24/05/2026
#बालाघाट
खरीफ सीजन में डीएसआर तकनीक को बढ़ावा देने जिला स्तरीय प्रशिक्षण एवं समीक्षा बैठक आयोजित
खरीफ मौसम में जल संरक्षण आधारित टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने और धान उत्पादन में आधुनिक तकनीकों के उपयोग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से बालाघाट में डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) तकनीक पर जिला स्तरीय प्रशिक्षण एवं समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता उपसंचालक कृषि श्री फूल सिंह मालवीय ने की।
बैठक में WRI India की शोधकर्ता सुश्री नूपुर कुलकर्णी एवं शिवांगी अरविंद ने सहभागिता करते हुए डीएसआर तकनीक की उपयोगिता, लाभ एवं जमीनी स्तर पर इसके प्रभावी क्रियान्वयन की रणनीतियों पर विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम में आत्मा बालाघाट, कृषि विज्ञान केंद्र के डॉ. धूवारे एवं डॉ. उत्तम बिसेन सहित जिले के सभी विकासखंडों के डीएसआर नोडल अधिकारी, कृषि विस्तार अधिकारी तथा विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
विशेषज्ञों ने बताया कि डीएसआर तकनीक धान उत्पादन की आधुनिक एवं वैज्ञानिक पद्धति है, जिससे पानी की बचत, श्रम लागत में कमी तथा उत्पादन क्षमता में वृद्धि संभव है। अधिकारियों को तकनीक के प्रभावी प्रचार-प्रसार एवं किसानों तक इसकी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षण दिया गया तथा डब्ल्यूआरआई के दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्ययोजना बनाकर क्रियान्वयन करने के निर्देश दिए गए। बैठक में Savanna Seeds के प्रतिनिधि रितेश सिंह ने डीएसआर से संबंधित तकनीकी पहलुओं एवं बीज प्रबंधन की जानकारी साझा की। वहीं प्रदान संस्था के रूपेश ने भी डीएसआर तकनीक के व्यवहारिक पक्षों एवं किसानों के अनुभवों पर विस्तार से चर्चा की।
बैठक में डीएसआर तकनीक के जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की गई। आत्मा योजना अंतर्गत 240 एकड़ क्षेत्र में प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित करने, कृषि सखी के माध्यम से 5000 हेक्टेयर क्षेत्र में डीएसआर विस्तार का लक्ष्य निर्धारित करने, किसानों के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा अनुशंसित पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेस के पालन पर विशेष जोर दिया गया। इसके अलावा प्रत्येक कृषि विस्तार अधिकारी के क्षेत्र में डीएसआर रकबा तय करने तथा तकनीक के क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों एवं उनके समाधान पर भी विचार-विमर्श किया गया।
विशेषज्ञों ने किसानों से आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने और जल संरक्षण आधारित खेती की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की। कृषि विभाग एवं जिला प्रशासन द्वारा आगामी खरीफ सीजन में डीएसआर तकनीक को व्यापक स्तर पर लागू करने के लिए विशेष अभियान भी चलाया जाएगा।