Dr.Santosh kumar chaturvedi

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20/06/2020
28/09/2018
यदृच्छालाभसंतुष्टो द्वंद्वातीतो विमत्सरः।समः सिद्धावसिद्धौ च कृत्वापि न निबध्यते॥जो बिना इच्छा के अपने-आप प्राप्त हुए पद...
04/02/2018

यदृच्छालाभसंतुष्टो द्वंद्वातीतो विमत्सरः।
समः सिद्धावसिद्धौ च कृत्वापि न निबध्यते॥
जो बिना इच्छा के अपने-आप प्राप्त हुए पदार्थ में सदा संतुष्ट रहता है, जिसमें ईर्ष्या का सर्वथा अभाव हो गया हो, जो हर्ष-शोक आदि द्वंद्वों से सर्वथा अतीत हो गया है- ऐसा सिद्धि और असिद्धि में सम रहने वाला कर्मयोगी कर्म करता हुआ भी उनसे नहीं बँधता

05/01/2018

जोभरा नहीं है भावों से
बहती जिसमें रसधार नहीं ।।
वो हृदय नहीं वो पत्थर है .
जिसमेँ श्वदेश का प्यार नहीं ।।


..।।भाव पुष्प ।।
।।जयश्रीराम ।।
शुभ रात्रि।।

एकदंताय वक्रतुण्डाय गौरीतनयाय धीमहि  ।।गजेशानाय भालचन्द्राय श्रीगणेशाय धीमहि।।सभी भक्तजनो को गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभ...
05/01/2018

एकदंताय वक्रतुण्डाय गौरीतनयाय धीमहि ।।
गजेशानाय भालचन्द्राय श्रीगणेशाय धीमहि।।
सभी भक्तजनो को गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाये ।
श्री गणेश सभी भक्तजनो का कल्याण करे।
श्री गणेशाय नमः

31/12/2017

अपनों को अपनी सम्पत्ति बसीयत करते देखा. लेकिन पराये हेतु थोड़ी प्रेम रूपी सम्पत्ति बसीयत कर दे प्यारे. वही भगवान का प्यारा भक्त हैं।।

हर हर महादेव।
16/12/2017

हर हर महादेव।

🙏शुभरात्रि वन्दे मातरम🙏    मंगलं भवतु     🙏 श्रीमद्भगवद्गीता 🙏                    9/19तपाम्यहमहं वर्षं निगृह्‌णाम्युत्सृ...
16/12/2017

🙏शुभरात्रि वन्दे मातरम🙏
मंगलं भवतु
🙏 श्रीमद्भगवद्गीता 🙏
9/19

तपाम्यहमहं वर्षं निगृह्‌णाम्युत्सृजामि च।
अमृतं चैव मृत्युश्च सदसच्चाहमर्जुन॥

मैं ही सूर्यरूप से तपता हूँ, वर्षा का आकर्षण करता हूँ और उसे बरसाता हूँ। हे अर्जुन! मैं ही अमृत और मृत्यु हूँ और सत्‌-असत्‌ भी मैं ही हूँ।

🌺सत्यमेव जयते।🌺
🌻भारतमाता की जय🌻.
🌷जय श्रीकृष्णा🌷
🕉🙏🕉

*आज का पंचांग* आज का दिनाँक - *29 अगस्त  2016*दिन - *सोमवार* विक्रम संवत - 2073शक संवत -1938अयन - दक्षिणायनऋतु - शरदगुजर...
29/08/2016

*आज का पंचांग*

आज का दिनाँक - *29 अगस्त 2016*
दिन - *सोमवार*
विक्रम संवत - 2073
शक संवत -1938
अयन - दक्षिणायन
ऋतु - शरद
गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार मास - श्रावण
मास - भाद्रपद
पक्ष - कृष्ण
तिथि - दोपहर 02:29 तक द्वादशी - दोपहर 02:30 से त्रयोदशी
नक्षत्र - पुनर्वसु
योग - व्यतीपात - सुबह 11:04 तक
*राहुकाल* - सुबह 07:36 से सुबह 09:12 तक
दिशाशूल - पूर्व दिशा में
व्रत-पर्व विवरण-सोमप्रदोष व्रत

*राशिफल*:
*मेष*:
आज आप संवेदनशीलता का अनुभव करेंगे जिसके कारण किसी के द्वारा आपकी भावना को झटका ल सकता है। आज आपको माँ की बीमारी के विचार सतायेंगे। मकान या जमीन के दस्तावेज से संबंधित काम आज न करें। स्त्री एवं पानी से बचें।

*वृषभ*:
आज आप को ज्यादा संवेदनशील एवं भावुकता भरे विचार आयेंगे। आपकी चिंता कम होगी और उस के कारण आप का मन खुश रहेगा। आप कल्पना शक्ति से सर्जनात्मक काम कर सकेंगे। पैसों के बारे में ध्यान रखने से उसका आयोजन कर सकेंगे।

*मिथुन*:
आज रिश्तेदार एवं मित्रों के साथ मुलाकात से आप आनंद का अनुभव करेंगे। आर्थिक योजना में आप को पहले थोड़ी मुसीबतें पड़ेंगी। आप के जरूरी काम भी शुरू में विलंब के बाद आसानी से पूरे होने पर आप शांति का अहसास करेंगे। नौकरी-धंधे में अनुकूल वातावरण रहेगा।

*कर्क*:
आज आप के मन में प्यार एवं भावनाएं छलकेंगी और आप उसके प्रवाह में रहेंगे। दोस्त, स्वजन एवं संबंधी की ओर से भेंट-सौगात मिल सकती हैं एवं आप उनके साथ दिन अपना दिन खुशी में बिता सकेंगे। पत्नी के संग से मन प्रसन्न रहेगा।

*सिंह*:
आज कोर्ट-कचहरी के प्रश्न में सावधानी बरतें। आज मन भावनाओं से व्यथित रहेगा जिससे आप उसके प्रवाह में आकर कोई अनैतिक काम न करे, उसका ख्याल रखें। महिलाओं के बारे में विशेष ध्यान रखें। विदेश से समाचार मिलेंगे। कानूनी बातों का निर्णय सोच-समझकर करें।

*कन्या*:
आपके लिए घर, परिवार एवं व्यापार जैसे तमाम क्षेत्र लाभ लिए प्रतीक्षा कर रहे हैं। स्त्री-मित्र विशेष लाभदायी रहेंगे। धन-प्राप्ति के लिए भी शुभ समय है। व्यापार के पैसे लेने के लिए प्रवास होगा। अविवाहितों के लिए जीवनसाथी की तलाश में सफलता मिलेगी।

*तुला*:
आज आप के लिए नौकरी में पदोन्नति के योग देख रहे हैं। आप पर अधिकारियों की कृपा दृष्टि रहेगी। परिवार में उत्सव का माहौल बना रहेगा। मन में भावनात्मकता बढ़ेगी। मां की ओर से फायदा होगा। उत्तम विवाहसुख प्राप्त होगा। व्यवसाय क्षेत्र में अच्छा एवं सफल दिन है।

*वृश्चिक*:
आपका आज का दिन प्रतिकूलताओं एवं अनुकूलताओं से मिश्रित होगा। लेखन-साहित्य से जुड़ी प्रवृत्तियां प्रभावी होंगी। व्यवसाय के स्थल पर प्रतिकूल परिस्थिति रहेगी। ऊपरी अधिकारियों का रवैया नकारात्मक रहेगा। प्रवास की संभावना है। धन-खर्च होगा।

*धनु*:
आज खाने-पीने में खास ध्यान रखें। कार्य सफलता में विलंब होने के कारण निराशा का अनुभव होगा। काम समय से पूरा नहीं होगा। काम का बोझ ज्यादा रहेगा। नये काम की शुरुआत न करें। शारीरिक स्वास्थ्य बिगड़ेगा। मन बेचैन एवं व्यग्र रहेगा। खर्च ज्यादा होगा।

*मकर*:
आज का दिन पैसों की दृष्टि से बहुत अच्छा रहेगा। व्यापार वृद्धि के योग हैं। इस के अलावा दलाली, ब्याज, कमिशन में से मिलने वाले पैसे आप के भंडार में वृद्धि करेंगे। प्रेमियों के लिए आज प्रणय परिचय का योग है। विजातीय आकर्षण रहेगा।

*कुंभ*:
वर्तमान समय में आप को कार्यों में सफलता मिलेगी एवं यशकीर्ति प्राप्त होगी। आज आप के स्वभाव में ज्यादा भावुकता रहेगी। घर में उल्लास का माहौल होगा। नौकरी में भी आप को साथियों का साथ सहयोग मिल सकेगा। तन एवं मन से आप प्रफुल्लता का अनुभव करेंगे।

*मीन*:
आज का दिन विद्यार्थियों के लिए अच्छा है। अभ्यास में सफलता मिलेगी एवं प्रगति के लिए नया मौका प्राप्त होगा। प्रेमी-जन एक दूसरे का सानिध्य पा सकेंगे। आप के स्वभाव में ज्यादा भावुकता एवं कामुकता रहेगी। स्त्री-मित्रों से खर्च होगा।
🙏🏼
संतोष कुमार चतुर्वेदी
व्याकरणाचार्य,ज्योतिषाचार्य,धर्म उपदेशक साहित्य रत्न,विद्या वारिधि,पी.एच.डी.

14/08/2016

🐍जय महाकाल बाबा 🐍

💐 ||सुप्रभातम्||💐
📜आज का पंचांग 📜

रक्षाबंधन पर बनेगा सिंहासन-गौरी योग, ये हैं पूरे दिन के शुभ मुहूर्त...🌹

18 अगस्त को आ रहे भाई-बहन के प्रेम के प्रतीक रक्षाबंधन पर्व पर इस बार भद्रा का साया नहीं पड़ेगा। तीन वर्ष के बाद यह संयोग बन रहा है, जब रक्षाबंधन के दिन लोगों को भद्रा काल देखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। लोग दिनभर शुभ मुहूर्तों में राखी बांध सकेंगे। साथ ही इस बार सिंहसान-गौरी योग के बनने से रक्षाबंधन का पर्व और भी विशेष रहेगा।
वाराणसी के ज्योतिषाचार्य पंडित संतोष कुमार चतुर्वेदी के अनुसार, इस बार श्रावण शुक्ल पूर्णिमा रक्षाबंधन का पर्व भद्रा मुक्त रहेगा क्योंकि भद्रा काल सूर्योदय होने से पहले ही समाप्त हो जाएगा। इस कारण लोग चाहें तो सुबह मुहूर्त में रक्षाबंधन कर सकते हैं। दोपहर व शाम को भी राखी बांधने के लिए शुभ मुहूर्त हैं। वाराणसीके ही ज्योतिष पं. संतोष कुमार चतुर्वेदी के अनुसार, वर्ष 2013 में भी इस तरह के योग बने थे। अब तीन वर्ष के बाद फिर राखी पर भद्रा का साया नहीं होने से बहनें पूरे दिन भाईयों को राखी बांध सकेंगी।

ये हैं रक्षाबंधन के शुभ मुहूर्त
सुबह 06 से 07.30 बजे तक- शुभ
सुबह 10.30 से दोपहर 12 बजे तक- चर
दोपहर 12 से 01.30 बजे तक- लाभ
दोपहर 01.30 से 03 बजे तक- अमृत
शाम 04.30 से 06 बजे तक- शुभ
शाम 06 से 07.30 बजे तक- अमृत
🌹🌹🌹🌹

संतोष कुमार चतुर्वेदी
(व्याकरणाचार्य,ज्योतिषाचार्य,धर्म उपदेशक साहित्य रत्न ,बी.एड.विद्या वारिधि,पी.एच.डी.)

25/06/2016

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जानिये भगवान श्री कृष्ण जी की रानियों और पुत्रों के बारे में।

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भगवान श्री कृष्ण की 16,100 रानियां, आठ पटरानियां तथा 80 पुत्र

भगवान श्री कृष्ण की 8 पत्नियां थी। प्रत्येक पत्नी से उन्हें 10 पुत्रों की प्राप्ति हुई थी इस तरह से उनके 80 पुत्र थे। इनके अलावा श्री कृष्ण की 16100 और पत्नियां बताई जाती है। इन 16100 कन्याओं को श्री कृष्ण ने नरकासुर राक्षस का वध कर मुक्त कराया था और अपने यहाँ आश्रय दिया था। इन सभी कन्याओं ने श्री कृष्ण को पति स्वरुप मान लिया था।

1. रुक्मणी :- महाभारत अनुसार कृष्ण ने रुक्मणि का हरण कर उनसे विवाह किया था। विदर्भ के राजा भीष्मक की पुत्री रुक्मणि भगवान कृष्ण से प्रेम करती थी और उनसे विवाह करना चाहती थी। रुक्मणि के पांच भाई थे- रुक्म, रुक्मरथ, रुक्मबाहु, रुक्मकेस तथा रुक्ममाली। रुक्मणि सर्वगुण संपन्न तथा अति सुन्दरी थी। उसके माता-पिता उसका विवाह कृष्ण के साथ करना चाहते थे किंतु रुक्म चाहता था कि उसकी बहन का विवाह चेदिराज शिशुपाल के साथ हो। यह कारण था कि कृष्ण को रुक्मणि का हरण कर उनसे विवाह करना पड़ा।
रूक्मिणी के पुत्रों के ये नाम थे- प्रद्युम्न, चारूदेष्ण, सुदेष्ण, चारूदेह, सुचारू, विचारू, चारू, चरूगुप्त, भद्रचारू, चारूचंद्र।

2. सत्यभामा :- सत्यभामा, सत्राजीत की पुत्री थी, सत्राजीत को शक्तिसेन के नाम से भी जानते है। सत्यभामा के पुत्रों के नाम थे- भानु, सुभानु, स्वरभानु, प्रभानु, भानुमान, चंद्रभानु, वृहद्भानु, अतिभानु, श्रीभानु और प्रतिभानु।

3. सत्या :- सत्या राजा कौशल की पुत्री थी। सत्या के बेटों के नाम ये थे- वीर, अश्वसेन, चंद्र, चित्रगु, वेगवान, वृष, आम, शंकु, वसु और कुंत।

4. जाम्बवंती :- जाम्बवंती, निषाद राज जाम्बवन की पुत्री थी। जाम्बवान उन गिने चुने पौराणिक पात्रों में से एक है जो रामायण और महाभारत दोनों समय उपस्तिथ थे। जाम्बवंती के पुत्र ये थे- साम्ब, सुमित्र, पुरूजित, शतजित, सहस्रजित, विजय, चित्रकेतु, वसुमान, द्रविड़ व क्रतु।

5. कालिंदी:- कृष्ण की पत्नी कालिंदी, खांडव वन की रहने वाली थी। यही पर पांडवो का इंद्रप्रस्थ बना था। कालिंदी के पुत्रों के नाम ये थे- श्रुत, कवि, वृष, वीर, सुबाहु, भद्र, शांति, दर्श, पूर्णमास एवं सोमक।

6. लक्ष्मणा:- मद्र कन्या लक्ष्मणा, वृहत्सेना की पुत्री थी। लक्ष्मणा के पुत्रों के नाम थे- प्रघोष, गात्रवान, सिंह, बल, प्रबल, ऊध्र्वग, महाशक्ति, सह, ओज एवं अपराजित।

7. मित्रविंदा :-मित्रविंदा, अवन्तिका की राजकुमारी थी। मित्रविंदा के पुत्रों के नाम – वृक, हर्ष, अनिल, गृध, वर्धन, अन्नाद, महांश, पावन, वहिन तथा क्षुधि।

8. भद्रा :-कृष्ण की अंतिम पत्नी, भद्रा केकय कन्या थी। ये थे भद्रा के पुत्र – संग्रामजित, वृहत्सेन, शूर, प्रहरण, अरिजित, जय, सुभद्र, वाम, आयु और सत्यक।

🙏🙏 संतोष कुमार चतुर्वेदी🙏🙏

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