27/03/2015
श्री नवपद ओली का विस्तृत विवरण... .
🚩श्री नवपद ओली आराधना ....
अनंत उपकारी भगवान् महावीर की देशना अनुसार नवपद ओली आराधना आत्मकल्याण का सर्वोत्कृष्ट साधन है।
पञ्चपरमेष्ठी (5) सम्यग् दर्शन, ज्ञान, चारित्र (3) एवं तप (1) कुल 9 जिनशासन के 9 रत्नों की यह आराधना है।
एक एक रत्न के जितने गुण है, उतनी क्रियाएँ की जाती है, जो गुणधर्म का रंग है, उस रंग के खाद्य पदार्थ का आयम्बिल किया जाता है।
1⃣ प्रथम दिवस : श्री अरिहंत पद आराधना
( रंग - सफेद वर्ण ) काऊसग्ग 12 लोगस्स
प्रदिक्षणा -12, खमासमणा -12, स्वस्तिक -12, आयम्बिल : चावल
नवकारवाली -20, नमो अरिहंताणं
2⃣ द्वित्तीय दिवस : श्री सिद्ध पद आराधना
( रंग - लाल वर्ण ) काउसग्ग 8 लोगग्स
प्रदिक्षणा - 8, खमासमणा - 8
स्वस्तिक - 8, आयम्बिल : गेहूं का
नवकारवाली - 20 नमो सिद्धाणं
3⃣ तृतीय दिवस : श्री आचार्य पद आराधना
( रंग - पीला ) काउसग्ग 36 लोगस्स
प्रदिक्षणा - 36, खमासमणा - 36
स्वस्तिक - 36, आयम्बिल : चने की दाल का
नवकारवाली - 20 नमो आयरियाणं
4⃣ चतुर्थ दिवस : श्री उपाध्याय पद आराधना
( रंग - नीला ) काउसग्ग 25 लोगस्स
प्रदिक्षणा - 25, खमासमणा -25
स्वस्तिक - 25, आयम्बिल : मुंग का
नवकारवाली - 20, नमो उव्वझायाणं
5⃣ पंचम दिवस : श्री साधु पद की आराधना
( रंग - श्याम ) काउसग्ग 27 लोगस्स
प्रदिक्षणा - 27, खमासमणा - 27
स्वस्तिक - 27, आयम्बिल : काली उड़द का
नावकारवाली - 20, नमो लोए सव्वसाहूणं
6⃣ छठा दिवस : सम्यग् दर्शन की आराधना
( रंग -सफेद ) काउसग्ग 67 लोगस्स
प्रदिक्षणा - 67, खमासमणा - 67
स्वस्तिक - 67, आयम्बिल : चावल का
नवकारवाली - 20, नमो दंसणस्स
7⃣ सप्तम दिवस : सम्यग् ज्ञान पद की आराधना
( रंग - सफेद ) काउसग्ग 51 लोगस्स
प्रदिक्षणा - 51, खमासमणा - 51
स्वस्तिक - 51, आयम्बिल : चावल का
नवकारवाली - 20, नमो नाणस्स
8⃣ अष्टम दिवस : सम्यग् चारित्र पद की आराधना
( रंग - सफेद ) काउसग्ग 70 लोगस्स
प्रदिक्षणा - 70, खमासमणा -70
स्वस्तिक - 70, आयम्बिल : चावल का
नवकारवाली - 20, नमो चारित्तस्स
9⃣ नवम दिवस : तप पद की आराधना
( रंग - सफेद ) काउसग्ग 50 लोगस्स
प्रदिक्षणा - 50, खमासमणा - 50
स्वस्तिक - 50, आयम्बिल : चावल का
नवकारवाली - 20, नमो तवस्स
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ज्ञानियों का कहना है, दान-धर्म-तप आराधना में सांसारिक प्रतिष्ठा भाव नही रखोगे, खाने में रूचि नही रखोगे, मन-वचन-काया को वैराग्य वीतराग भाव से रहोगें, उतना ही पुण्यफल ज्यादा एवम् शीघ्र मिलेगा।
नोट : श्रावक-श्राविकाओं को तप-धर्म आराधना से जोड़ने के लिए आजकल साधारण तरीके की आयम्बिल रसोई से भी नवपद ओली कराई जा रही हैं।
जिन-गुरु : अमृत-वाणी ग्रुप्स, तप की प्रेरणा देने वाले पूज्य साधु-साध्वीजी भगवंतों को कोटिशः वंदन करते है, सभी तपश्वियों को सादर प्रणाम, सुख-साता एवं आराधना में पुण्योदयों से अर्जित लक्ष्मी का सद् उपयोग करने वाले, तप के लिए पृष्ठभूमि बनाने, उसे कार्यान्वित करने वाले सभी ट्रस्टीज, मण्डलस्, समर्पित कार्यकर्तागण सभी का जय जिनेन्द्र के साथ अभिनंदन, धन्यवाद करते है। शुभम् अस्तु।।
जैनिज़्म : सद्-गति से परम्-गति की ओर..