12/10/2026
🌸नवरात्रि पहला दिन: मां शैलपुत्री पूजन एवं घटस्थापन 🌸
पावन नवरात्रि महोत्सव की शुरुआत मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की आराधना के साथ होती है। हिमालय राज की पुत्री होने के कारण इन्हें 'शैलपुत्री' कहा जाता है। मां का यह स्वरूप पवित्रता, स्थिरता, दृढ़ संकल्प और अखंड निष्ठा का प्रतीक माना जाता है। किसी भी नए और शुभ कार्य की शुरुआत से पहले मां शैलपुत्री का आशीर्वाद जीवन में अटूट आधार प्रदान करता है।
✨ घटस्थापना (कलश स्थापना) का विशेष महत्व
आज प्रथम दिन घटस्थापना का विधान है। कलश को ब्रह्मांड का प्रतीक माना जाता है, जिसमें पवित्र जल, औषधियां, पंचरत्न और आम के पत्ते स्थापित किए जाते हैं। यह अनुष्ठान घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि, शांति और आध्यात्मिक शक्ति का संचार करता है। घटस्थापना के साथ ही आगामी नौ दिनों के दिव्य उत्सव का शुभारंभ होता है।
⛰️ आंतरिक शक्ति और नई शुरुआत का संकल्प
मां शैलपुत्री नंदी (वृषभ) पर सवार हैं, उनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का पुष्प सुशोभित है। त्रिशूल जीवन की सभी बाधाओं से लड़ने का साहस देता है, जबकि कमल सादगी और निर्मलता का संदेश देता है। यदि आप अपने करियर, स्वास्थ्य या व्यक्तिगत जीवन में किसी नए संकल्प की शुरुआत करना चाहते हैं, तो आज का दिन सर्वोत्तम है।
🙏 आज का सिद्ध मंत्र:
"वन्दे वांछित लाभाय चंद्रकृत शेखराम। वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥"
आप इस नवरात्रि अपने जीवन में कौन सा नया संकल्प या सकारात्मक बदलाव शुरू करने जा रहे हैं? कमेंट्स में 'जय मां शैलपुत्री' लिखकर अपना संकल्प साझा करें और अपनों के साथ यह पावन संदेश शेयर करें! 🚩✨