ર શૈલકુંવરે
(ઉં.14) ધો.7 સુધી અંગ્રેજી માધ્યમમાં અભ્યાસ કર્યો છે. બંને પિતરાઇ ભાઇઓએ જણાવ્યું હતું કે,
સંસાર છોડવાનું દુ:ખ નથી. સંયમ જીવન અને મોક્ષ મેળવવા બધું છોડવું પડે છે. આત્માનો અનંત
સુખનો ખજાનો શોધવા દીક્ષા લઇ રહ્યા છીએ.
સુભાનપુરા જૈન સંઘમાં ઉત્સાહનો માહોલ
સુભાનપુરા મૂર્તિપૂજક જૈન સંઘને 14 વર્ષ થયાં છે. સંઘ માટે દીક્ષાનો પહેલો પ્રસંગ બે
બાળમુમુક્ષોની દીક્ષા સાથે આવ્યો હોઇ સંઘમાં ઉત્સાહ વ્યાપ્યો છે. વડોદરામાં 50 વર્ષમાં એક
જ કુટુંબમાંથી દીક્ષા લઇ રહ્યા હોવાનો પહેલો પ્રસંગ બનશે.- સુરેન્દ્ર નાણાવટી, પ્રમુખ-
સુભાનપુરા મૂર્તિપૂજક જૈન સંઘ
વરઘોડો જન્મકલ્યાણક દિને નીકળશે
દીક્ષા લેનાર બે બાળમુમુક્ષો આગમકુંવર અને શૈલકુંવરનો વર્ષીદાનનો ભવ્ય વરઘોડો
મહાવીર જન્મ કલ્યાણક દિવસ તા.2 એપ્રિલે ભગવાનની શોભાયાત્રા સાથે નીકળશે. આવો પ્રસંગ
વડોદરામાં પહેલી વખત થશે.

शासन नायक प्रभु महावीर...जन्म कल्याणक की हार्दिक बधाई.... . वर्तमान जिनशासन नायक प्रभु महावीर...नमः सकल चतुर्विध संघ को ...
02/04/2015

शासन नायक प्रभु महावीर...जन्म कल्याणक की हार्दिक बधाई.... .
वर्तमान जिनशासन नायक प्रभु महावीर...नमः
सकल चतुर्विध संघ को महावीर स्वामीजी के जन्म कल्याक की बधाई
🔺हम सभी भगवान महावीर के शासनकाल में रह रहे है, जो इक्कीस हजार वर्षों [ पांचवां आरा ] का है ! प्रभु महावीर वर्तमान चौविसी में
जैन धर्म के चौंबीसवें तीर्थंकर है ।
🔺शास्त्रों में ऐसा लिखा है, जितने उपसर्ग पिछले सभी 23 तीर्थंकरों के जीवनकाल में हुए, उन सभी को मिलाकर से भी ज्यादा *उपसर्ग सिर्फ वर्धमान के जीवन में हुए, उन सभी को क्षमा और समता के माध्यम से जीता, इसीलिए उनको **महा-वीर के नाम से जाना जाता है ।
🔺करीब 2613 वर्ष पूर्व, ईसा से 599 वर्ष पहले वैशाली गणतंत्र के कुण्डलपुर में क्षत्रिय परिवार, पिता सिद्धार्थ और माता त्रिशला के यहाँ तीसरी संतान के रूप में चैत्र शुक्ला तेरस को वर्द्धमान का जन्म हुआ।
🔺प्रभु महावीर अहिंसा के मूर्तिमान प्रतीक थे, उनका जीवन त्याग और तपस्या से ओतप्रोत था, हिंसा, पशुबलि, जाति-पाँति के भेदभाव जिस युग में बढ़ गए थे, उसी युग में महावीर ने जन्म लिया, उन्होंने सकल विश्व को सत्य, अहिंसा का पाठ पढ़ाया ।
आपने दुनिया को *पंचशील सिद्धांत बताये ..
सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह, अस्तेय, और ब्रह्मचर्य
🔺प्रभु ने अपने आदर्शो से सकल विश्व को सुखमय जीवन जीने का मार्गदर्शन किया...आदर्श का तात्पर्य वे उपदेश जिनका पालन स्वयं
जीवन में धारण कर सर्वकर्मो का नाश करते हुए केवली-अरिहंत बने, तद्उपरांत समग्र विश्व को अनुकरण करने के लिए देशना दी।
🔺केवलज्ञान प्राप्त करने के उपरांत तीस वर्षों तक सकल प्राणी मात्र
के कल्याणार्थ : कर्म से मुक्ति का आत्मज्ञान जैसे समग्र विषयों पर
धर्म-देशना प्रदान कर जन-जन के कल्याणार्थ प्रिय बने ।
🔺जिनशासन में चतुर्विध संघ : साधु-साध्वी, श्रावक-श्राविका की स्थापना करके हमारे कल्याण मार्ग को बहुत सरल बना दिया ।
🚩 जीयो और जीने दो
🚩 अहिंसा परमों धर्म
🚩 क्षमा वीरस्य भूषणम्
का पवित्र संदेश सम्पूर्ण विश्व और हर जीवात्मा को दिया।
ऐसे प्राणी मात्र के उपकारी भगवंत श्री वर्द्धमान महावीर के चरणों में कोटी कोटि वंदन।
प्रस्तुति : जिन-गुरु : अमृत-वाणी, चेन्नई
का सादर जय जिनेन्द्र, प्रणाम।
जैनिज़्म : सद्-गति से परम्-गति की ओर...

30/03/2015
27/03/2015

श्री नवपद ओली का विस्तृत विवरण... .
🚩श्री नवपद ओली आराधना ....
अनंत उपकारी भगवान् महावीर की देशना अनुसार नवपद ओली आराधना आत्मकल्याण का सर्वोत्कृष्ट साधन है।
पञ्चपरमेष्ठी (5) सम्यग् दर्शन, ज्ञान, चारित्र (3) एवं तप (1) कुल 9 जिनशासन के 9 रत्नों की यह आराधना है।
एक एक रत्न के जितने गुण है, उतनी क्रियाएँ की जाती है, जो गुणधर्म का रंग है, उस रंग के खाद्य पदार्थ का आयम्बिल किया जाता है।
1⃣ प्रथम दिवस : श्री अरिहंत पद आराधना
( रंग - सफेद वर्ण ) काऊसग्ग 12 लोगस्स
प्रदिक्षणा -12, खमासमणा -12, स्वस्तिक -12, आयम्बिल : चावल
नवकारवाली -20, नमो अरिहंताणं
2⃣ द्वित्तीय दिवस : श्री सिद्ध पद आराधना
( रंग - लाल वर्ण ) काउसग्ग 8 लोगग्स
प्रदिक्षणा - 8, खमासमणा - 8
स्वस्तिक - 8, आयम्बिल : गेहूं का
नवकारवाली - 20 नमो सिद्धाणं
3⃣ तृतीय दिवस : श्री आचार्य पद आराधना
( रंग - पीला ) काउसग्ग 36 लोगस्स
प्रदिक्षणा - 36, खमासमणा - 36
स्वस्तिक - 36, आयम्बिल : चने की दाल का
नवकारवाली - 20 नमो आयरियाणं
4⃣ चतुर्थ दिवस : श्री उपाध्याय पद आराधना
( रंग - नीला ) काउसग्ग 25 लोगस्स
प्रदिक्षणा - 25, खमासमणा -25
स्वस्तिक - 25, आयम्बिल : मुंग का
नवकारवाली - 20, नमो उव्वझायाणं
5⃣ पंचम दिवस : श्री साधु पद की आराधना
( रंग - श्याम ) काउसग्ग 27 लोगस्स
प्रदिक्षणा - 27, खमासमणा - 27
स्वस्तिक - 27, आयम्बिल : काली उड़द का
नावकारवाली - 20, नमो लोए सव्वसाहूणं
6⃣ छठा दिवस : सम्यग् दर्शन की आराधना
( रंग -सफेद ) काउसग्ग 67 लोगस्स
प्रदिक्षणा - 67, खमासमणा - 67
स्वस्तिक - 67, आयम्बिल : चावल का
नवकारवाली - 20, नमो दंसणस्स
7⃣ सप्तम दिवस : सम्यग् ज्ञान पद की आराधना
( रंग - सफेद ) काउसग्ग 51 लोगस्स
प्रदिक्षणा - 51, खमासमणा - 51
स्वस्तिक - 51, आयम्बिल : चावल का
नवकारवाली - 20, नमो नाणस्स
8⃣ अष्टम दिवस : सम्यग् चारित्र पद की आराधना
( रंग - सफेद ) काउसग्ग 70 लोगस्स
प्रदिक्षणा - 70, खमासमणा -70
स्वस्तिक - 70, आयम्बिल : चावल का
नवकारवाली - 20, नमो चारित्तस्स
9⃣ नवम दिवस : तप पद की आराधना
( रंग - सफेद ) काउसग्ग 50 लोगस्स
प्रदिक्षणा - 50, खमासमणा - 50
स्वस्तिक - 50, आयम्बिल : चावल का
नवकारवाली - 20, नमो तवस्स
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ज्ञानियों का कहना है, दान-धर्म-तप आराधना में सांसारिक प्रतिष्ठा भाव नही रखोगे, खाने में रूचि नही रखोगे, मन-वचन-काया को वैराग्य वीतराग भाव से रहोगें, उतना ही पुण्यफल ज्यादा एवम् शीघ्र मिलेगा।
नोट : श्रावक-श्राविकाओं को तप-धर्म आराधना से जोड़ने के लिए आजकल साधारण तरीके की आयम्बिल रसोई से भी नवपद ओली कराई जा रही हैं।
जिन-गुरु : अमृत-वाणी ग्रुप्स, तप की प्रेरणा देने वाले पूज्य साधु-साध्वीजी भगवंतों को कोटिशः वंदन करते है, सभी तपश्वियों को सादर प्रणाम, सुख-साता एवं आराधना में पुण्योदयों से अर्जित लक्ष्मी का सद् उपयोग करने वाले, तप के लिए पृष्ठभूमि बनाने, उसे कार्यान्वित करने वाले सभी ट्रस्टीज, मण्डलस्, समर्पित कार्यकर्तागण सभी का जय जिनेन्द्र के साथ अभिनंदन, धन्यवाद करते है। शुभम् अस्तु।।
जैनिज़्म : सद्-गति से परम्-गति की ओर..

25/03/2015

यह मैसेज उनके लिए है, जो आयम्बिल का तप नही कर सकते है....
चैत्रमास आयम्बिल ओली पर्व
दि° 27/3 से 4/4/2015 तक
चैत्र सुदी 8 से चैत्र पूर्णिमा
यह मैसेज उनके लिए है, जो आयम्बिल का तप भी नही कर सकते है, उसके पर्याय में वें क्या कर सकते है...?
यह पर्व "रसपरित्याग" का पर्व है
जो "भव्य आत्मा" आयम्बिल तप करते हे वो आत्मा अपने कर्मो की भारी मात्रा में निर्जरा करते है।
🔺जो आत्मा आयम्बिल तप नही कर सकते उन्हें इन दिनो में महावीगय और सामान्य विगय का त्याग करके अपनी अंतराई को तोडना चाहिए।
जैन धर्म के अनुसार " मांस" "मख्खन" "मदिरा" और "मध् " यह चार महावीगय का श्रावक को आजीवन त्याग होता है।
🔺जब की सामान्य वीगय्" दूध" " दही" "घी" "तेल" (oil) "गुड़" "खांड" (sugar) और "साकर" यह 7 सामान्य वीगय् है।
🔺आयम्बिल ओली के दिनो में इन 7 विगयो का उपयोग ना करे / या इनमे से कोई एक एक विगय का त्याग करे और मेरे से आयम्बिल तप न होने का पश्याताप करते हुए उक्त अंतराय को क्षय करे।

24/03/2015
18/03/2015

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