24/09/2026
*श्री गणपति माला मंत्र*
इस माला मंत्र मे 1008 से ज्यादा अक्षर हैं इसलिए इसका उपयोग वह साधक भी कर सकते हैं जो गुरु दीक्षा नहीं लिए है ।
*ॐ क्लीं ह्रीं श्रीं ऐं ग्लौं ॐ ह्रीं क्रौं गं ॐ ,*
*नमो भगवते महागणपतये स्मरणमात्रसंतुष्टाय* *सर्वविद्याप्रकाशकाय सर्वकामप्रदाय* *भवबंधविमोचनाय*
*ह्रीं सर्वभूतबंधनाय ।*
*क्रों साध्याकर्षणाय ।*
*क्लीं जगतत्रयवशीकरणाय ।*
*सौ: सर्वमनक्षोभणाय ।*
*श्रीं महासंपत्प्रदाय ।*
*ग्लौं भूमंडलाधिपत्यप्रदाय ।*
*महाज्ञानप्रदाय चिदानंदात्मने गौरीनंदनाय महायोगिने शिवप्रियाय सर्वानंदवर्धनाय* *सर्वविद्याप्रकाशनप्रदाय*
*द्रां चिरंजिविने ।*
*ब्लूं सम्मोहनाय ।*
*ॐ मोक्षप्रदाय ।*
*फट वशी कुरु कुरु ।*
*वौषडाकर्षणाय ।*
*हुं विद्वेषणाय विद्वेषय विद्वेषय ।*
*फट उच्चाटय उच्चाटय ।*
*ठ: ठ: स्तंभय स्तंभय ।*
*खें खें मारय मारय ।*
*शोषय शोषय ।*
*परमंत्रयंत्रतंत्राणि छेदय छेदय ।*
*दुष्टग्रहान निवारय निवारय ।*
*दु:खं हर हर ।*
*व्याधिं नाशय नाशय नम:।*
*संपन्नय संपन्नय स्वाहा ॥*
*सर्वपल्लवस्वरुपाय* *महाविद्याय गं गणपतये स्वाहा ॥*
*यन्मंत्रे क्षितलांछिताभमनघं* *मृत्युश्च वज्राशिषो भूत प्रेत पिशाचका: प्रतिहता निर्घातपातादिव उत्पन्नं च* *समस्त दु:ख दुरितं* *उच्चाटनोत्पादकं* *वंदेsभीष्टगणाधिपं भयहरं विघ्नौघनाशं परम ॥*
*ॐ गं गणपतये नम: ।*
*ॐ नमो महागणपतये ,* *महावीराय , दशभुजाय ,* *मदनकाल विनाशन , मृत्युं हन हन , यम यम , मद मद , कालं संहर संहर , सर्व* *ग्रहान चूर्णय चूर्णय , नागान मूढय मूढय , रुद्ररूप,त्रिभुवनेश्वर , सर्वतोमुख हुं फट स्वाहा ॥*
*ॐ नमो गणपतये , श्वेतार्क गणपतये , श्वेतार्क मूल निवासाय , वासुदेव प्रियाय , दक्ष प्रजापति रक्षकाय , सूर्य वरदाय , कुमार गुरवे , ब्रह्मादि सुरावंदिताय , सर्प भूषणाय , शशांक शेखराय ,सर्पमालालंकृत देहाय , धर्म ध्वजाय , धर्म वाहनाय , त्राहि त्राहि , देहि देहि , अवतर अवतर , गं गणपतये , वक्रतुंड गणपतये , वरवरद , सर्व पुरुष वशंकर , सर्व दुष्टमृग वशंकर , सर्वस्व वशंकर , वशी कुरु वशी कुरु , सर्व दोषान बंधय बंधय , सर्व व्याधीन निकृंतय निकृंतय , सर्व विषाणि संहर संहर , सर्व दारिद्र्यं मोचय मोचय , सर्व विघ्नान छिंदि छिंदि , सर्व वज्राणि स्फोटय स्फोटय , सर्व शत्रून उच्चाटय उच्चाटय , सर्वसिद्धिं कुरु कुरु , सर्व कार्याणि साधय साधय , गां गीं गूं गैं गौं गं गणपतये हुं फट स्वाहा ॥*
*ॐ नमो गणपते महावीर दशभुज मदनकालविनाशन मृत्युं हन हन , कालं संहर संहर , धम धम , मथ मथ , त्रैलोक्यं मोहय मोहय , ब्रह्म विष्णु रुद्रान मोहय मोहय , अचिंत्य बल पराक्रम , सर्व व्याधीन विनाशाय , सर्वग्रहान चूर्णय चूर्णय , नागान मोटय मोटय , त्रिभुवनेश्वर सर्वतोमुख हुं फट स्वाहा ॥*
*यह एक सिद्ध माला मंत्र है।*
*आप इसे नित्य पूजन मे प्रयोग कर सकते है ।*
*किसी समस्या समाधान हेतु इसका 21, 51 या 108 पाठ कर सकते है।*