08/03/2026
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ज्ञानमृत प्रार्थना एक आध्यात्मिक साधना के सभी साधक को आज 08 मार्च 2026 अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं।
"यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः
हमारी इस श्रृंखला में हम भारतीय ज्ञान परम्परा - सनातन का मूल में आज एक विशेष ज्ञानानृत की चर्चा करेंगे।
अंतरराष्ट्री महिला दिवस की शुरुवात में सबसे पहले यह दिवस, न्यूयॉर्क नगर में 1909 में एक समाजवादी राजनीतिक कार्यक्रम के रूप में आयोजित किया गया था। 1917 में सोवियत संघ ने इस दिन को एक राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया क्योंकि इसी दिन सोवियत संघ में महिलाओं ने समान अधिकार के लिए आंदोलन किया था। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की औपचारिक घोषणा संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वारा सार्वभौमिक रूप से सन् 1975 से की गई।
एक ओर जहां लगभग 20 वीं सदी तक वैश्विक स्तर पर महिलाओं को अपने अधिकार के लिए संघर्ष करना पड़ा वही भारत में तो वैदिक काल लगभग 1500-1000 ईसा पूर्व से ही भारतीय महिलाओं का समाज, धर्म, शिक्षा और परिवार में उच्च योगदान था। वे केवल गृहकार्य तक ही सीमित नहीं थी वे विदुषी (शिक्षित), चिकित्सक, वेद शास्त्रार्थी और ऋचाओं की रचयिता थीं, जिन्हें परिवार के साथ धार्मिक अनुष्ठान (यज्ञ) में अनिवार्य माना जाता था। उन्हें शिक्षा, स्वयंवर द्वारा विवाह चयन, और राजनीतिक एवं धार्मिक सभा-समिति में भागीदारी की पूर्ण अधिकार था। वे पुरुषों से भी कही ज्यादा आदरणीय थीं।
आध्यात्मिक स्तर पर भी भारतीय ज्ञान परम्परा, महिलाओं के लिए स्पष्ट करती है, की शक्ति स्वरूपा नारी जो युद्ध शक्ति, धन शक्ति, ज्ञान शक्ति के रूप में विराजित है, वही इस सृष्टि के सृजन, पालन एवं लय की शक्ति है।
हम ब्रह्मा के साथ ब्राह्मणी , नारायण के साथ नारायणी, महाकाल के साथ महाकाली की बात करते है तब ये बात यह बात स्पष्ट हो जाती है कि बिना ज्ञान शक्ति के स्वयं ब्रह्मा सृजन, बिना धन शक्ति के नारायण पालन एवं बिना युद्ध शक्ति के महाकाल लय नहीं कर सकते।
"यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः
डॉ.आशुतोष व्यास
093406 34922