Anantam Ventures

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अपनी सत्तर बरस की " माँ " को देखकरक्या सोचा है कभी ...?वो भी कभी कालेज में कुर्ती और ,स्लैक्स पहन कर जाया करती थी..तुम ह...
09/09/2024

अपनी सत्तर बरस की " माँ " को देखकर
क्या सोचा है कभी ...?
वो भी कभी कालेज में कुर्ती और ,
स्लैक्स पहन कर जाया करती थी..
तुम हरगिज़ नहीं सोच सकते .. कि
तुम्हारी "माँ" भी कभी घर के आँगन में
चहकती हुई, उधम मचाती दौड़ा करती थी ..तो
घर का कोना - कोना गुलज़ार हो उठता था...
किशोरावस्था में वो जब कभी
अपने गिलों बालों में तौलिया लपेटे
छत पर आती गुनगुनानी धूप में सुखाने जाती थी, तो ..
न जाने कितनी पतंगे आसमान में कटने लगती थी..
क्या सोचा है कभी ...?
अट्ठारह बरस की "माँ” ने
तुम्हारे चौबीस बरस के पिता को
जब वरमाला पहनाई, तो मारे लाज से
दोहरी होकर गठरी बन, अपने वर को
नज़र उठाकर भी नहीं देखा..
तुमने तो कभी ये भी नहीं सोचा होगा, कि
तुम्हारे आने की दस्तक देती उस
प्रसव पीड़ा के उठने पर
कैसे दाँतों पर दाँत रख
अस्पताल की चौखट पर गई होगी
क्या सोच सकते हो कभी ..?
अपने जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि
तुम्हें मानकर अपनी सारी शैक्षणिक डिगरियाँ
जिस संदूक में अखबार के पन्नो में
लपेटकर ताला बंद की थी
उस संदूक की चाभी आज तक उसने नहीं ढूँढी...
और तुम
उसके झुर्रिदार काँपते हाथों, क्षीण याददाश्त,
कमजोर नज़र और झुकी हुई कमर को देखकर
उनसे कतराकर खुद पर इतराते हो
ये बरसों का सफ़र है ...!
तुम कभी सोच भी नहीं सकते🌏🌏

27/07/2024
Comment plz
10/05/2024

Comment plz

WHO खाने पर एक सर्वे हुआ, सर्वे पूरी दुनिया के खाने पर किया गया जिसका उद्देश्य ये जानना था की पूरी दुनिया में सबसे अच्छा...
25/04/2024

WHO खाने पर एक सर्वे हुआ, सर्वे पूरी दुनिया के खाने पर किया गया जिसका उद्देश्य ये जानना था की पूरी दुनिया में सबसे अच्छा खाना क्या है
उसके लिए उसे 3 कसौटियों पर खरा उतरना था
पहला को वो बनाने में आसान हो
दूसरा उसमे एक इंसान के लिए सभी जरूरी तत्व हो
तीसरा खाने में स्वाद होना चाहिए

Who की टीम पूरे दुनिया घूमती है और ये देखती है की दुनिया में सबसे आसानी से बनाने वाला खाना क्या है और उस देश के लोग उसे कितना खाते हैं
इसमें उन्हें एक खाना मिला वो था दाल चावल
उन्होंने देखा की भारत के हर स्टेट में डाल चावल बेहद वृहद रूप से खाया जाता है कहीं साभार कही दाल कहीं दालमा

दूसरी कसौटी आतीं है की बनाने में आसान हो
इसमें भी डाल को चावल को सेलेक्ट किया गया
वो जानकर हैरान थे की चावल को मात्र पानी डालकर बनाया जाता है और दाल में हल्दी और नमक

अब तीसरी कसौटी खाने में टेस्ट हो।

तो जब उन्हें गर्म गर्म दाल चावल और ऊपर से देसी घी डाल कर दिया गया तो पहला निवाला खाते हो सब मस्त हो गए

अब चौथी कसौटी की पोषण हो
इसके लिए दाल और चावल के सैंपल को अपने साथ ले गए और उन्होंने पाया

दाल में फाइबर प्रोटीन आयरन और जरूरी मिनरल थे
Antibiotic और आयोडीन की कमी हल्दी और नमक से पूरी हो रही थी

चावल में कार्बोहाइड्रेट और अन्य तरह के विटामिन थे

अंत में निष्कर्ष ये निकला की भारतीय दालचावल सब्जी और अगर उसके साथ सलाद हो तो ये दुनिया के सबसे बेहतरीन खाने में से एक है
ये एक मात्र खाना है जिससे किसी भी तरह का साइड इफेक्ट नहीं होता है

बाद में पता चला की इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य इस खाने को लेके ये पता करना था की यदि अमेरिका और यूरोप में युद्ध की स्थिति हो तो सबसे सस्ता और सबसे कम समय में तैयार होने वाला पौष्टिक खाना क्या है जिसे महीनो खाया जाए तो भी मन ना भरे

और वास्तव में डालचावल जितना सिंपल है उतना ही बेहतर
लेकिन हम लोग इसे छोड़ pizza burger खाते हैं

दाल चावल का खर्चा भी काफी कम होता है

तो आप इस बात से कितना सहमत हैं हमे कमेंट कर के बताइए जरूर

महान क्रांतिकारी भगतसिंह जी की बहन प्रकाश कौर जी का देहांत 2014 में हुआ था, वो भी उसी दिन जिस दिन भगतसिंह जी की 107वीं ज...
21/04/2024

महान क्रांतिकारी भगतसिंह जी की बहन प्रकाश कौर जी का देहांत 2014 में हुआ था, वो भी उसी दिन जिस दिन भगतसिंह जी की 107वीं जयंती थी।

प्रकाश कौर जी ने एक इंटरव्यू में कहा था कि "जब मैं उनसे आखिरी बार रक्षाबंधन के दिन जेल में मिलने गई, तब उन्होंने कहा कि मैं तो गोरों से लड़ रहा हूँ, पर तुम सबको उन कालों से लड़ना है, जो देश आज़ाद होने के बाद भ्रष्टाचार करेंगे"

अपनी मृत्यु और अपनों की मृत्यु डरावनी लगती है!बाकी तो मौत को enjoy ही करता है इंसान ...मौत के स्वाद का चटखारे लेता मनुष्...
12/04/2024

अपनी मृत्यु और अपनों की मृत्यु डरावनी लगती है!
बाकी तो मौत को enjoy ही करता है इंसान ...

मौत के स्वाद का
चटखारे लेता मनुष्य ...

थोड़ा कड़वा लिखा है पर मन का लिखा है,
मौत से प्यार नहीं, मौत तो हमारा स्वाद है,

बकरे का,
गाय का,
भेंस का,
ऊँट का,
सुअर,
हिरण का,
तीतर का,
मुर्गे का,
हलाल का,
बिना हलाल का,
ताजा बकरे का,
भुना हुआ,
छोटी मछली,
बड़ी मछली,
हल्की आंच पर सिका हुआ।
न जाने कितने बल्कि अनगिनत स्वाद हैं मौत के।
क्योंकि मौत किसी और की, और स्वाद हमारा....

स्वाद से कारोबार बन गई मौत।
मुर्गी पालन, मछली पालन, बकरी पालन, पोल्ट्री फार्म्स।
नाम "पालन" और मक़सद "हत्या"❗

स्लाटर हाउस तक खोल दिये। वो भी ऑफिशियल।

गली गली में खुले नान वेज रेस्टॉरेंट, मौत का कारोबार नहीं तो और क्या हैं ? मौत से प्यार और उसका कारोबार इसलिए क्योंकि मौत हमारी नही है।

जो हमारी तरह बोल नही सकते,
अभिव्यक्त नही कर सकते, अपनी सुरक्षा स्वयं करने में समर्थ नहीं हैं,
उनकी असहायता को हमने अपना बल कैसे मान लिया ?
कैसे मान लिया कि उनमें भावनाएं नहीं होतीं ?
या उनकी आहें नहीं निकलतीं ?

डाइनिंग टेबल पर हड्डियां नोचते बाप बच्चों को सीख देते है, बेटा कभी किसी का दिल नही दुखाना !
किसी की आहें मत लेना !
किसी की आंख में तुम्हारी वजह से आंसू नहीं आना चाहिए !

बच्चों में झुठे संस्कार डालते बाप को, अपने हाथ मे वो हडडी दिखाई नही देती, जो इससे पहले एक शरीर थी, जिसके अंदर इससे पहले एक आत्मा थी, उसकी भी एक मां थी ...??
जिसे काटा गया होगा ?
जो कराहा होगा ?
जो तड़पा होगा ?
जिसकी आहें निकली होंगी ?
जिसने बद्दुआ भी दी होगी ?

कैसे मान लिया कि जब जब धरती पर अत्याचार बढ़ेंगे तो
भगवान सिर्फ तुम इंसानों की रक्षा के लिए अवतार लेंगे ..❓

क्या मूक जानवर उस परमपिता परमेश्वर की संतान नहीं हैं .❓
क्या उस ईश्वर को उनकी रक्षा की चिंता नहीं है ..❓
धर्म की आड़ में उस परमपिता के नाम पर अपने स्वाद के लिए कभी ईद पर बकरे काटते हो, कभी दुर्गा मां या भैरव बाबा के सामने बकरे की बली चढ़ाते हो।
कहीं तुम अपने स्वाद के लिए मछली का भोग लगाते हो।

कभी सोचा ...??
क्या ईश्वर का स्वाद होता है ? ....क्या है उनका भोजन ?

किसे ठग रहे हो ?
भगवान को ?

मंगलवार को नानवेज नही खाता ...!
आज शनिवार है इसलिए नहीं ...!

नवरात्रि में तो सवाल ही नही उठता ....!

झूठ पर झूठ...
झूठ पर झूठ
झूठ पर झूठ ..

हमारे बच्चों को अगर कोई ऐसे खाए तो हमें कैसा लगेगा ??

कर्म का फल मिल कर रहता है ये याद रखना ।

ईश्वर ने बुद्धि सिर्फ तुम्हे दी!
ताकि तमाम योनियों में भटकने के बाद मानव योनि में तुम जन्म मृत्यु के चक्र से निकलने का रास्ता ढूँढ सको!
लेकिन तुमने इस मानव योनि को पाते ही स्वयं को भगवान समझ लिया!

प्रकृति के साथ रहो।
प्रकृति के होकर रहो।

अंग्रेज़ों की क़ैद में दो क्रांतिकारी ज़ंजीरों से जकड़े हुए - तस्वीर 1896 की
15/02/2024

अंग्रेज़ों की क़ैद में दो क्रांतिकारी ज़ंजीरों से जकड़े हुए - तस्वीर 1896 की

ये मत पढ़िएगा, इसके बदले 100-200 रिल्स देख लीजिए।किराया न देने पर 94 साल के एक बुजुर्ग को मकान मालिक ने किराये के मकान स...
13/02/2024

ये मत पढ़िएगा, इसके बदले 100-200 रिल्स देख लीजिए।

किराया न देने पर 94 साल के एक बुजुर्ग को मकान मालिक ने किराये के मकान से बाहर निकाल दिया। बूढ़े आदमी के पास एक पुराने बिस्तर, कुछ एल्युमीनियम के बर्तन, एक प्लास्टिक की बाल्टी और एक मग आदि के अलावा शायद ही कोई सामान था। बूढ़े आदमी ने मालिक से अनुरोध किया कि उसे किराया देने के लिए कुछ समय दिया जाए। पड़ोसियों को भी बूढ़े आदमी पर दया आ गई और उन्होंने मकान मालिक को किराया देने के लिए कुछ समय देने के लिए मना लिया। मकान मालिक ने अनिच्छा से उसे किराया चुकाने के लिए कुछ समय दिया।

बूढ़ा अपना सामान अंदर ले गया।

वहां से गुजर रहे एक पत्रकार ने रुककर पूरा नजारा देखा। उन्होंने सोचा कि इस मामले को अपने अखबार में प्रकाशित करना उपयोगी होगा। उन्होंने एक शीर्षक भी सोचा, 'क्रूर मकान मालिक ने पैसे के लिए बूढ़े आदमी को किराए के घर से बाहर निकाल दिया।' फिर उसने पुराने किरायेदार की कुछ तस्वीरें लीं और किराए के मकान की भी कुछ तस्वीरें लीं.

पत्रकार ने जाकर अपने प्रेस मालिक को घटना के बारे में बताया। प्रेस के मालिक ने तस्वीरें देखीं तो हैरान रह गए। उन्होंने पत्रकार से पूछा, क्या वह उस बूढ़े व्यक्ति को जानते हैं? पत्रकार ने कहा नहीं.

अगले दिन अखबार के पहले पन्ने पर बड़ी खबर छपी. शीर्षक था 'भारत के पूर्व प्रधानमंत्री गुलज़ारीलाल नंदा, दयनीय जीवन जी रहे हैं'। खबर में आगे लिखा था कि कैसे पूर्व प्रधानमंत्री किराया देने में असमर्थ थे और कैसे उन्हें घर से बाहर निकाल दिया गया. कमेंट किया गया कि आजकल फ्रेशर्स भी खूब पैसा कमाते हैं. वहीं, जो शख्स दो बार पूर्व प्रधानमंत्री रह चुका है और लंबे समय तक केंद्रीय मंत्री भी रह चुका है, उसके पास अपना खुद का घर तक नहीं है।

दरअसल गुलज़ारीलाल नंदा को रु. 500.00 प्रति माह भत्ता लेकिन उन्होंने यह पैसा यह कहकर अस्वीकार कर दिया था कि उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों के भत्ते के लिए लड़ाई नहीं लड़ी। बाद में, दोस्तों ने उन्हें यह कहकर स्वीकार करने के लिए मजबूर किया कि उनके पास उत्पत्ति का कोई अन्य स्रोत नहीं था। इन पैसों से वह अपना किराया चुकाकर गुजारा करते थे।

अगले दिन तत्कालीन प्रधान मंत्री ने मंत्रियों और अधिकारियों को गाड़ियों के बेड़े के साथ उनके घर भेजा। इतनी सारी वीआईपी गाड़ियों का बेड़ा देखकर मकान मालिक दंग रह गया. तभी उन्हें पता चला कि उनके किरायेदार गुलज़ारी लाल नंदा भारत के पूर्व प्रधान मंत्री थे। मकान मालिक तुरंत गुलजारी लाल नंदा के दुर्व्यवहार के लिए उनके चरणों में झुक गया।

अधिकारियों और वीआईपी ने गुलजारीलाल नंदा से सरकारी आवास और अन्य सुविधाएं स्वीकार करने का अनुरोध किया। गुलजारी लाल नंदा ने यह कहकर उनका प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया कि इस बुढ़ापे में ऐसी सुविधाओं का क्या फायदा। अपनी अंतिम सांस तक उन्होंने एक सामान्य नागरिक की तरह सादा जीवन व्यतीत किया। वर्ष, 1997 में सरकार ने उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया।

जरा उनके जीवन की तुलना वर्तमान समय के राजनेताओं से करें।

15 जनवरी को भारत के इस दिग्गज नेता की पुण्य तिथि होती है..

The Artist Arun Yogiraj ❤️‍🔥
25/01/2024

The Artist Arun Yogiraj ❤️‍🔥

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