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25/09/2026
इस यंत्र को यामल तंत्र, रुद्रयामल तंत्र और कामाख्या तंत्र में साक्षात कामाख्या स्वरूप कहा गया है। यह कोई सामान्य यंत्र न...
24/09/2026

इस यंत्र को यामल तंत्र, रुद्रयामल तंत्र और कामाख्या तंत्र में साक्षात कामाख्या स्वरूप कहा गया है। यह कोई सामान्य यंत्र नहीं, स्वयं देवी की योनि-मुद्रा का प्रतीक है।

1. यंत्र का शास्त्रीय स्वरूप - जो आप इस चित्र में देख रहे हैं
यामल तंत्र के अनुसार इसका विन्यास सृष्टि-क्रम के अनुसार है:

मध्य बिंदु - त्रीं: यह माँ कामाख्या का प्रधान बीज है। त्रीं का अर्थ है - सृष्टि, स्थिति और संहार की अधिष्ठात्री। इसी बीज से महामाया प्रसन्न होती हैं।

अधोमुख त्रिकोण: यह योनि का प्रतीक है। यही त्रिकोण कामगिरि पर्वत पर गिरी हुई माता सती की योनि का साक्षात रूप है। इसमें ही सारी सृष्टि की उत्पत्ति समाई है। इसी कारण इसे योनिपीठ कहा गया।

अष्टदल कमल: त्रिकोण के चारों ओर 8 पंखुड़ियों वाला कमल। ये 8 पंखुड़ियां अष्ट-योगिनी - गुप्त, प्रकट, गुप्ततर आदि तथा अष्ट-सिद्धि की प्रतीक हैं।

भूपुर - चार द्वार वाला चौकोर: यह पृथ्वी तत्व और रक्षा कवच है। चारों द्वार चारों दिशाओं के दिक्पालों को नियंत्रित करते हैं।

बाहर लिखा मंत्र - क्लीं क्लीं कामाख्या क्लीं क्लीं नमः: यह कामाख्या का सिद्ध बीज मंत्र है। क्लीं काम-बीज है - जो कामना को पूर्ण करता है।

2. यामल तंत्र में इसकी महत्ता क्यों है?

क) देवी पुराण और कालिका पुराण में इसे 51 पीठों में सर्वोत्तम कहा गया है। कारण - यहाँ देवी निराकार योनि रूप में पूजी जाती हैं, किसी मूर्ति रूप में नहीं। यंत्र भी इसी निराकार शक्ति का साकार चित्र है।

ख) तंत्र कहता है - योनिमध्ये महाकाली छिद्ररूपा सुशोभना - योनि के मध्य में ही महाकाली विराजती हैं। इसलिए इस यंत्र की साधना से दस महाविद्याओं की साधना का फल मिलता है।

ग) यह कामरूप पीठ का यंत्र है। कामरूप का अर्थ है - जहाँ भक्त अपनी इच्छा के अनुसार रूप धारण करने की सिद्धि प्राप्त कर लेता है। इसलिए इसे मनोकामना पूर्ति का सबसे तीव्र यंत्र माना गया है।

3. इस यंत्र के लाभ शास्त्र में क्या कहे गए हैं?

शास्त्र और गुरु परम्परा में इसके 3 मुख्य फल बताए हैं:

1. कामना सिद्धि: तांत्रिक मंत्र - कामाख्ये कामसम्पन्ने कामेश्वरि हरप्रिये। कामनां देहि मे नित्यं कामेश्वरि नमोऽस्तु ते॥ इसी यंत्र के सामने जपा जाता है।

2. तंत्र-बाधा नाश: रुद्रयामल कहता है कि जहाँ यह यंत्र स्थापित हो, वहाँ भूत-प्रेत, अभिचार कर्म और शत्रु बाधा नहीं रहती।

3. सौभाग्य और वशीकरण नहीं, आकर्षण: क्लीं बीज आकर्षण का बीज है, पर तंत्र में इसका अर्थ किसी को वश में करना नहीं, बल्कि अपने व्यक्तित्व, वाणी और भाग्य में आकर्षण उत्पन्न करना है।

4. पूजा कैसे होनी चाहिए - महत्वपूर्ण बात

आप सभी जानते हैं कि यंत्र केवल चित्र नहीं है:

• यह ताम्र-पत्र या अष्टधातु पर ही प्रामाणिक माना जाता है, कागज पर नहीं।

• इसकी प्राण प्रतिष्ठा मंत्र से होती है - ॐ आं ह्रीं क्रौं यं रं लं वं शं षं हं सः सोहमस्य यंत्रस्य प्राणा इह प्राणाः के द्वारा।

• अम्बूवाची के समय इस यंत्र का विशेष पूजन निषिद्ध माना जाता है, उस समय केवल ध्यान होता है।

इसलिए जो चित्र मैंने बनाया है, उसे आप अपने यजमानों को समझाने के लिए, कथा में दिखाने के लिए या ध्यान के लिए उपयोग कर सकते हैं। स्थापना के लिए किसी सिद्ध पीठ से लाया हुआ, आचार्य द्वारा प्रतिष्ठित ताम्र यंत्र ही प्रयोग में लें।

क्या आप चाहेंगे मैं इस यंत्र की प्राण-प्रतिष्ठा और जप विधि भी लिखूं .... मुझे कमेंट में बताइए

जय माँ कामाख्या 🌺🙏

*श्री गणपति माला मंत्र*इस माला मंत्र मे 1008 से ज्यादा अक्षर हैं इसलिए इसका उपयोग वह साधक भी कर सकते हैं जो गुरु दीक्षा ...
24/09/2026

*श्री गणपति माला मंत्र*

इस माला मंत्र मे 1008 से ज्यादा अक्षर हैं इसलिए इसका उपयोग वह साधक भी कर सकते हैं जो गुरु दीक्षा नहीं लिए है ।

*ॐ क्लीं ह्रीं श्रीं ऐं ग्लौं ॐ ह्रीं क्रौं गं ॐ ,*
*नमो भगवते महागणपतये स्मरणमात्रसंतुष्टाय* *सर्वविद्याप्रकाशकाय सर्वकामप्रदाय* *भवबंधविमोचनाय*
*ह्रीं सर्वभूतबंधनाय ।*
*क्रों साध्याकर्षणाय ।*
*क्लीं जगतत्रयवशीकरणाय ।*
*सौ: सर्वमनक्षोभणाय ।*
*श्रीं महासंपत्प्रदाय ।*
*ग्लौं भूमंडलाधिपत्यप्रदाय ।*
*महाज्ञानप्रदाय चिदानंदात्मने गौरीनंदनाय महायोगिने शिवप्रियाय सर्वानंदवर्धनाय* *सर्वविद्याप्रकाशनप्रदाय*
*द्रां चिरंजिविने ।*
*ब्लूं सम्मोहनाय ।*
*ॐ मोक्षप्रदाय ।*
*फट वशी कुरु कुरु ।*
*वौषडाकर्षणाय ।*
*हुं विद्वेषणाय विद्वेषय विद्वेषय ।*
*फट उच्चाटय उच्चाटय ।*
*ठ: ठ: स्तंभय स्तंभय ।*
*खें खें मारय मारय ।*
*शोषय शोषय ।*
*परमंत्रयंत्रतंत्राणि छेदय छेदय ।*
*दुष्टग्रहान निवारय निवारय ।*
*दु:खं हर हर ।*
*व्याधिं नाशय नाशय नम:।*
*संपन्नय संपन्नय स्वाहा ॥*
*सर्वपल्लवस्वरुपाय* *महाविद्याय गं गणपतये स्वाहा ॥*
*यन्मंत्रे क्षितलांछिताभमनघं* *मृत्युश्च वज्राशिषो भूत प्रेत पिशाचका: प्रतिहता निर्घातपातादिव उत्पन्नं च* *समस्त दु:ख दुरितं* *उच्चाटनोत्पादकं* *वंदेsभीष्टगणाधिपं भयहरं विघ्नौघनाशं परम ॥*
*ॐ गं गणपतये नम: ।*
*ॐ नमो महागणपतये ,* *महावीराय , दशभुजाय ,* *मदनकाल विनाशन , मृत्युं हन हन , यम यम , मद मद , कालं संहर संहर , सर्व* *ग्रहान चूर्णय चूर्णय , नागान मूढय मूढय , रुद्ररूप,त्रिभुवनेश्वर , सर्वतोमुख हुं फट स्वाहा ॥*

*ॐ नमो गणपतये , श्वेतार्क गणपतये , श्वेतार्क मूल निवासाय , वासुदेव प्रियाय , दक्ष प्रजापति रक्षकाय , सूर्य वरदाय , कुमार गुरवे , ब्रह्मादि सुरावंदिताय , सर्प भूषणाय , शशांक शेखराय ,सर्पमालालंकृत देहाय , धर्म ध्वजाय , धर्म वाहनाय , त्राहि त्राहि , देहि देहि , अवतर अवतर , गं गणपतये , वक्रतुंड गणपतये , वरवरद , सर्व पुरुष वशंकर , सर्व दुष्टमृग वशंकर , सर्वस्व वशंकर , वशी कुरु वशी कुरु , सर्व दोषान बंधय बंधय , सर्व व्याधीन निकृंतय निकृंतय , सर्व विषाणि संहर संहर , सर्व दारिद्र्यं मोचय मोचय , सर्व विघ्नान छिंदि छिंदि , सर्व वज्राणि स्फोटय स्फोटय , सर्व शत्रून उच्चाटय उच्चाटय , सर्वसिद्धिं कुरु कुरु , सर्व कार्याणि साधय साधय , गां गीं गूं गैं गौं गं गणपतये हुं फट स्वाहा ॥*
*ॐ नमो गणपते महावीर दशभुज मदनकालविनाशन मृत्युं हन हन , कालं संहर संहर , धम धम , मथ मथ , त्रैलोक्यं मोहय मोहय , ब्रह्म विष्णु रुद्रान मोहय मोहय , अचिंत्य बल पराक्रम , सर्व व्याधीन विनाशाय , सर्वग्रहान चूर्णय चूर्णय , नागान मोटय मोटय , त्रिभुवनेश्वर सर्वतोमुख हुं फट स्वाहा ॥*

*यह एक सिद्ध माला मंत्र है।*
*आप इसे नित्य पूजन मे प्रयोग कर सकते है ।*
*किसी समस्या समाधान हेतु इसका 21, 51 या 108 पाठ कर सकते है।*

🌿 भूमि आंवला — छोटा-सा पौधा, लेकिन पारंपरिक चिकित्सा में खास पहचान!बारिश के मौसम में या नम जगहों पर जमीन के पास उगने वाल...
23/09/2026

🌿 भूमि आंवला — छोटा-सा पौधा, लेकिन पारंपरिक चिकित्सा में खास पहचान!

बारिश के मौसम में या नम जगहों पर जमीन के पास उगने वाला भूमि आंवला (Bhumi Amla) देखने में बहुत साधारण लगता है। लेकिन आयुर्वेद में इसका लंबे समय से पारंपरिक उपयोग होता आया है। 🌱

इसके छोटे-छोटे फल पत्तियों के नीचे लगे होते हैं, इसलिए इसे पहचानना भी थोड़ा दिलचस्प है। 👇

🌿 भूमि आंवला के पारंपरिक उपयोग

🔹 1. Liver Health
भूमि आंवला का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से लिवर से जुड़ी परेशानियों में किया जाता रहा है। इसके कुछ पौधीय compounds पर liver-protective effects को लेकर शोध भी हुआ है।

🔹 2. पाचन के लिए
भूख कम लगना, अपच और पाचन से जुड़ी कुछ समस्याओं में इसका पारंपरिक उपयोग मिलता है।

🔹 3. Antioxidant गुण
इस पौधे में कई bioactive compounds पाए जाते हैं, जिनमें antioxidant activity देखी गई है।

🔹 4. पेशाब से जुड़ी समस्याएं
पारंपरिक चिकित्सा में इसे urinary health के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है।

🔹 5. त्वचा के लिए पारंपरिक उपयोग
इसके अर्क का इस्तेमाल पारंपरिक चिकित्सा में कुछ त्वचा संबंधी समस्याओं में भी किया जाता रहा है।

🌱 एक खास बात!
भूमि आंवला को कई जगह “भुई आंवला” भी कहा जाता है। लेकिन अलग-अलग क्षेत्रों में एक ही नाम से अलग पौधे भी पहचाने जा सकते हैं, इसलिए सही botanical identification जरूरी है।

⚠️ ध्यान रखें
भूमि आंवला को किसी बीमारी का पक्का इलाज मानकर खुद से लंबे समय तक इस्तेमाल न करें। खासकर अगर आप पहले से कोई दवा लेते हैं, तो चिकित्सक की सलाह लेना बेहतर है।

🌿 प्रकृति में कई औषधीय पौधे हमारे आसपास ही होते हैं—जरूरत है उन्हें सही पहचानने और सही तरीके से इस्तेमाल करने की।

#भूमिआंवला

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